योगी आदित्यनाथ की चेतावनी: 'बाबरी के भक्त कालनेमि बनकर रामकाज को बदनाम करेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन के विरोधी अब 'कालनेमि' का रूप धारण कर रामकाज को भीतर से कमज़ोर करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाबरी के भक्त आंदोलन को अपमानित और बदनाम करने का प्रयास करेंगे और कार्यकर्ताओं को उन्हें पहचानकर उनकी साजिश विफल करनी होगी।
अशोक सिंघल शताब्दी समारोह में दिया संबोधन
मुख्यमंत्री योगी विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेता अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक आगाज़ किया, जिसमें सिंघल के जीवन, संघर्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।
योगी ने आरोप लगाया कि जो लोग कभी राम मंदिर का विरोध करते थे और रामभक्तों पर गोलियाँ चलवाते थे, आज वही खुद को रामभक्त बताने का नाटक कर रहे हैं। उनके अनुसार यह विश्व हिन्दू परिषद की वैचारिक विजय का प्रमाण है।
500 वर्षों के संघर्ष और अशोक सिंघल की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़े जाने के बाद करीब 500 वर्षों तक हिंदू समाज ने उसकी मुक्ति के लिए संघर्ष किया। संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं और महिलाओं ने बलिदान दिए। उन्होंने कहा कि समाज में सामर्थ्य था, लेकिन शक्ति बिखरी हुई थी — इसे एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य अशोक सिंघल ने किया।
योगी ने बताया कि 1982 में विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व मिलने और 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद रामकाज सिंघल के जीवन का ध्येय बन गया। देश हो या विदेश, वनवासी क्षेत्र हो या दलित बस्ती — उनके मुख पर सदैव राम का नाम रहा। योगी ने कहा, 'राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम' को उन्होंने अपने जीवन में उतारा।
कांग्रेस और विपक्ष पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि जब श्रीराम जन्मभूमि का मामला न्यायालय में था, तब एक ओर अशोक सिंघल की टीम अधिवक्ताओं, पुरातत्ववेत्ताओं और विषय विशेषज्ञों के साथ प्रमाण जुटा रही थी, वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और वामपंथी दल मंदिर के पक्ष में फैसला न आने देने के लिए बाधाएँ उत्पन्न कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पर भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व को लेकर न्यायालय में सवाल उठाने का भी आरोप लगाया।
योगी ने यह भी कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रण मिलने के बावजूद ये दल नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोट बैंक का ध्यान था। उल्लेखनीय है कि 2 नवंबर 1990 को रामभक्तों पर हुए लाठीचार्ज और गोलीबारी के बीच भी अशोक सिंघल सत्ता के सामने नहीं झुके थे।
गोरक्षा और सामाजिक कार्यों पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षा केवल भाषण या सड़क पर आंदोलन का विषय नहीं, बल्कि आचरण का विषय है। उन्होंने बताया कि 2017 में सरकार गठन के बाद अवैध बूचड़खाने बंद कराए गए और सख्त कानून बनाया गया। वर्तमान में प्रदेश में 7,700 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है और प्रत्येक गोवंश के लिए प्रतिमाह ₹1,500 उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से स्वयं गोपालन से जुड़ने का आह्वान किया।
अयोध्या के कायापलट का उल्लेख
योगी ने कहा कि कभी उपेक्षित रही अयोध्या में आज राम पथ, धर्म पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ बन चुके हैं। राम की पैड़ी में सरयू का अविरल और निर्मल जल है, महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना है और अयोध्या सोलर सिटी के रूप में उभर चुकी है। उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और अशोक सिंघल के बीच राम जन्मभूमि आंदोलन पर होने वाली चर्चाओं को भी याद किया।
विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने भव्य राम मंदिर निर्माण की हिंदू समाज की सदियों पुरानी आकांक्षा को पूरा करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगतगुरु श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने सिंघल के संघर्ष को वंदनीय बताया और धर्म की मर्यादाओं को अक्षुण्ण रखते हुए समाज को एकजुट करने पर बल दिया। योगी आदित्यनाथ की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर से जुड़े राजनीतिक और सांगठनिक विमर्श नई करवट ले रहे हैं।