योगी सरकार में UP का समग्र विकास, जगदंबिका पाल बोले — सैफई तक सिमटा था पहले का विकास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने 22 जून 2026 को लखनऊ में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास अब किसी एक क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँव-गाँव तक पहुँच रहा है। उनके अनुसार, पिछली सरकारों में विकास परिवारवाद और क्षेत्रीय पक्षपात की भेंट चढ़ जाता था।
पिछली सरकारों पर आरोप
जगदंबिका पाल ने कहा, 'सपा सरकार में विकास सिर्फ सैफई, मैनपुरी और कन्नौज जैसे पारिवारिक इलाकों तक सिमटा रहता था। बसपा सरकार में मायावती के गाँवों तक ही विकास कार्य होता था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में पूरे उत्तर प्रदेश का समग्र विकास हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि पहले सैफई में एम्स बनता था, लेकिन अब रायबरेली, पूर्वांचल समेत कई स्थानों पर एम्स स्थापित हो रहे हैं।
बुनियादी ढाँचे में विस्तार
पाल के अनुसार, प्रदेश के हर जनपद में मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। बस्ती और अयोध्या में भी बड़े विकास परियोजनाएँ चल रही हैं। इसके अलावा, राज्य में हवाई अड्डों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को धरातल पर उतारने का प्रमाण बताया।
विपक्षी गठबंधन पर निशाना
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के कांग्रेस-सपा गठबंधन के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए पाल ने कहा कि दोनों दलों के बीच आंतरिक मतभेद स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस 403 सीटों की तैयारी कर रही है, लेकिन अंदर कहीं न कहीं ज्वालामुखी फूट रहा है। अस्तित्व बचाने के लिए दोनों पार्टियाँ मिलकर लड़ रही हैं — इनके पास कोई सिद्धांत नहीं है, ये जनता के हित नहीं, सिर्फ सत्ता के लिए गठबंधन कर रहे हैं।'
तुष्टिकरण की राजनीति पर आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर होड़ मची हुई है। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि मायावती पाँच साल एक ही एजेंडे पर बात करती हैं, जबकि सपा चुनाव के समय ब्राह्मणों की बात करती है — जनता इस चुनावी गणित को भलीभाँति समझती है।
BJP का रुख
पाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा की नीतियाँ जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि ज़रूरत के आधार पर लाभ वितरित करती हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ परवान चढ़ रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियाँ तेज़ कर रहे हैं।