5 नवंबर 2026
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ब्रेंट क्रूड 93.65 डॉलर पर, अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद तेल बाज़ार में लगातार चौथे दिन गिरावट

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ब्रेंट क्रूड 93.65 डॉलर पर, अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद तेल बाज़ार में लगातार चौथे दिन गिरावट

सारांश

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक जीत के बाद ईरान पर सैन्य हमले की आशंका घटी, और तेल बाज़ार से जोखिम प्रीमियम बाहर निकलने लगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह 16% टूट चुका है — लेकिन विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि भंडार 15 साल के निचले स्तर पर हैं और भू-राजनीति कभी भी पलट सकती है।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 1% गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा; WTI 1.36% टूटकर 86.92 डॉलर पर।
इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में कुल 16 प्रतिशत की गिरावट — हाल के वर्षों की सबसे तेज़ साप्ताहिक गिरावट।
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद ईरान पर सैन्य हमले की आशंका घटी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल; सितंबर में 11 लाख बैरल/दिन और अक्टूबर में 14 लाख बैरल/दिन का अधिशेष।
वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब; माँग एक वर्ष के उच्च स्तर पर।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेताया — गिरावट स्थायी नहीं, नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी से प्रभावी होगी।

ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 5 नवंबर 2026 को करीब 1 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 1.36 प्रतिशत टूटकर 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह वैश्विक कच्चे तेल बाज़ार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की गिरावट है, जिसके पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ सैन्य तनाव कम होने की उम्मीद को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

साप्ताहिक गिरावट का आँकड़ा

इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे तेज़ साप्ताहिक गिरावटों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले बुधवार को दोनों बेंचमार्क 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे और अगस्त के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद हुए थे।

भू-राजनीतिक जोखिम में कमी

बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों का तेल कीमतों पर दबाव अब घटता दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी देशों के सरकारी हलकों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले की संभावना अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी युद्ध की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक बढ़त के बाद बाज़ार में जोखिम प्रीमियम में कमी देखी जा रही है।

आपूर्ति स्थिति में सुधार

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुँचने लगी है, जिससे वैश्विक बाज़ार में आपूर्ति को लेकर चिंताएँ कम हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद वैश्विक तेल बाज़ार एक बार फिर अधिशेष (सरप्लस) की स्थिति में पहुँच रहा है। अनुमान है कि सितंबर में वैश्विक बाज़ार में प्रतिदिन करीब 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त आपूर्ति रही।

विशेषज्ञों की चेतावनी

हालाँकि ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को स्थायी मान लेना जल्दबाज़ी होगी। उनके अनुसार, भू-राजनीतिक हालात तेज़ी से बदल सकते हैं और नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी से प्रभावी होगी, इसलिए तत्काल नीति परिवर्तन की उम्मीद रखना उचित नहीं होगा।

गौरतलब है कि प्रमुख उपभोक्ता देशों में वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं। अमेरिका में भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल, पेट्रोल और डिस्टिलेट के भंडार घटे हैं, जबकि माँग एक वर्ष के उच्च स्तर पर पहुँची है। ऐसे में आगे की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि माँग-आपूर्ति के बुनियादी समीकरण में बदलाव का। विरोधाभास यह है कि जिस समय बाज़ार सरप्लस की राहत महसूस कर रहा है, उसी समय वाणिज्यिक भंडार 15 साल के निचले स्तर के करीब हैं और माँग एक साल के उच्च स्तर पर है। नई डेमोक्रेटिक कांग्रेस जनवरी से पहले कोई बाध्यकारी नीति नहीं बदल सकती, इसलिए बाज़ार अभी उम्मीद पर दाँव लगा रहा है, हकीकत पर नहीं। अगर पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर भड़का, तो यही बाज़ार उतनी ही तेज़ी से पलट सकता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रेंट क्रूड की कीमत अचानक क्यों गिरी?
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद ईरान पर बड़े सैन्य हमले की आशंका कम हुई, जिससे तेल बाज़ार में जोखिम प्रीमियम घटा और बिकवाली का दबाव बढ़ा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल होने से बाज़ार सरप्लस में पहुँचने के संकेत मिले, जिसने गिरावट को और तेज़ किया।
इस सप्ताह कच्चे तेल में कितनी गिरावट आई?
इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे तेज़ साप्ताहिक गिरावटों में से एक माना जा रहा है। बुधवार को दोनों बेंचमार्क अकेले 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे।
क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट को स्थायी मान लेना जल्दबाज़ी होगी। वाणिज्यिक तेल भंडार 15 साल के निचले स्तर के करीब हैं, माँग उच्च स्तर पर है, और नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी से पहले कोई ठोस नीति नहीं बदल सकती।
वैश्विक तेल बाज़ार में सरप्लस की स्थिति कितनी है?
रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में वैश्विक बाज़ार में प्रतिदिन करीब 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त आपूर्ति रही। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब बहाल होने के बाद यह सरप्लस बना है।
भारत पर इस गिरावट का क्या असर हो सकता है?
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर आयात बिल पर पड़ सकता है। हालाँकि घरेलू पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बदलाव सरकारी नीति और टैक्स ढाँचे पर भी निर्भर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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