एडीबी ने भारत के शहरी सुधारों के लिए $1 अरब डॉलर का लोन मंजूर किया, 'विकसित भारत' विजन को मिलेगी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने 30 जुलाई 2026 को भारत सरकार के शहरी सुधार एजेंडे को गति देने के लिए 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,300 करोड़) के ऋण को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस वित्तपोषण का लक्ष्य भारतीय शहरों में आर्थिक विकास, नवाचार और नागरिकों के जीवन स्तर में ठोस सुधार लाना है। यह ऋण ऐसे समय में आया है जब भारत 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने के 'विकसित भारत' लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रमुख घटक
ADB के अनुसार, यह ऋण 'अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन एंड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम' के तहत दिया जाएगा, जो केंद्र सरकार के प्रमुख 'अर्बन चैलेंज फंड' (UCF) को लागू करने में सहायता करेगा। इस कार्यक्रम के तीन मुख्य स्तंभ हैं — शहरी संस्थाओं को सुदृढ़ करना, एकीकृत आर्थिक एवं स्थानिक नियोजन को उन्नत बनाना, और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाना।
इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम यातायात-केंद्रित विकास (Transit-Oriented Development) और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर प्रबंधन को प्रोत्साहित करेगा। म्युनिसिपल बॉन्ड और बाज़ार-आधारित वित्तपोषण तंत्रों के ज़रिए शहरी निकायों की वाणिज्यिक पूँजी तक पहुँच भी सुनिश्चित की जाएगी।
डिजिटल शासन और पारदर्शिता पर ज़ोर
कार्यक्रम के तहत शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पारदर्शिता, कार्यकुशलता और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मज़बूती मिलेगी। ADB ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की सहायता के लिए अतिरिक्त 30 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता भी स्वीकृत की है।
ADB और भारत की दीर्घकालिक साझेदारी
ADB, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का वर्षों से सहयोगी रहा है। 2024 से इसने शहरी विकास, शहर पुनर्निर्माण, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़े विश्लेषणात्मक कार्यों में योगदान दिया है, जिससे 'अर्बन चैलेंज फंड' की वैचारिक नींव तैयार हुई। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ADB ने भारत के शहरी क्षेत्र में बड़ा निवेश किया हो, लेकिन यह ऋण पिछले सहयोग की तुलना में अधिक व्यापक नीतिगत सुधार ढाँचे से जुड़ा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ADB की भारत के लिए कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने कहा, "2047 तक पूरी तरह विकसित देश बनने के 'विकसित भारत' के विजन को हासिल करने में भारत के शहर अहम भूमिका निभाएंगे।" उन्होंने आगे कहा, "पॉलिसी सपोर्ट, तकनीकी सहायता और वित्तपोषण को मिलाकर यह कार्यक्रम शहरी संस्थाओं को मज़बूत करेगा, मार्केट-बेस्ड फाइनेंसिंग तक पहुँच बढ़ाएगा और इन्फ्रास्ट्रक्चर व सेवा वितरण में सुधार करेगा, जिससे शहर भारत की वृद्धि के अगले चरण को आगे बढ़ा सकेंगे।"
आम जनता पर असर और आगे की राह
ADB के आँकड़ों के अनुसार, भारतीय शहर वर्तमान में लगभग 70% नई नौकरियाँ सृजित करते हैं और देश की GDP में लगभग 63% का योगदान देते हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 75% हो जाएगी। हालाँकि, कई शहरी केंद्र संस्थागत क्षमता की कमी, सीमित वित्तीय संसाधनों और बाज़ार-आधारित वित्तपोषण तक अपर्याप्त पहुँच जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। यह कार्यक्रम इन्हीं संरचनात्मक अवरोधों को दूर करने का प्रयास है, और इसके सफल क्रियान्वयन से करोड़ों शहरी निवासियों को बेहतर बुनियादी ढाँचा और सेवाएँ मिलने की उम्मीद है।