एयर इंडिया के नए सीईओ को पाकिस्तान एयरस्पेस बंदी, मध्य पूर्व संकट और ईंधन लागत की तिहरी चुनौती: विल्सन
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया के विदाई लेने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैम्पबेल विल्सन ने 22 मई को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान चेतावनी दी कि कंपनी के अगले सीईओ को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की बंदी, मध्य पूर्व में जारी संकट और मज़बूत डॉलर जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। विल्सन ने स्पष्ट किया कि वे अगले दो महीनों में कंपनी छोड़ देंगे और उनके उत्तराधिकारी के लिए अगले चार साल "पिछले वर्षों की तरह ही चुनौतीपूर्ण होंगे, हालांकि उनका तरीका अलग होगा।"
मुख्य घटनाक्रम
विल्सन ने कहा कि वे सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इन चुनौतियों से निपटने के लिए "सही व्यक्ति को नियुक्त करना" चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि "आधार तैयार हो चुका है, लेकिन जाहिर है कि जब आप विमान लाएंगे, तो आप बहुत जल्द बड़े पैमाने पर परिचालन करेंगे।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एयर इंडिया भारी वित्तीय नुकसान और परिचालन संबंधी दबावों से जूझ रही है। जून 2025 में कंपनी का 787 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी।
उड़ान मार्गों पर असर और बढ़ती लागत
ईरान युद्ध और पाकिस्तान द्वारा लगाए गए हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया को हज़ारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। विल्सन के अनुसार, "अब हम खाड़ी के कई हिस्सों के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकते, इसलिए हमें और भी लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है। दिल्ली से लंदन की साढ़े आठ घंटे की उड़ान अब 12 घंटे की हो गई है।"
उत्तरी अमेरिका के मुनाफे वाले अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी उड़ानों में कटौती हुई है। विल्सन ने बताया कि अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले ईंधन की लागत 34 प्रतिशत थी, जो अब दोगुनी हो गई है।
सुरक्षा चूकें और नियामक फटकार
रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया को सुरक्षा संबंधी खामियों के लिए फटकार लगाई गई, जिनमें वैध उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र के बिना और आपातकालीन उपकरणों की उचित जाँच के बिना कई बार विमान उड़ाना शामिल है। ये चूकें कंपनी की विश्वसनीयता के लिए गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं।
मध्य पूर्व संकट का परिचालन पर प्रभाव
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान, एयर इंडिया ने तीन सप्ताह में पश्चिम एशिया के लिए लगभग 2,500 उड़ानें रद्द कर दीं और मध्य पूर्व के लिए अपने सामान्य शेड्यूल का केवल 30 प्रतिशत ही संचालित किया। गौरतलब है कि खाड़ी देशों से जुड़े मार्ग एयर इंडिया के राजस्व में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आगे क्या
विल्सन के अनुसार, नए सीईओ को कंपनी-विशिष्ट चुनौतियों — जैसे विकास और कर्मचारियों के साथ संबंध — के साथ-साथ हवाई क्षेत्र बंदी और अनिश्चित ईंधन कीमतों जैसी वैश्विक विमानन चुनौतियों से एक साथ निपटना होगा। एयर इंडिया के नेतृत्व परिवर्तन पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी हैं।