बैंक लॉकर में सामान के नुकसान पर मुआवजा क्यों नहीं मिल सकता, वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण
सारांश
Key Takeaways
- बैंक लॉकर में सामान का मुआवजा वार्षिक फीस का 100 गुना होता है।
- बैंक को सामान की जानकारी नहीं होती, इसलिए मुआवजा सीमित है।
- गोपनीयता नियमों के कारण सामान का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
- लॉकर में अवैध चीजें रखने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- बैंक लॉकर में रखे सामान की सुरक्षा नियमों के अनुसार होती है।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को जानकारी दी कि अगर बैंक लॉकर में रखे सामान का नुकसान होता है, तो बैंक लॉकर धारक को वार्षिक फीस का 100 गुना मुआवजा दे सकता है।
लोकसभा में लॉकर में रखे सामान के मूल्य पर मुआवजा मिलने के सवाल का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह सीमा इस कारण तय की गई है क्योंकि बैंक को यह ज्ञात नहीं होता कि ग्राहक ने लॉकर में कौन-कौन सी वस्तुएं रखी हैं। इसके अलावा, ग्राहकों से लॉकर में रखी वस्तुओं की जानकारी मांगना बैंकिंग गोपनीयता नियमों के खिलाफ है।
उन्होंने आगे बताया कि सामान का वस्तु-वार मूल्यांकन या बीमा संभव नहीं होने के कारण, लॉकर में रखे सामान के नुकसान की स्थिति में एक मानकीकृत मुआवजे की व्यवस्था लागू की जाती है। यदि अलग-अलग कवरेज की मांग की जाती है, तो सामान की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है, जो बैंकिंग नियमों में उचित नहीं है।
बैंक लॉकर नियमों के अनुसार, यदि लॉकर में रखी वस्तुएं बैंक की लापरवाही, कर्मचारी की धोखाधड़ी, आग, चोरी, डकैती, सेंधमारी या लूटपाट के कारण गायब हो जाती हैं, तो बैंक को लॉकर धारक को मुआवजा देना होगा, जो कि लॉकर के लिए बैंक द्वारा ली गई वार्षिक फीस का 100 गुना होगा।
उदाहरण के लिए, यदि बैंक लॉकर के लिए वार्षिक शुल्क 5,000 रुपये है, तो उपरोक्त कारणों से नुकसान होने पर बैंक को ग्राहक को 5,00,000 रुपये का मुआवजा देना पड़ेगा।
बैंक लॉकर में ज्वेलरी, लोन दस्तावेज, प्रॉपर्टी दस्तावेज, जन्म-शादी के प्रमाणपत्र, इंश्योरेंस पॉलिसी, सेविंग्स बॉंड्स और अन्य गोपनीय दस्तावेज रखना वैध है।
हालांकि, बैंक लॉकर में नकद, हथियार, ड्रग्स, विस्फोटक, जल्द खराब होने वाली वस्तुएं और रेडियोएक्टिव वस्तुएं रखना अवैध है।