27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फरीदाबाद में AIIA के आयुर्वेद हस्तक्षेप से बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता में सुधार, WHO स्कोर 292 से 326 पहुँचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फरीदाबाद में AIIA के आयुर्वेद हस्तक्षेप से बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता में सुधार, WHO स्कोर 292 से 326 पहुँचा

सारांश

फरीदाबाद में AIIA ने 5,594 बुजुर्गों पर आयुर्वेद हस्तक्षेप किया — 60 दिनों में WHO जीवन गुणवत्ता स्कोर 292 से 326.3 पहुँचा। अग्निबल, बोन मिनरल डेंसिटी और प्रमुख बायोमार्कर में सुधार दर्ज, लेकिन मंत्रालय ने व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण की ज़रूरत भी स्वीकारी।

मुख्य बातें

AIIA ने फरीदाबाद में 60–80 वर्ष आयु के 5,594 बुजुर्गों पर सामुदायिक आयुर्वेद हस्तक्षेप संचालित किया।
WHO WHOQOL स्कोर 60 दिनों में 292.0 से 326.3 तक पहुँचा — जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार।
अग्निबल के सभी 6 पैमानों और सेरोटोनिन, DHEA, विटामिन डी जैसे बायोमार्कर में सकारात्मक बदलाव दर्ज।
डिमेंशिया घटक में 200 मरीज़ों को 4 महीने तक आयुर्वेदिक उपचार दिया गया।
प्रारंभिक जाँच में 67.73% प्रतिभागियों में दृष्टि समस्या, 43.05% में शारीरिक निष्क्रियता पाई गई।
आयुष मंत्रालय ने प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए और व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता स्वीकार की।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) द्वारा हरियाणा के फरीदाबाद में संचालित एक सामुदायिक आयुर्वेद हस्तक्षेप कार्यक्रम में 60 से 80 वर्ष की आयु के बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता, अग्निबल और बोन मिनरल डेंसिटी में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अध्ययन में संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और कई महत्वपूर्ण बायोमार्कर में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए।

अध्ययन का दायरा और पद्धति

AIIA के 'पब्लिक हेल्थ इनिशिएटिव' (PHI) के अंतर्गत फरीदाबाद जिले में 5,594 बुजुर्ग प्रतिभागियों की जाँच की गई और उन्हें आयुर्वेदिक दवाएँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, डिमेंशिया से संबंधित एक अलग घटक में 200 मरीज़ों को चार महीने तक आयुर्वेद आधारित उपचार दिया गया।

परियोजना के पहले चरण में 60 दिनों के हस्तक्षेप के बाद जीवन गुणवत्ता में सुधार आँका गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' (WHOQOL) आकलन में कुल स्कोर 292.0 से बढ़कर 326.3 हो गया — यह सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण वृद्धि है।

प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में बदलाव

अध्ययन के अनुसार, सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलाइन, DHEA और विटामिन डी जैसे बायोमार्कर में सुधार दर्ज हुआ। आयुर्वेदिक पाचन एवं चयापचय शक्ति की अवधारणा — 'अग्निबल' — को मापने वाले सभी छह पैमानों पर भी सकारात्मक परिणाम मिले।

प्रारंभिक जाँच में प्रतिभागियों में कई स्वास्थ्य समस्याएँ उजागर हुई थीं: 67.73% को दृष्टि संबंधी समस्याएँ, 43.05% में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85% में संज्ञानात्मक कार्यक्षमता में कमी पाई गई थी। उच्च रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज का बढ़ा स्तर, हड्डियों के घनत्व में कमी, कब्ज़ और नींद की समस्याएँ भी सामान्यतः दर्ज हुईं।

निष्कर्षों की प्रस्तुति

इन परिणामों को AIIA में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया और परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट एक विशेषज्ञ समिति को सौंप दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में समाहित करने पर ज़ोर दे रही है।

मंत्रालय की सावधानी और आगे की राह

गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय ने स्वयं स्पष्ट किया है कि इन नतीजों की पुष्टि के लिए और अधिक व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन, निरंतर सुरक्षा निगरानी और आगे के अध्ययन आवश्यक हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों की प्रभावशीलता और सुरक्षा को पूरी तरह स्थापित करने के लिए अनुसंधान जारी रहेगा।

नई दिल्ली स्थित AIIA, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है, जो शिक्षा, अनुसंधान, क्लिनिकल सेवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से आयुर्वेद के वैज्ञानिक संवर्धन के लिए कार्यरत है। यह अध्ययन भारत में आयुर्वेद की साक्ष्य-आधारित स्वीकार्यता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके निष्कर्षों को उनके संदर्भ में परखना ज़रूरी है — यह एक नियंत्रित नैदानिक परीक्षण नहीं, बल्कि एक सामुदायिक हस्तक्षेप रिपोर्ट है, जिसमें तुलनात्मक नियंत्रण समूह का उल्लेख नहीं है। WHO स्कोर में वृद्धि प्रभावशाली दिखती है, पर बिना प्लेसबो नियंत्रण के यह स्पष्ट नहीं होता कि सुधार विशेष रूप से आयुर्वेदिक हस्तक्षेप के कारण हुआ या सामान्य स्वास्थ्य निगरानी के कारण। मंत्रालय ने स्वयं व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन की ज़रूरत मानी है — यह ईमानदारी सराहनीय है, और यही बात इस रिपोर्ट को नीति-घोषणा नहीं, बल्कि एक शोध-संकेत की श्रेणी में रखती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AIIA का फरीदाबाद आयुर्वेद हस्तक्षेप अध्ययन क्या है?
यह अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) द्वारा फरीदाबाद में 60–80 वर्ष के 5,594 बुजुर्गों पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाएँ देकर जीवन गुणवत्ता, अग्निबल और बोन मिनरल डेंसिटी पर असर आँका गया। इसके निष्कर्ष आयुष मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को जारी किए।
इस अध्ययन में जीवन गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ?
WHO के WHOQOL आकलन में कुल स्कोर 60 दिनों के हस्तक्षेप के बाद 292.0 से बढ़कर 326.3 हो गया। साथ ही सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलाइन, DHEA और विटामिन डी जैसे बायोमार्कर में भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।
क्या इस अध्ययन के नतीजे पूरी तरह प्रमाणित हैं?
आयुष मंत्रालय ने स्वयं स्पष्ट किया है कि इन नतीजों की पुष्टि के लिए और व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन, निरंतर सुरक्षा निगरानी तथा आगे के अध्ययन आवश्यक हैं। इसलिए इन परिणामों को अभी प्रारंभिक संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस कार्यक्रम में डिमेंशिया के लिए क्या किया गया?
डिमेंशिया से संबंधित एक अलग घटक में 200 मरीज़ों की जाँच की गई और उन्हें चार महीने तक आयुर्वेद आधारित दवाएँ दी गईं। संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के आकलन में सकारात्मक बदलाव देखे गए।
AIIA क्या है और यह किसके अंतर्गत काम करती है?
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) नई दिल्ली स्थित आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। यह शिक्षा, अनुसंधान, क्लिनिकल सेवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से आयुर्वेद के वैज्ञानिक संवर्धन के लिए कार्यरत है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले