पश्चिम बंगाल में पुलिस का राजनीतिक दुरुपयोग: टीएमसी सांसद सागरिका घोष का सरकार पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सागरिका घोष ने बुधवार, 2 सितंबर को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में पश्चिम बंगाल में पुलिस प्रशासन के कथित दुरुपयोग को लेकर राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था का जिस तरह राजनीतिकरण हो रहा है, वह संविधान और लोकतंत्र दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
पुलिस दुरुपयोग के आरोप
सागरिका घोष ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पश्चिम बंगाल में पुलिस का दुरुपयोग कर रही है।' उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की स्थिति में आम नागरिकों की सुरक्षा सीधे खतरे में आ जाती है। उनके अनुसार, सरकार बदल सकती है, लेकिन संविधान को निलंबित नहीं किया जा सकता।
एफआईआर और नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी
TMC सांसद ने आरोप लगाया कि राज्य में प्राथमिकी (FIR) दर्ज तो की जा रही है, लेकिन उसे ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जा रहा — जो सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि एफआईआर ऑनलाइन उपलब्ध होनी चाहिए ताकि आरोपी को अपने खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी मिल सके। इसके बावजूद न तो एफआईआर सार्वजनिक की जा रही है और न ही कोई पूर्व सूचना दी जा रही है।
घोष ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 35(3) का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत आरोपी को नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन राज्य में इस प्रावधान की खुलेआम अनदेखी हो रही है। उनके अनुसार, पुराने मामलों को फिर से उखाड़ा जा रहा है, नई एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और बिना किसी विधिक प्रक्रिया के तत्काल गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं।
संवैधानिक उल्लंघन और जवाबदेही
सागरिका घोष ने कहा कि राज्य की मौजूदा स्थिति 'पूरी तरह से संविधान का उल्लंघन' है और इसकी जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था के राजनीतिकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है।
TMC कार्यकर्ताओं पर अत्याचार का दावा
घोष ने आरोप लगाया कि TMC को दबाने के लिए पुलिस का हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और पार्टी कार्यकर्ताओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति 'मानवाधिकार का स्पष्ट उल्लंघन' है।
आगे की रणनीति
TMC सांसद ने चेतावनी दी कि पार्टी इस मुद्दे को हर मंच पर उठाएगी। उन्होंने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो हम सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार संगठनों तक पहुँचेंगे।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में पुलिस की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हों — राज्य में राजनीतिक हिंसा और पुलिस की निष्पक्षता पर बहस लंबे समय से जारी है। आने वाले दिनों में TMC इस मुद्दे पर न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहने का संकेत दे चुकी है।