सीआईआई ने पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की प्रभावी प्रतिक्रिया की सराहना की; 12 बिंदुओं का औद्योगिक एजेंडा प्रस्तुत किया
सारांश
Key Takeaways
- सीआईआई ने केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया की सराहना की।
- 12 बिंदुओं का कार्य योजना प्रस्तुत की गई।
- संकट के दौरान समन्वय की आवश्यकता है।
- सरकार ने कई निर्णायक कार्रवाई की है।
- औद्योगिक गतिविधियों को बनाए रखने में मदद की गई है।
नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश के प्रमुख उद्योग संघों में से एक, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने पश्चिम एशिया में तनाव के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया की सराहना की है, जिसे एक संगठित और सुव्यवस्थित पहल माना गया है।
इसके अलावा, सीआईआई ने उद्योग जगत से अपील की है कि वे जिम्मेदार और सकारात्मक कदम उठाकर इन प्रयासों में सहयोग प्रदान करें।
सीआईआई ने कहा कि मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति से आपूर्ति में रुकावट हो रही है, जिसका असर ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और कार्यशील पूंजी चक्रों पर पड़ रहा है। हालांकि, नीतिगत उपायों ने तत्काल जोखिम को कम किया है, फिर भी सरकार और उद्योग के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता है।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “सरकार की प्रतिक्रिया समय पर, संतुलित और आश्वस्त करने वाली रही है। यह सरकार के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू रखना, निर्यातकों का समर्थन करना, वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि से परिवारों की सुरक्षा करना और व्यापक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है। उद्योग जगत सरकार के इरादों और कार्यान्वयन दोनों की सराहना करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “इन उपायों ने मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बनाए रखने और वैश्विक अनिश्चितता के समय में विश्वास को कायम रखने में मदद की है, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को भी सहारा दिया है।”
सीआईआई ने 12 बिंदुओं की कार्य योजना प्रस्तुत की है, जिस पर उद्योग वर्तमान परिस्थितियों में विचार कर सकता है।
- कच्चे माल, ईंधन और मध्यवर्ती वस्तुओं के लिए रणनीतिक भंडार विकसित करना।
- कंपनियां स्थिर ईंधन कीमतों और कम लॉजिस्टिक्स लागतों का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास कर सकती हैं।
- विभिन्न स्रोतों की पहचान कर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता में निवेश बढ़ाना।
- एलपीजी से प्राकृतिक गैस की ओर रुख करना।
- खाद्य सेवा प्रदाता नवीन उपाय अपनाकर ईंधन की खपत कम कर सकते हैं।
- आंतरिक दक्षता और लागत प्रबंधन के माध्यम से रोजगार की सुरक्षा।
- बड़ी कंपनियां एमएसएमई भागीदारों को समर्थन प्रदान कर सकती हैं।
- ऊर्जा दक्षता और परिचालन अनुकूलन को बढ़ावा देना।
- निर्यातकों को जोखिम प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करना चाहिए।
- प्रौद्योगिकी में निवेश कर आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता को बढ़ाना।
- खरीद और अनुबंध प्रथाओं की समीक्षा करना।
सीआईआई ने यह भी बताया कि 28 फरवरी को संकट की शुरुआत के बाद से, सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, निर्यात को समर्थन, और बाजारों को स्थिर करने के लिए कई निर्णायक कदम उठाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में विश्वास बना हुआ है।
व्यापार के मोर्चे पर, सरकार ने निर्यातकों को समर्थन देने के लिए आरओडीटीईपी दरों को बहाल किया है और माल ढुलाई तथा बीमा की बाधाओं को दूर करने के लिए लक्षित उपाय किए हैं।