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टीटीडी टेंडर नियमों में ढील पर वाईएसआरसीपी की जांच मांग, मंत्री लोकेश पर भ्रष्टाचार का आरोप

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टीटीडी टेंडर नियमों में ढील पर वाईएसआरसीपी की जांच मांग, मंत्री लोकेश पर भ्रष्टाचार का आरोप

सारांश

टीटीडी अस्पतालों में दवा आपूर्ति के लिए टेंडर योग्यता सीमा ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ करने पर वाईएसआरसीपी ने जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह निर्णय मंत्री नारा लोकेश के इशारे पर लिया गया और इससे मरीजों की सुरक्षा दाँव पर लगेगी।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने टीटीडी के अस्पतालों में दवा-आपूर्ति टेंडर नियमों में ढील की स्वतंत्र जांच की मांग की।
टर्नओवर योग्यता सीमा ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ (कुछ श्रेणियों में ₹15 करोड़ ) की गई।
पूर्व टीटीडी चेयरमैन भूमाना करुणाकर रेड्डी ने मंत्री नारा लोकेश पर निर्देश देने का आरोप लगाया।
पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने विधायक विरुपाक्षी की आधी रात की गिरफ्तारी पर न्यायिक जांच माँगी।
सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा संचालित अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए निविदा योग्यता मानकों में की गई कटौती को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 3 अगस्त को स्वतंत्र जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह निर्णय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा और मरीजों को मिलने वाली दवाइयों व उपकरणों की गुणवत्ता से समझौता होगा।

टेंडर नियमों में क्या बदलाव हुआ

टीटीडी के पूर्व चेयरमैन और वाईएसआरसीपी नेता भूमाना करुणाकर रेड्डी ने मीडिया को बताया कि टीटीडी गवर्निंग बोर्ड ने आपूर्तिकर्ता कंपनियों के लिए न्यूनतम टर्नओवर की शर्त ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ कर दी है। उन्होंने कहा कि कुछ श्रेणियों में यह सीमा और कम करके ₹15 करोड़ तक कर दी गई है। उनके अनुसार, इन बदलावों से छोटी और अपेक्षाकृत अनजान कंपनियाँ भी जीवन रक्षक दवाइयों और महँगे मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए बोली लगा सकेंगी।

मंत्री लोकेश पर आरोप

पूर्व विधायक करुणाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि यह निर्णय मंत्री नारा लोकेश के निर्देशों पर लिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक प्रतिष्ठित फार्मास्युटिकल कंपनी का प्रतिनिधित्व करने वाले बोर्ड सदस्य ने इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे नजरअंदाज किया गया। रेड्डी ने यह भी कहा कि यह निर्णय जगदीश की अध्यक्षता वाली एक अनौपचारिक समिति की सिफारिशों पर आधारित था, जिनकी इस प्रक्रिया में भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि एम्स और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों के स्थापित मानकों को दरकिनार कर इतने कम टर्नओवर वाली कंपनियों को अनुमति देना 'भ्रष्ट इरादों' को उजागर करता है। 'अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने' की दलील को उन्होंने 'बेदम' बताया और कहा कि असली मकसद किकबैक लेना है।

विरुपाक्षी गिरफ्तारी पर विवाद

वाईएसआरसीपी एससी सेल के राज्य अध्यक्ष और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने चंद्रबाबू प्रशासन पर अलग मोर्चे पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अलूर के विधायक विरुपाक्षी को आधी रात को पुलिस ने 'आतंकवादी की तरह' गिरफ्तार किया, जबकि वह टीडीपी कार्यकर्ताओं के हमले में घायल एक वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता की मदद के लिए गए थे। सुधाकर बाबू ने एक वायरल वीडियो का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर टीडीपी कार्यकर्ता नागराजू को पुलिस की मौजूदगी में अपनी पत्नी की पोशाक फाड़ते हुए देखा गया — ताकि विधायक को फँसाया जा सके।

उन्होंने विरुपाक्षी के घर से सीसीटीवी हार्ड डिस्क हटाए जाने पर सफाई माँगी और छापेमारी की तत्काल न्यायिक जांच की मांग की। सुधाकर बाबू ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक साथ उत्तराखंड, रायलसीमा और मध्य आंध्र में बीसी, एससी और अल्पसंख्यक नेताओं को निशाना बना रही है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब डीएससी-2025 भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि सरकार उन सवालों को दबाने के लिए 'झूठे मामले और ध्यान भटकाने वाली राजनीति' का सहारा ले रही है जो शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को घेर सकते हैं। गौरतलब है कि टीटीडी आंध्र प्रदेश का सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान है और इसके अस्पतालों में लाखों श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सेवाएँ मिलती हैं।

आगे क्या

वाईएसआरसीपी ने माँग की है कि टीटीडी टेंडर प्रक्रिया में बदलाव की स्वतंत्र जांच हो और विरुपाक्षी की गिरफ्तारी की न्यायिक समीक्षा की जाए। सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लाखों श्रद्धालुओं की सेवा करता है। टेंडर योग्यता में इतनी बड़ी कटौती — ₹100 करोड़ से सीधे ₹25 करोड़ — के पीछे की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखती, खासकर जब एक बोर्ड सदस्य ने खुद आपत्ति जताई हो। एम्स जैसे संस्थानों के मानकों को नजरअंदाज करना और 'जगदीश समिति' जैसी अनौपचारिक संरचना पर निर्भरता — ये दोनों सवाल जवाबदेही की माँग करते हैं। विपक्ष के आरोप राजनीतिक हो सकते हैं, लेकिन जीवन रक्षक दवाओं की खरीद में गुणवत्ता मानकों की रक्षा किसी भी दल की प्राथमिकता होनी चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीटीडी के टेंडर नियमों में क्या बदलाव किया गया है?
टीटीडी गवर्निंग बोर्ड ने अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों की न्यूनतम टर्नओवर सीमा ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ कर दी है। कुछ श्रेणियों में यह सीमा ₹15 करोड़ तक कम की गई है।
वाईएसआरसीपी ने इस पर आपत्ति क्यों जताई है?
वाईएसआरसीपी का आरोप है कि कम टर्नओवर वाली कंपनियों को अनुमति देने से दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता से समझौता होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। पार्टी ने दावा किया है कि यह निर्णय किकबैक के उद्देश्य से लिया गया है।
मंत्री नारा लोकेश का इस विवाद से क्या संबंध बताया जा रहा है?
पूर्व टीटीडी चेयरमैन भूमाना करुणाकर रेड्डी ने आरोप लगाया है कि टेंडर नियमों में ढील का निर्णय मंत्री नारा लोकेश के निर्देशों पर लिया गया। यह आरोप है — सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन नहीं आया है।
विधायक विरुपाक्षी की गिरफ्तारी का इस मामले से क्या संबंध है?
वाईएसआरसीपी नेता टीजेआर सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि अलूर के विधायक विरुपाक्षी को आधी रात पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि वह एक घायल पार्टी कार्यकर्ता की मदद के लिए गए थे। पार्टी ने इस गिरफ्तारी को डीएससी-2025 विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
टीटीडी के अस्पतालों में टेंडर की जांच की मांग कितनी उचित है?
टीटीडी आंध्र प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक-सामाजिक संस्थान है जो लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ देता है। जीवन रक्षक दवाओं और महँगे उपकरणों की खरीद में पात्रता मानकों में इतनी बड़ी कटौती के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और स्वतंत्र जांच की माँग स्वाभाविक है।
राष्ट्र प्रेस
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