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योगी सरकार की डिजिटल पहल: 31,602 ओबीसी युवाओं को मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण, ₹40 करोड़ का बजट

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योगी सरकार की डिजिटल पहल: 31,602 ओबीसी युवाओं को मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण, ₹40 करोड़ का बजट

सारांश

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना इस वर्ष 31,602 ओबीसी युवाओं तक पहुँच रही है — ₹40 करोड़ के बजट और 338 संस्थानों के नेटवर्क के साथ। 70,000 से अधिक आवेदन यह बताते हैं कि तकनीकी शिक्षा की भूख कितनी गहरी है।

मुख्य बातें

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31,602 ओबीसी युवा निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल; प्रशिक्षण 11 अगस्त से शुरू।
योजना के लिए ₹40 करोड़ का बजट आवंटित; ओ-लेवल हेतु प्रति छात्र ₹15,000 और सीसीसी हेतु ₹3,500 सरकार देती है।
प्रदेश में 338 NIELIT-मान्यता प्राप्त संस्थान योजना से जुड़े हैं।
वर्ष 2026-27 में 70,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो योजना की भारी माँग दर्शाते हैं।
पात्रता: इंटरमीडिएट पास ओबीसी अभ्यर्थी, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे कम हो।

उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निःशुल्क ओ-लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31,602 आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को तकनीकी दक्षता से लैस किया जा रहा है। 11 अगस्त से शुरू हुए इस प्रशिक्षण के लिए राज्य सरकार ने ₹40 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इसे ग्रामीण और कस्बाई युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुकूल बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानती है।

योजना का विस्तार और संरचना

कुल 31,602 प्रशिक्षणार्थियों में से 24,240 युवा ओ-लेवल पाठ्यक्रम में और 7,362 युवा सीसीसी पाठ्यक्रम में भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT / नाइलिट) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से दिया जा रहा है। प्रदेश में 338 प्रशिक्षण संस्थान इस योजना से जुड़े हैं — जिनमें 63 केवल ओ-लेवल, 39 केवल सीसीसी और 236 दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

पात्रता और आर्थिक सहायता

योजना का लाभ उन ओबीसी अभ्यर्थियों को मिल रहा है जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है और जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे कम है। सरकार ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र ₹15,000 और सीसीसी के लिए ₹3,500 तक का भुगतान सीधे संस्थानों को करती है, जिससे युवाओं पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

भारी माँग और व्यापक पहुँच

वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सबसे अधिक ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए थे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि तकनीकी शिक्षा के प्रति ओबीसी युवाओं में जागरूकता और उत्साह दोनों बढ़ रहे हैं। 338 संस्थानों के नेटवर्क के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही प्रशिक्षण सुलभ हो रहा है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि 338 संस्थानों का नेटवर्क इसीलिए तैयार किया गया है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल कौशल की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और सरकारी एवं निजी क्षेत्र दोनों में तकनीकी दक्षता एक अनिवार्य योग्यता बनती जा रही है। गौरतलब है कि ओबीसी समुदाय — जो उत्तर प्रदेश की आबादी का बड़ा हिस्सा है — तकनीकी शिक्षा तक पहुँच के मामले में ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा रहा है। यदि यह योजना अपने लक्ष्यों पर खरी उतरती है, तो यह राज्य में सामाजिक-आर्थिक समानता की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक आवेदनों के मुकाबले केवल 31,602 सीटें — यह अंतर बताता है कि माँग आपूर्ति से लगभग दोगुनी है, और यही इस योजना की सबसे बड़ी सीमा भी है। ₹40 करोड़ का बजट प्रभावशाली लगता है, लेकिन प्रति छात्र औसत व्यय देखें तो यह राशि मानक बाज़ार दरों से काफी कम पड़ती है — जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है। असली कसौटी यह होगी कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं में से कितने वास्तव में रोजगार पाते हैं — और इसके लिए सरकार के पास अभी तक कोई सार्वजनिक ट्रैकिंग तंत्र नहीं है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार की निःशुल्क ओ-लेवल और सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजना है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को NIELIT-मान्यता प्राप्त संस्थानों में मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्ष 2026-27 में इसके लिए ₹40 करोड़ का बजट रखा गया है और 31,602 युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
वे ओबीसी अभ्यर्थी पात्र हैं जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की हो और जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे कम हो। पात्र उम्मीदवारों को ओ-लेवल या सीसीसी — दोनों में से किसी एक पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल सकता है।
सरकार प्रति छात्र कितनी राशि देती है?
ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए सरकार प्रति छात्र ₹15,000 और सीसीसी के लिए ₹3,500 तक का भुगतान सीधे मान्यता प्राप्त संस्थानों को करती है। इससे छात्रों पर कोई शुल्क का बोझ नहीं पड़ता।
प्रशिक्षण कहाँ और कैसे मिलेगा?
प्रशिक्षण NIELIT (नाइलिट) से मान्यता प्राप्त 338 संस्थानों के माध्यम से दिया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में फैले हैं। इनमें 63 संस्थान केवल ओ-लेवल, 39 केवल सीसीसी और 236 दोनों पाठ्यक्रम चला रहे हैं।
इस वर्ष कितने आवेदन आए और कितने चुने गए?
वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 31,602 प्रशिक्षणार्थियों का चयन किया गया। सबसे अधिक आवेदन ओ-लेवल पाठ्यक्रम के लिए आए थे।
राष्ट्र प्रेस
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