उज्जैन युवा धर्म संसद: आनंद रंगनाथन बोले — 'स्वामी मिथिलेश से मिला 70% ज्ञान'; कुलपति तिवारी ने रिवर्स माइग्रेशन को बताया ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन में 19 सितंबर 2026 को आयोजित युवा धर्म संसद में वैज्ञानिक एवं लेखक प्रो. आनंद रंगनाथन ने स्वामी मिथिलेश के मार्गदर्शन को अभूतपूर्व बताया और कहा कि इस आयोजन ने उन्हें एक वक्ता से बढ़कर एक सच्चा प्रतिभागी बना दिया। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने गाँवों से शहरों की ओर हुए एकतरफा पलायन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए रिवर्स माइग्रेशन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
आनंद रंगनाथन का आत्मबोध
प्रो. आनंद रंगनाथन ने कार्यक्रम के समापन पर कहा, 'जब मैं यहाँ आया था तो मुझे लगा कि मेरे पास 30 फीसदी ज्ञान है, लेकिन स्वामी मिथिलेश जी ने बाकी 70 फीसदी ज्ञान दिया।' उन्होंने स्वीकार किया कि स्वामी जी ने 'ऋषि' और 'कृषि' जैसे शब्दों के गहरे अर्थ ऐसे उजागर किए जो उनकी अपनी समझ से परे थे।
रंगनाथन ने कहा कि वे इस आयोजन में एक वक्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रतिभागी के रूप में सर्वाधिक धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर हफ्ते होने वाले साहित्यिक उत्सवों के विपरीत इस संसद ने उन्हें पहली बार किसी आयोजन में वास्तविक भागीदारी का अनुभव कराया।
किसान और युवा — रंगनाथन की चेतावनी
रंगनाथन ने युवा जागरूकता और नीतिगत कार्रवाई के बीच की खाई पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जागरूकता सदा नीचे से ऊपर की ओर आती है, परंतु कार्रवाई ऊपर से नीचे की ओर आनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक 30 करोड़ किसानों को उत्पादक नहीं बनाया जाएगा और उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में देखा जाता रहेगा, तब तक कोई स्थायी समाधान संभव नहीं है।
गौरतलब है कि यह चिंता ऐसे समय में उठाई गई जब भारत में कृषि संकट और ग्रामीण युवाओं का शहरों की ओर पलायन एक राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना हुआ है।
कुलपति तिवारी का रिवर्स माइग्रेशन का आह्वान
MCU के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने बताया कि वे कांचीपुरम में आयोजित पिछली युवा धर्म संसद के बाद दूसरी बार इस आयोजन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद के 80 वर्षों में गाँवों से शहरों की ओर हुए एकतरफा पलायन ने ग्रामीण क्षेत्रों को वीरान कर दिया है।
तिवारी ने कहा कि इस पलायन के दोहरे दुष्परिणाम सामने आए हैं — एक ओर गाँव जनशून्य हो रहे हैं, तो दूसरी ओर बड़े शहरों में जनसंख्या का बोझ इतना बढ़ गया है कि वहाँ जीवन असहनीय होता जा रहा है। उनके अनुसार, इस समस्या का समाधान रिवर्स माइग्रेशन — अर्थात शहरों से वापस गाँवों की ओर लौटने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देना — है।
आयोजन का केंद्रीय विषय: ऋषि और कृषि
इस वर्ष की युवा धर्म संसद का केंद्रीय विषय 'ऋषि और कृषि' रखा गया था, जो भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक कृषि संकट के बीच सेतु बनाने का प्रयास था। स्वामी मिथिलेश के मार्गदर्शन में हुए इस आयोजन ने युवाओं को आत्मचिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर प्रेरित करने का लक्ष्य रखा।
यह आयोजन आने वाले समय में युवा नीति-निर्माण और ग्रामीण पुनरुद्धार के संवाद में एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।