3 अगस्त 2026
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एसोचैम ने बिजनेस फ्रांस और अरब चैंबर के साथ किए रणनीतिक MoU, भारत का व्यापार-निवेश नेटवर्क होगा मज़बूत

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एसोचैम ने बिजनेस फ्रांस और अरब चैंबर के साथ किए रणनीतिक MoU, भारत का व्यापार-निवेश नेटवर्क होगा मज़बूत

सारांश

एसोचैम ने एक ही समारोह में दो बड़े रणनीतिक MoU किए — एक बिजनेस फ्रांस के साथ, दूसरा अरब चैंबर के साथ। यह भारत की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह यूरोप और खाड़ी क्षेत्र दोनों में एक साथ संस्थागत व्यापार नेटवर्क खड़ा करना चाहता है।

मुख्य बातें

एसोचैम ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ दो रणनीतिक MoU पर हस्ताक्षर किए।
समझौतों का उद्देश्य व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, संयुक्त उद्यम और बाज़ार पहुँच को संस्थागत रूप देना है।
एसोचैम महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि ये साझेदारियाँ उद्यमों को नए बाज़ार तलाशने और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य सृजित करने में सहायक होंगी।
बिजनेस फ्रांस के वियानी मेनिएर और अरब चैंबर के कार्यवाहक महासचिव डॉ.
अव्वाद ने भी समझौते को भारत के साथ कारोबारी संबंध मज़बूत करने का अहम कदम बताया।
आने वाले महीनों में संयुक्त व्यापार मिशनों, प्रदर्शनियों और निवेश गोलमेज़ बैठकों की योजना है।

भारत के अग्रणी उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक समझौता हस्ताक्षर समारोह में बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ दो अलग-अलग रणनीतिक समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य भारत, फ्रांस और अरब क्षेत्र के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और बाज़ार पहुँच को संस्थागत रूप से सुदृढ़ करना है।

समझौतों का दायरा और उद्देश्य

बिजनेस फ्रांस के साथ हुए MoU के अंतर्गत दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से व्यापार एवं निवेश के अवसरों को प्रोत्साहित करेंगी, प्रौद्योगिकी सहयोग और संयुक्त उद्यमों को आगे बढ़ाएंगी, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों को सहायता प्रदान करेंगी तथा व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और सम्मेलनों का आयोजन करेंगी। इसके अतिरिक्त बाज़ार संबंधी जानकारियों का नियमित आदान-प्रदान भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा होगा।

भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ हुए समझौते के तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आपसी दौरे, व्यापार एवं निवेश संबंधी सूचनाओं का साझा उपयोग, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कारोबारी आयोजनों के संचालन पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि भारतीय उद्यमों को अरब क्षेत्र के नए बाज़ारों तक पहुँच मिल सके।

एसोचैम महासचिव की प्रतिक्रिया

एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने इस अवसर पर कहा कि वैश्विक बाज़ारों के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी व्यवसायों के लिए साझेदारी, निवेश और नवाचार के नए अवसर लेकर आई है। उन्होंने कहा, "बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ हमारी ये साझेदारियां मज़बूत संस्थागत संबंध स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इससे उद्यमों को आपस में जुड़ने, नए बाज़ार तलाशने और दीर्घकालिक तथा टिकाऊ आर्थिक मूल्य सृजित करने में मदद मिलेगी।"

फ्रांस और अरब पक्ष की राय

बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने कहा कि यह साझेदारी फ्रांस और भारत के उद्यमों के बीच कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाकर कारोबारी संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता व्यापारिक संवाद को बढ़ावा देने, निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहित करने और भारत तथा अरब क्षेत्र के बीच वाणिज्यिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने निर्यात आधार को विविधता देने और पश्चिमी यूरोप तथा खाड़ी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से संस्थागत भागीदारियाँ बना रहा है। गौरतलब है कि फ्रांस और अरब देश दोनों ही भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, और ये MoU उस रिश्ते को औपचारिक संस्थागत ढाँचे में ढालने का प्रयास हैं। आने वाले महीनों में दोनों समझौतों के तहत संयुक्त व्यापार मिशनों और निवेश गोलमेज़ बैठकों की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारतीय उद्योग संगठनों के इतिहास में ऐसे समझौते अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाते हैं — ठोस व्यापार वृद्धि या निवेश प्रवाह में उनका योगदान अक्सर अस्पष्ट रहता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये MoU संयुक्त उद्यमों और मापने योग्य निर्यात वृद्धि में तब्दील होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-फ्रांस रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग तो गहरा हो रहा है, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार अपनी वास्तविक क्षमता से काफी नीचे है। अरब क्षेत्र के साथ भी, खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या के बावजूद, संस्थागत व्यापार ढाँचा अभी भी कमज़ोर है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसोचैम ने किन संस्थाओं के साथ MoU किए हैं?
एसोचैम ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल — दोनों के साथ अलग-अलग रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये MoU व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को संस्थागत आधार देने के उद्देश्य से किए गए हैं।
इन MoU से भारतीय व्यवसायों को क्या फायदा होगा?
इन समझौतों के तहत भारतीय उद्यमों को फ्रांस और अरब देशों के बाज़ारों तक बेहतर पहुँच मिलेगी। संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यापार मेले और प्रतिनिधिमंडल आदान-प्रदान जैसे माध्यमों से नए कारोबारी अवसर खुलने की उम्मीद है।
बिजनेस फ्रांस क्या है और यह MoU क्यों अहम है?
बिजनेस फ्रांस फ्रांस की सरकारी एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देती है। एसोचैम के साथ इस MoU से भारत-फ्रांस के बीच कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों की भागीदारी को औपचारिक संस्थागत ढाँचा मिलेगा।
अरब चैंबर के साथ हुए समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ हुए MoU का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन और भारत-अरब क्षेत्र के बीच वाणिज्यिक सहयोग को मज़बूत करना है। इससे भारतीय उद्यमों को खाड़ी और अरब बाज़ारों में नई उपस्थिति दर्ज कराने में मदद मिलेगी।
इन समझौतों पर हस्ताक्षर कब और कहाँ हुए?
ये समझौते 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम के एक समझौता हस्ताक्षर समारोह के दौरान किए गए। समारोह में एसोचैम महासचिव सौरभ सान्याल, बिजनेस फ्रांस के वियानी मेनिएर और अरब चैंबर के डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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