सिप्ला का Q1 FY27 मुनाफा 39.2% गिरकर ₹789 करोड़, खर्च ₹6,248 करोड़ पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
फार्मा दिग्गज सिप्ला लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 39.2 प्रतिशत की तीव्र गिरावट के साथ ₹789.05 करोड़ रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आँकड़ा ₹1,297.91 करोड़ था। 23 जुलाई 2026 को जारी नियामकीय फाइलिंग में यह जानकारी सामने आई।
आय में मामूली वृद्धि, लेकिन खर्च तेज़ी से बढ़े
तिमाही के दौरान कंपनी की ऑपरेशंस से आय सालाना आधार पर 2.3 प्रतिशत बढ़कर ₹7,119.28 करोड़ हो गई, जो एक वर्ष पूर्व ₹6,957.47 करोड़ थी। कुल आय 1.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹7,330.18 करोड़ दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह ₹7,216.03 करोड़ थी।
दूसरी तरफ, कंपनी का कुल खर्च जून तिमाही में 14.7 प्रतिशत उछलकर ₹6,248.25 करोड़ पहुँच गया, जो वर्ष पूर्व की समान अवधि में ₹5,446.10 करोड़ था। यही खर्च-वृद्धि मुनाफे में तीखी गिरावट की मुख्य वजह बनी।
लेखांकन बदलाव से तुलना प्रभावित
सिप्ला ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से कुछ मार्केटिंग और प्रमोशनल खर्चों की प्रस्तुति पद्धति बदल दी गई है। अब इन्हें ऑपरेशंस से होने वाली आय से घटाकर दिखाया जा रहा है, जबकि पहले इन्हें 'सेल्स प्रमोशन खर्च' के रूप में अन्य व्यय में शामिल किया जाता था।
जून 2025 तिमाही के लिए इस बदलाव से संबंधित राशि ₹115.24 करोड़ थी। इस समायोजन के बाद पिछले वर्ष की तुलनीय आय ₹6,842.23 करोड़ बैठती है, जिससे वास्तविक आय वृद्धि लगभग 4 प्रतिशत रही। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रस्तुति बदलाव का शुद्ध लाभ, प्रति शेयर आय (EPS), कुल इक्विटी या नकदी प्रवाह पर कोई असर नहीं पड़ा।
प्रमुख बाज़ारों में प्रगति जारी: CEO
सिप्ला के प्रबंध निदेशक एवं ग्लोबल सीईओ अचिन गुप्ता ने कहा, 'हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे प्रमुख बाज़ारों में लगातार मज़बूत प्रगति जारी है। ब्रांडेड प्रिस्क्रिप्शन कारोबार ने शानदार वृद्धि दर्ज की है, जिसमें हमारी प्रमुख थेरेपी ने बाज़ार से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, ट्रेड जेनेरिक्स कारोबार में भी स्वस्थ वृद्धि रही और कंज्यूमर हेल्थ बिज़नेस के प्रमुख ब्रांडों ने अपनी अग्रणी स्थिति बरकरार रखी।'
उत्तर अमेरिकी बाज़ार को लेकर गुप्ता ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि आगामी उत्पादों की मज़बूत पाइपलाइन के दम पर तिमाही-दर-तिमाही वृद्धि जारी रहेगी। दक्षिण अफ्रीका का प्राइवेट बिज़नेस भी बाज़ार की तुलना में तेज़ गति से बढ़ता रहा।'
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय फार्मा क्षेत्र अमेरिकी नियामकीय दबाव और कच्चे माल की लागत में उछाल से जूझ रहा है। सिप्ला की उत्तर अमेरिकी पाइपलाइन और घरेलू ब्रांडेड कारोबार की रफ्तार आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की बहाली की कुंजी होगी।