कैफे-3 नियम अधिसूचित: अप्रैल 2027 से लागू होंगे, EV को मिलेगा 3 गुना सुपर-क्रेडिट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 को वाहन निर्माताओं के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-3) नियमों को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। ये नियम अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे और मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। अधिसूचना में 909 किलोग्राम तक वजन वाली छोटी पेट्रोल कारों के लिए पहले प्रस्तावित प्रति किलोमीटर 3 ग्राम CO₂ की अलग रियायत को हटा दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी इस अधिसूचना में उस प्रावधान को शामिल नहीं किया गया जिसे केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष प्रस्तावित किया था — यानी 909 किलोग्राम से कम वजन वाली पेट्रोल कारों को प्रति किलोमीटर 3 ग्राम की अतिरिक्त छूट। गौरतलब है कि कई प्रमुख कार निर्माताओं ने इस प्रस्तावित रियायत का विरोध किया था।
इसके बजाय, सरकार ने संपूर्ण फ्लीट के CO₂ उत्सर्जन लक्ष्य की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्मूले में संशोधन किया है। सितंबर 2025 के मसौदे में रेफरेंस वाहन का वजन 1,170 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम किया गया था। अंतिम नियमों में वार्षिक वजन समायोजन (वेट एडजस्टमेंट) को भी अपेक्षाकृत कम रखा गया है।
हल्की और भारी गाड़ियों पर असर
अंतिम फॉर्मूले के अनुसार, 909 किलोग्राम की कार के लिए वित्त वर्ष 2027-28 में उत्सर्जन लक्ष्य लगभग 82.8 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है, जबकि सितंबर 2025 के मसौदे में यह लक्ष्य लगभग 76 ग्राम था। इस प्रकार हल्की गाड़ियों के बेड़े को कुछ अतिरिक्त लचीलापन मिला है।
दूसरी ओर, 2,500 किलोग्राम की भारी गाड़ियों के लिए अंतिम फॉर्मूले के तहत उत्सर्जन लक्ष्य लगभग 142.4 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर है, जो पहले के मसौदे में 151.4 ग्राम था — यानी भारी वाहनों के लिए मानक कड़े किए गए हैं।
EV और स्वच्छ ईंधन वाहनों के लिए इंसेंटिव
CAFE-3 के अंतिम नियमों में सुपर-क्रेडिट सिस्टम के ज़रिए स्वच्छ ईंधन वाहनों को प्रोत्साहन बरकरार रखा गया है। किसी भी निर्माता के फ्लीट प्रदर्शन की गणना करते समय एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) को 3 वाहनों के बराबर माना जाएगा।
यही 3 गुना फैक्टर रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी लागू होगा। फ्लेक्स-फ्यूल प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 2.5 गुना फैक्टर, केवल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 1.6 गुना फैक्टर, और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को 1.1 गुना फैक्टर मिलेगा।
क्रेडिट-डेबिट प्रणाली
नए नियमों में एक क्रेडिट-डेबिट प्रणाली भी शुरू की गई है। जो निर्माता अपने उत्सर्जन लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें क्रेडिट अर्जित होंगे, जबकि लक्ष्य से पीछे रहने वाले निर्माताओं पर डेबिट दर्ज किया जाएगा। यह व्यवस्था उद्योग को दीर्घकालिक उत्सर्जन नियंत्रण की दिशा में प्रेरित करने के लिए बनाई गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक अपने वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रहा है। CAFE-3 नियम उस दिशा में नीतिगत ढाँचे की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, और उनके क्रियान्वयन पर वाहन उद्योग की नज़र बनी रहेगी।