वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल सर्वे 2026: 84% केंद्रीय बैंक बढ़ाएंगे गोल्ड रिजर्व, डॉलर की हिस्सेदारी घटेगी
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे 2026 के अनुसार, दुनिया के 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पाँच वर्षों में उनके कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ेगी — जो पिछले वर्ष के 76 प्रतिशत से उल्लेखनीय वृद्धि है। यह सर्वेक्षण मंगलवार, 16 जून 2026 को जारी किया गया और इसमें 73 केंद्रीय बैंक शामिल थे।
सर्वेक्षण में क्या सामने आया
WGC के इस वार्षिक सर्वे में 17 विकसित और 56 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों की राय शामिल की गई। सर्वेक्षण के मुताबिक, 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक सामूहिक रूप से अपने गोल्ड रिजर्व में वृद्धि करेंगे, जबकि शेष 11 प्रतिशत ने कोई बदलाव न होने की संभावना जताई।
जब उत्तरदाताओं से उनके अपने केंद्रीय बैंक की योजना के बारे में पूछा गया, तो 45 प्रतिशत ने अगले 12 महीनों में गोल्ड रिजर्व बढ़ाने का इरादा जताया। 54 प्रतिशत ने कहा कि उनके रिजर्व में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि केवल 1 प्रतिशत ने गिरावट की संभावना व्यक्त की।
डॉलर की भूमिका पर केंद्रीय बैंकों का नज़रिया
सर्वे का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष डॉलर को लेकर बदलती धारणा है। 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अगले पाँच वर्षों में वैश्विक रिजर्व में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी घटेगी। 15 प्रतिशत ने कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया, जबकि 11 प्रतिशत का मानना था कि डॉलर की हिस्सेदारी बढ़ेगी। गौरतलब है कि उत्तरदाताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि डॉलर वैश्विक स्तर पर प्रमुख रिजर्व मुद्रा बना रहेगा — केवल उसकी सापेक्ष हिस्सेदारी में कमी की संभावना है।
मई में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद
WGC के पहले जारी आँकड़ों के अनुसार, मई 2026 में केंद्रीय बैंकों ने कुल 20 टन सोना खरीदा, जो अप्रैल के 16 टन से अधिक है। हालाँकि यह बीते 12 महीनों के औसत 27 टन से कम रहा। WGC ने इस खरीद की प्रमुख वजह वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को बताया है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक लगातार सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
WGC के विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की चिंताएँ और डॉलर पर निर्भरता घटाने की प्रवृत्ति — ये तीनों कारक मिलकर सोने को केंद्रीय बैंकों के लिए एक आकर्षक रिजर्व परिसंपत्ति बना रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी ट्रेजरी बाज़ारों में अनिश्चितता और डॉलर-आधारित प्रतिबंधों के उपयोग ने कई देशों को विविधीकरण की ओर प्रेरित किया है।
आने वाले वर्षों में केंद्रीय बैंकों की सोने की माँग वैश्विक सोना बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।