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राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति की मांग: कैट ने पीयूष गोयल को पत्र लिखकर छोटे व्यापारियों की सुरक्षा का आग्रह किया

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राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति की मांग: कैट ने पीयूष गोयल को पत्र लिखकर छोटे व्यापारियों की सुरक्षा का आग्रह किया

सारांश

कैट ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति की मांग की। डेलॉयट-गूगल रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 2030 तक भारत का डिजिटल बाजार 250 अरब डॉलर का होगा। बिना नियमन के करोड़ों छोटे व्यापारियों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

मुख्य बातें

कैट ने 26 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति की मांग की।
डेलॉयट-गूगल रिपोर्ट के अनुसार भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
2030 तक 22 करोड़ नए जनरेशन-Z उपभोक्ता ऑनलाइन बाजार से जुड़ेंगे, जो कुल खर्च का 45 प्रतिशत होंगे।
टियर-2 शहरों और छोटे कस्बों से पहले से ही कुल ऑनलाइन ऑर्डर का 60 प्रतिशत आता है।
भरतिया ने आरोप लगाया कि प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां FDI नियमों की भावना का उल्लंघन कर रही हैं।
कैट ने मांग की कि नीति में अनुचित छूट, डार्क पैटर्न और नकली माल पर सख्त प्रावधान हों तथा छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार तत्काल एक व्यापक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लागू करे, जो देश के करोड़ों छोटे व्यापारियों, किराना स्टोर मालिकों और खुदरा विक्रेताओं के हितों की रक्षा कर सके। कैट ने चेतावनी दी कि यदि भारत के तेजी से विस्तार हो रहे डिजिटल बाजार को अनियंत्रित छोड़ा गया, तो पारंपरिक खुदरा व्यापार का ढांचा चरमरा सकता है और लाखों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

डेलॉयट-गूगल रिपोर्ट का हवाला, 250 अरब डॉलर का बाजार

कैट के महासचिव एवं सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने अपने पत्र में डेलॉयट और गूगल की संयुक्त रिपोर्ट 'द 250 बिलियन डॉलर कॉमर्स फ्रंटियर' का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2019 से 2025 के बीच बढ़कर लगभग 90 अरब डॉलर हो चुका है और 2030 तक 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2030 तक 22 करोड़ नए जनरेशन-Z उपभोक्ता ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ेंगे, जो कुल ऑनलाइन खर्च का 45 प्रतिशत हिस्सा होंगे। इसके अलावा 15 करोड़ नए ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आएंगे और प्रति व्यक्ति ई-कॉमर्स खर्च दोगुना होने की संभावना है।

खंडेलवाल ने कहा कि टियर-2 शहरों और छोटे कस्बों में पहले से ही 60 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ता ऑनलाइन सामान खरीद रहे हैं और कुल ऑर्डर का लगभग 60 प्रतिशत इन्हीं क्षेत्रों से आता है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े भारत के डिजिटल बाजार की अपार संभावनाओं को दर्शाते हैं, लेकिन बिना नीतिगत सुरक्षा के यह विस्तार छोटे व्यापारियों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।

कैट की प्रमुख मांगें — नीति में क्या हो?

कैट ने सरकार से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति में निम्नलिखित प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएं:

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों का कड़ाई से पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण और कैश बर्न पर प्रतिबंध, एल्गोरिदम और विक्रेता रैंकिंग में पारदर्शिता, नकली और घटिया वस्तुओं के लिए जवाबदेही, डेटा सुरक्षा के ठोस उपाय, तथा लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए समान व्यावसायिक अवसर। इसके साथ ही व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली की भी मांग की गई है।

ई-कॉमर्स कंपनियों पर FDI नियमों के उल्लंघन का आरोप

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां अप्रत्यक्ष इन्वेंट्री स्वामित्व, पसंदीदा विक्रेता व्यवस्था, निजी लेबल और जोड़-तोड़ वाली व्यावसायिक संरचनाओं के जरिए भारत की एफडीआई नीति की भावना का लगातार उल्लंघन कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि जिसे मार्केटप्लेस मॉडल के रूप में अनुमति दी गई थी, वह तेजी से इन्वेंट्री-नियंत्रित मॉडल में बदल गया है। अनुचित छूट, डार्क पैटर्न, तरजीही सूचीकरण और घटिया माल की आपूर्ति जैसी प्रथाएं आम हो गई हैं, जो प्रतिस्पर्धा-विरोधी हैं और उन लाखों ईमानदार व्यापारियों को धीरे-धीरे बाजार से बाहर कर रही हैं जिन्होंने भरोसे और सेवा के दम पर भारत का घरेलू बाजार खड़ा किया है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

भारत के छोटे खुदरा विक्रेता, किराना स्टोर, थोक विक्रेता, वितरक और परिवहनकर्ता शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र देश में स्वरोजगार और रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है।

गौरतलब है कि यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब भारत सरकार डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रही है। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस नियामक ढांचे के डिजिटल बाजार का विस्तार उन्हीं छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाएगा जिनकी भागीदारी से यह अभियान सफल हो सकता है। यदि सरकार कैट की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है, तो आने वाले महीनों में एक मसौदा ई-कॉमर्स नीति सामने आ सकती है, जो भारत के डिजिटल व्यापार के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दूसरी तरफ विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां FDI नियमों की आड़ में उन्हीं स्थानीय व्यापारियों को बाजार से बाहर कर रही हैं। जो नीतिगत शिथिलता पिछले एक दशक से चली आ रही है, उसकी कीमत आज टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे व्यापारी चुका रहे हैं। सरकार को यह तय करना होगा कि डिजिटल भारत का लाभ केवल कुछ बड़े प्लेटफॉर्म तक सीमित रहेगा या यह वाकई 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से आगे बढ़ेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैट ने सरकार से क्या मांग की है?
कैट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर एक व्यापक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति बनाने की मांग की है। इस नीति में FDI नियमों का पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण पर रोक और छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के प्रावधान होने चाहिए।
भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक कितना बड़ा होगा?
डेलॉयट और गूगल की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 2019 से 2025 के बीच यह बाजार पहले ही लगभग 90 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
कैट का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां किन नियमों का उल्लंघन कर रही हैं?
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया के अनुसार, प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां अप्रत्यक्ष इन्वेंट्री स्वामित्व और पसंदीदा विक्रेता व्यवस्था के जरिए FDI नीति की भावना का उल्लंघन कर रही हैं। इसके अलावा कैश बर्न से भारी छूट, डार्क पैटर्न और घटिया माल की आपूर्ति जैसी प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाएं भी अपनाई जा रही हैं।
छोटे व्यापारियों पर ई-कॉमर्स के अनियंत्रित विस्तार का क्या असर होगा?
बिना नियमन के ई-कॉमर्स का विस्तार देश के किराना स्टोर, थोक विक्रेता, वितरक और छोटे खुदरा विक्रेताओं को बाजार से बाहर कर सकता है। इससे शहरी और ग्रामीण भारत में करोड़ों परिवारों की आजीविका और स्वरोजगार के अवसर खतरे में पड़ सकते हैं।
कैट की राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति में कौन-कौन से प्रावधान होने चाहिए?
कैट ने मांग की है कि नीति में FDI नियमों का सख्त पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण पर रोक, एल्गोरिदम में पारदर्शिता, नकली माल के लिए जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और व्यापारियों-उपभोक्ताओं के लिए समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली शामिल हो। MSMEs और छोटे खुदरा विक्रेताओं को समान व्यावसायिक अवसर देना भी इसमें शामिल है।
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