'छात्रों की गूंज' स्क्रिप्टेड स्टंट था: विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, PM की माँ पर टिप्पणी को बताया शर्मनाक
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने 21 सितंबर 2026 को भोपाल में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर तीखा हमला बोला और इसे कथित तौर पर कांग्रेस पदाधिकारियों व एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का 'स्क्रिप्टेड राजनीतिक स्टंट' करार दिया। सारंग ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में वास्तविक छात्रों की जगह पार्टी कार्यकर्ताओं को छात्रों के रूप में मंच पर उतारा गया और पूर्व निर्धारित सवालों के ज़रिए राजनीतिक संदेश प्रसारित करने की कोशिश की गई।
कार्यक्रम पर आरोप: 'छात्रों की नहीं, झूठ की गूंज'
सारंग ने कहा कि कार्यक्रम का नाम 'छात्रों की गूंज' रखा गया था, लेकिन वहाँ छात्रों की असली आवाज़ नहीं, बल्कि 'झूठ की गूंज' सुनाई दी। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने दावा किया कि मंच पर आए अधिकांश प्रतिभागी कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता थे, न कि आम छात्र।
मंत्री के अनुसार, कांग्रेस ने यह कार्यक्रम 'युवाओं से संवाद' के रूप में प्रचारित किया था, लेकिन व्यवहार में कांग्रेस के ऑफिस बियरर्स को 'छात्रों का मुखौटा' पहनाकर पहले से लिखी पटकथा के अनुसार बोलने के लिए कहा गया। इससे कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
PM की दिवंगत माँ पर टिप्पणी: 'यह शर्मनाक है'
सारंग ने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माँ को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम 'मिमिक्री और कॉमेडी शो' में बदल गया, जो किसी भी गंभीर राजनीतिक संवाद के लिए अशोभनीय है।
मंत्री ने कहा, "माँ शब्द का सम्मान पूरी दुनिया में होता है। किसी बुजुर्ग महिला का — चाहे वे किसी भी नेता की माँ हों — मज़ाक उड़ाना उचित नहीं है। यह मेरे लिए शर्मनाक विषय है।" उन्होंने जोड़ा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, परंतु परिवार को और विशेष रूप से माँ जैसे सम्मानजनक रिश्ते को राजनीतिक बहस में घसीटना मर्यादा का उल्लंघन है।
गरबा विवाद पर सारंग का रुख
सारंग ने गरबा को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गरबा महज़ मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जगत जननी माँ की आराधना से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें देवी की मूर्ति या तस्वीर को केंद्र में रखकर उनके आसपास नृत्य किया जाता है।
मुस्लिम समुदाय की भागीदारी के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा या वंदे मातरम् को स्वीकार नहीं करते, उनके लिए देवी की मूर्ति के इर्द गिर्द होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का औचित्य स्वाभाविक रूप से प्रश्नात्मक बन जाता है। उनके अनुसार, गरबा में शामिल होने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को इस परंपरा की धार्मिक प्रकृति और आस्था का सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। सारंग के इस हमले से 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों को युवाओं और छात्रों से जुड़ी वास्तविक समस्याओं — शिक्षा, रोज़गार, और कौशल विकास — पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया अपेक्षित है।