सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर सत्यापन का दायरा बढ़ा, नई शुल्क संरचना लागू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 24 मई 2026 को 'लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013' में महत्वपूर्ण संशोधन की घोषणा की, जिसके तहत सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर को सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के सत्यापन दायरे में शामिल किया गया है। इस कदम का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ देश के वजन और माप सत्यापन ढाँचे को सुदृढ़ करना है।
संशोधन में क्या बदला
संशोधित नियमों के अंतर्गत पाँच नई श्रेणियों के डिस्पेंसिंग सिस्टम को जीएटीसी सत्यापन सूची में जोड़ा गया है — पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर। इन्हें शामिल किए जाने के बाद जीएटीसी अब लीगल मेट्रोलॉजी ढाँचे के तहत कुल 23 श्रेणियों के वजन और माप उपकरणों का सत्यापन एवं पुनः सत्यापन कर सकेंगे।
नई शुल्क संरचना
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए शुल्क ₹5,000 प्रति नोजल निर्धारित किया गया है। वहीं, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क ₹10,000 प्रति नोजल तय किया गया है। यह अंतर इन ईंधनों की तकनीकी जटिलता और सत्यापन प्रक्रिया की विशेषज्ञता को दर्शाता है।
राज्यों को मिला विशेष अधिकार
संशोधन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि राज्य सरकारों को अपने-अपने नियमों के अनुसार जीएटीसी के माध्यम से सत्यापन हेतु वजन और माप की अतिरिक्त श्रेणियाँ अधिसूचित करने का अधिकार दिया गया है। यह विकेंद्रीकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सत्यापन व्यवस्था को अनुकूलित कर सकेंगे।
जीएटीसी ढाँचे की भूमिका
जीएटीसी ऐसी सरकार-अनुमोदित सुविधाएँ हैं, जिनके पास लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम के तहत सत्यापन कार्य के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है। योग्य निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को इस ढाँचे में शामिल कर देश की समग्र सत्यापन क्षमता का विस्तार किया जा रहा है, जिससे सत्यापन सेवाओं तक पहुँच भी बेहतर होगी।
आगे की राह
यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब भारत अपने ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और सीएनजी तथा हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग देश भर में बढ़ रहा है। गौरतलब है कि सत्यापन ढाँचे का यह विस्तार उपभोक्ताओं को ईंधन की सटीक माप सुनिश्चित करने और ईंधन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।