टीटीडी टेंडर नियमों में ढील पर वाईएसआरसीपी की जांच मांग, मंत्री लोकेश पर भ्रष्टाचार का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा संचालित अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए निविदा योग्यता मानकों में की गई कटौती को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 3 अगस्त को स्वतंत्र जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह निर्णय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा और मरीजों को मिलने वाली दवाइयों व उपकरणों की गुणवत्ता से समझौता होगा।
टेंडर नियमों में क्या बदलाव हुआ
टीटीडी के पूर्व चेयरमैन और वाईएसआरसीपी नेता भूमाना करुणाकर रेड्डी ने मीडिया को बताया कि टीटीडी गवर्निंग बोर्ड ने आपूर्तिकर्ता कंपनियों के लिए न्यूनतम टर्नओवर की शर्त ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ कर दी है। उन्होंने कहा कि कुछ श्रेणियों में यह सीमा और कम करके ₹15 करोड़ तक कर दी गई है। उनके अनुसार, इन बदलावों से छोटी और अपेक्षाकृत अनजान कंपनियाँ भी जीवन रक्षक दवाइयों और महँगे मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए बोली लगा सकेंगी।
मंत्री लोकेश पर आरोप
पूर्व विधायक करुणाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि यह निर्णय मंत्री नारा लोकेश के निर्देशों पर लिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक प्रतिष्ठित फार्मास्युटिकल कंपनी का प्रतिनिधित्व करने वाले बोर्ड सदस्य ने इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे नजरअंदाज किया गया। रेड्डी ने यह भी कहा कि यह निर्णय जगदीश की अध्यक्षता वाली एक अनौपचारिक समिति की सिफारिशों पर आधारित था, जिनकी इस प्रक्रिया में भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एम्स और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों के स्थापित मानकों को दरकिनार कर इतने कम टर्नओवर वाली कंपनियों को अनुमति देना 'भ्रष्ट इरादों' को उजागर करता है। 'अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने' की दलील को उन्होंने 'बेदम' बताया और कहा कि असली मकसद किकबैक लेना है।
विरुपाक्षी गिरफ्तारी पर विवाद
वाईएसआरसीपी एससी सेल के राज्य अध्यक्ष और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने चंद्रबाबू प्रशासन पर अलग मोर्चे पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अलूर के विधायक विरुपाक्षी को आधी रात को पुलिस ने 'आतंकवादी की तरह' गिरफ्तार किया, जबकि वह टीडीपी कार्यकर्ताओं के हमले में घायल एक वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता की मदद के लिए गए थे। सुधाकर बाबू ने एक वायरल वीडियो का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर टीडीपी कार्यकर्ता नागराजू को पुलिस की मौजूदगी में अपनी पत्नी की पोशाक फाड़ते हुए देखा गया — ताकि विधायक को फँसाया जा सके।
उन्होंने विरुपाक्षी के घर से सीसीटीवी हार्ड डिस्क हटाए जाने पर सफाई माँगी और छापेमारी की तत्काल न्यायिक जांच की मांग की। सुधाकर बाबू ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक साथ उत्तराखंड, रायलसीमा और मध्य आंध्र में बीसी, एससी और अल्पसंख्यक नेताओं को निशाना बना रही है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब डीएससी-2025 भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि सरकार उन सवालों को दबाने के लिए 'झूठे मामले और ध्यान भटकाने वाली राजनीति' का सहारा ले रही है जो शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को घेर सकते हैं। गौरतलब है कि टीटीडी आंध्र प्रदेश का सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान है और इसके अस्पतालों में लाखों श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सेवाएँ मिलती हैं।
आगे क्या
वाईएसआरसीपी ने माँग की है कि टीटीडी टेंडर प्रक्रिया में बदलाव की स्वतंत्र जांच हो और विरुपाक्षी की गिरफ्तारी की न्यायिक समीक्षा की जाए। सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।