योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: ₹17,542 करोड़ से चार लिंक एक्सप्रेसवे, ₹1,710 करोड़ के चार GCC को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में ₹17,542.06 करोड़ की लागत से चार लिंक एक्सप्रेसवे निर्मित करने, ₹1,709.84 करोड़ के निवेश से चार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) स्थापित करने और ₹104.28 करोड़ की लागत से राज्य साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र बनाने के प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। इन फैसलों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी, डिजिटल सुरक्षा, औद्योगिक निवेश और सामाजिक कल्याण का एक साथ विस्तार करना है।
चार लिंक एक्सप्रेसवे: कनेक्टिविटी का नया जाल
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के माध्यम से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) पद्धति से चार लिंक एक्सप्रेसवे के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी। इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं।
फर्रुखाबाद, झांसी और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के दो-दो पैकेजों के विकासकर्ताओं के चयन को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं का निर्माण लगभग तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके बाद पाँच वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है। निर्माण और अनुरक्षण का संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करेगी; केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी इस योजना में प्रस्तावित नहीं है।
इन परियोजनाओं से 760 लाख मानव दिवस के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश का आवागमन अधिक सुगम होगा। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट क्षेत्र की सड़क संपर्क व्यवस्था और सुदृढ़ होगी।
चार GCC: गौतम बुद्ध नगर में वैश्विक निवेश
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र नीति-2024 के तहत चार कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की अनुमति दी। गौतम बुद्ध नगर में प्रस्तावित इन इकाइयों में हैवेल्स इंडिया लिमिटेड का ₹879 करोड़, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का ₹634 करोड़, अमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी का ₹112.84 करोड़ और मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड का ₹84 करोड़ का निवेश शामिल है।
हैवेल्स और एलजी सॉफ्ट इंडिया की परियोजनाएँ नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित हैं, जबकि अमेरिप्राइज और मेटलाइफ की इकाइयाँ एम्बेसी ऑक्सीजन बिजनेस पार्क में निजी भूमि पर स्थापित की जाएँगी। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, राज्य सरकार ने वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए 7 मई 2025 को यह नीति अधिसूचित की थी और 7 जनवरी 2026 को इसकी नियमावली जारी की गई थी। इन केंद्रों में तकनीकी विकास, अनुसंधान, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल परिचालन जैसी गतिविधियाँ संचालित होंगी।
₹104 करोड़ का साइबर सुरक्षा केंद्र
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) की स्थापना को मंजूरी दी, जिस पर जीएसटी सहित ₹104.28 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसके संचालन की जिम्मेदारी IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा नवाचार केंद्र C3iHub को सौंपी जाएगी।
यह केंद्र राज्य डेटा सेंटर, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क, सरकारी एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों की चौबीसों घंटे निगरानी करेगा। नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल, सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट, नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स तथा वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसी अत्याधुनिक तकनीकें तैनात की जाएँगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के जरिये संभावित साइबर खतरों का विश्लेषण किया जाएगा, और परियोजना के तहत तीन वर्षों तक साइबर ड्रिल तथा स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था भी रहेगी।
रोबोटिक्स पार्क और अन्य अहम निर्णय
कैबिनेट ने ग्रेटर नोएडा में 69.52 एकड़ भूमि पर प्रगति रोबोटिक्स पार्क स्थापित करने को स्वीकृति दी। इसके पूर्ण विस्तार पर एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने और अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग ₹2,000 करोड़ के सकल मूल्यवर्धन का अनुमान है। इसके अलावा लखनऊ-हरदोई सीमा पर PM मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क के मास्टर डेवलपर के चयन, राज्य पशुधन मिशन और प्रयागराज में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिकारियों के लिए 845 नए आवास बनाने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
1.70 लाख शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा
माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा उनके आश्रित परिजनों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया। इससे दोनों विभागों के कुल लगभग 1,70,366 कर्मचारियों को लाभ मिलने का अनुमान है — माध्यमिक शिक्षा विभाग के 48,062 और बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,304 कर्मचारी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए प्रति कर्मचारी ₹3,000 वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से लगभग ₹14.42 करोड़ और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए लगभग ₹36.69 करोड़ वार्षिक व्यय का अनुमान है। बेसिक शिक्षा विभाग की योजना साचीज (SACHIS) के माध्यम से क्रियान्वित होगी और उपचार की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना की दरों के अनुरूप होंगी। उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को यह सुविधा देने की घोषणा की थी; अब शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तक इसका विस्तार किया गया है।
इन निर्णयों के क्रियान्वयन की गति और वास्तविक रोजगार सृजन पर आने वाले महीनों में ध्यान केंद्रित रहेगा।