विप्रो का Q1 FY27 शुद्ध मुनाफा 4.7% घटकर ₹3,352 करोड़, आईटी मार्जिन भी दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
विप्रो लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 4.7 प्रतिशत घटकर ₹3,352 करोड़ रह गया, जबकि सालाना आधार पर यह करीब सपाट रहा। कंपनी ने 17 जुलाई 2025 को एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए ये नतीजे सार्वजनिक किए।
तिमाही वित्तीय प्रदर्शन
जून तिमाही में विप्रो की सकल आय तिमाही आधार पर 1 प्रतिशत और सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत बढ़कर ₹24,480 करोड़ रही। हालाँकि आय में वृद्धि हुई, लेकिन मुनाफे में गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
परिचालन स्तर पर, आईटी सेवाओं का ऑपरेटिंग मार्जिन 16 प्रतिशत रहा — जो पिछली तिमाही की तुलना में 1.3 प्रतिशत अंक और पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 1.2 प्रतिशत अंक कम है। यह मार्जिन संकुचन उस दबाव को दर्शाता है जो भारतीय आईटी कंपनियाँ वेतन वृद्धि और वैश्विक माँग में अनिश्चितता के बीच झेल रही हैं।
नकदी प्रवाह और कर्मचारी आँकड़े
ऑपरेटिंग कैश फ्लो इस तिमाही में तिमाही आधार पर 3.6 प्रतिशत बढ़कर ₹3,290 करोड़ हो गया, जो कंपनी की शुद्ध आय का 98 प्रतिशत है — एक मज़बूत नकदी रूपांतरण संकेत। वॉलंटरी एट्रिशन रेट पिछले 12 महीनों के आधार पर 13.9 प्रतिशत रही।
अगली तिमाही का मार्गदर्शन
विप्रो ने Q2 FY27 के लिए गाइडेंस में कहा कि आईटी सेवा कारोबार की आय 1.5 प्रतिशत की गिरावट से लेकर 0.5 प्रतिशत की वृद्धि के दायरे में रह सकती है। यह सतर्क मार्गदर्शन वैश्विक मैक्रो अनिश्चितता और ग्राहकों के विवेकाधीन खर्च में सुस्ती को दर्शाता है।
सीईओ की प्रतिक्रिया
विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्रीनी पल्लिया ने कहा, 'ग्राहक अब केवल तकनीकी आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एआई-सक्षम परिचालन मॉडल अपना रहे हैं, जो गुणवत्ता, मज़बूती और उत्पादकता में सुधार करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'विप्रो का कंसल्टिंग-आधारित और एआई-संचालित दृष्टिकोण ग्राहकों को उनके व्यवसाय के केंद्र में एआई को शामिल करने में मदद करता है।'
लाभांश और शेयर प्रदर्शन
कंपनी के निदेशक मंडल ने प्रति इक्विटी शेयर ₹2 के अंतरिम लाभांश की घोषणा की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर गुरुवार को विप्रो का शेयर 1.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹177.80 पर बंद हुआ। हालाँकि दीर्घकालिक तस्वीर चिंताजनक है — पिछले छह महीनों में शेयर 33.56 प्रतिशत, पिछले एक वर्ष में 32.38 प्रतिशत और पिछले पाँच वर्षों में 38.49 प्रतिशत गिर चुका है। यह प्रदर्शन भारतीय आईटी क्षेत्र में संरचनात्मक पुनर्मूल्यांकन की व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।