अदाणी फाउंडेशन-अनुष्का फाउंडेशन की पहल: 5 राज्यों में 10,000 क्लबफुट पीड़ित बच्चों का होगा मुफ्त इलाज
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी फाउंडेशन और अनुष्का फाउंडेशन ने 3 जून को वर्ल्ड क्लबफुट डे के अवसर पर एक तीन वर्षीय साझेदारी की घोषणा की, जिसके तहत पाँच राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के ज़रिए 10,000 से अधिक क्लबफुट पीड़ित बच्चों के उपचार और दीर्घकालिक देखभाल का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के सहयोग से मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में लागू होगी।
कानपुर से हुआ औपचारिक शुभारंभ
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ कानपुर, उत्तर प्रदेश के मान्यवर कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय और ट्रॉमा सेंटर में किया गया। उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहाँ क्लबफुट के सबसे अधिक मामले दर्ज होते हैं, जिससे यहाँ से शुरुआत करना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
क्लबफुट क्या है और क्यों है चिंता का विषय
क्लबफुट एक जन्मजात स्थिति है जिसमें नवजात शिशु का एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। आँकड़ों के अनुसार, यह स्थिति प्रति 800 नवजात शिशुओं में लगभग एक को प्रभावित करती है। वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त पोनसेटी पद्धति से इसका पूर्ण इलाज संभव है, लेकिन वंचित और दूरदराज़ के क्षेत्रों में कई बच्चों तक समय पर उपचार नहीं पहुँच पाता।
61 ज़िलों, 67 क्लीनिकों तक पहुँच
कार्यक्रम के तहत पाँच राज्यों के 61 ज़िलों में स्थित 67 क्लबफुट क्लीनिकों को मज़बूत किया जाएगा। साथ ही क्लबफुट देखभाल में जुड़े 51 स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा और 30,000 से अधिक फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों को शीघ्र पहचान व समय पर रेफरल के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा।
अदाणी फाउंडेशन का दृष्टिकोण
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, ‘प्रत्येक बच्चे को चलने-फिरने, सीखने, खेलने और जीवन में पूर्ण रूप से भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अवसर सृजित करना अदाणी फाउंडेशन के दर्शन का एक अभिन्न अंग रहा है, और यह साझेदारी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि क्लबफुट जैसी उपचार-योग्य स्थिति का शीघ्र पता चलने पर किसी भी बच्चे को इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए।
अनुष्का फाउंडेशन की भूमिका
अनुष्का फाउंडेशन के संस्थापक दीपक प्रेमनारायण ने कहा, ‘अदाणी फाउंडेशन के साथ यह साझेदारी पाँच राज्यों के 61 ज़िलों में गुणवत्तापूर्ण उपचार की पहुँच बढ़ाने में मदद करेगी, साथ ही शीघ्र निदान और हस्तक्षेप के लिए प्रणालियों को मज़बूत करेगी। साथ मिलकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि इलाज योग्य बीमारी जीवन भर गतिशीलता और अवसरों में बाधा न बने।’
आगे क्या
तीन वर्ष की इस अवधि में दोनों संगठनों का ध्यान शीघ्र पहचान, रेफरल प्रणाली, पुनर्वास सहायता और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहेगा — जिसका असर अगले वर्षों में चयनित ज़िलों के दिव्यांगता आँकड़ों पर दिखने की उम्मीद है।