योगी सरकार के 9 वर्षों में UP में 3.31 करोड़ शौचालय, 62 लाख आवास और 1.86 करोड़ गैस कनेक्शन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद केंद्रीय कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। लखनऊ से प्राप्त आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास मिला है और 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किया गया है। यह आँकड़े 2014-2017 के बीच की अत्यंत धीमी प्रगति के विपरीत हैं।
स्वच्छ भारत मिशन: शून्य से शत-प्रतिशत तक
मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा मात्र 35 प्रतिशत के आसपास था और प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित नहीं हो पाया था। आलोचकों का कहना है कि तत्कालीन सरकार स्वच्छ भारत मिशन को एक दलीय योजना मानकर उसके प्रचार-प्रसार से दूरी बनाए हुए थी, जिससे केंद्र से आने वाले फंड का उपयोग बाधित हुआ।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2017 के बाद योगी सरकार ने इस मिशन को प्राथमिकता दी, जिसके फलस्वरूप उत्तर प्रदेश को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 100 प्रतिशत ODF राज्य घोषित किया गया। इसके अतिरिक्त 94 हज़ार से अधिक गाँव ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ODF प्लस की श्रेणी में आ चुके हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना: 3 वर्षों में 50 हज़ार से 9 वर्षों में 62 लाख
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का उद्देश्य हर गरीब परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। आरोप लगे हैं कि 2014 से 2017 के बीच पूर्ववर्ती सरकार ने लाभार्थियों की सूची केंद्र को भेजने और मैचिंग ग्रांट जारी करने में ढिलाई बरती, साथ ही अपनी समानांतर योजनाओं — समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना — को प्राथमिकता दी। नतीजतन उस कार्यकाल में 50 हज़ार से भी कम आवास बन सके।
इसके विपरीत, योगी सरकार के 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को PMAY के तहत पक्का आवास उपलब्ध कराया गया है। गौरतलब है कि यह वृद्धि केंद्र और राज्य के बीच समन्वित क्रियान्वयन का परिणाम बताई जा रही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: 3% से 79 लाख किसानों तक
केंद्र सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लॉन्च की थी, जिसका उद्देश्य सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को वित्तीय सुरक्षा देना था। आँकड़ों के अनुसार, 2017 से पहले राज्य सरकार की उदासीनता के कारण उत्तर प्रदेश में केवल लगभग 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका, जबकि उसी दौरान भाजपा-शासित राज्यों में 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था।
योगी सरकार के कार्यकाल में पिछले 9 वर्षों में इस योजना के तहत 79 लाख से अधिक कृषकों को ₹6,283 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक राज्य है और किसानों की आय सुरक्षा राष्ट्रीय एजेंडे पर है।
उज्ज्वला योजना: 1.86 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2017 से पहले के कार्यकाल में बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मिले और उनमें से भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा नहीं भरवाया, क्योंकि रिफिलिंग पर कोई अतिरिक्त राज्य सब्सिडी उपलब्ध नहीं थी।
योगी सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त होली और दीपावली पर दो सिलेंडर मुफ्त रिफिल की सुविधा भी दी जा रही है।
आगे की राह
उत्तर प्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की यह तस्वीर 'डबल इंजन सरकार' की अवधारणा को व्यावहारिक आधार देने का दावा करती है। हालाँकि, स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि इन आँकड़ों की ज़मीनी सत्यापन और लाभार्थियों की वास्तविक संतुष्टि दर की जाँच भी उतनी ही ज़रूरी है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व ही इनकी असली कसौटी होगी।