ब्रेंट क्रूड 93.65 डॉलर पर, अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद तेल बाज़ार में लगातार चौथे दिन गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 5 नवंबर 2026 को करीब 1 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 1.36 प्रतिशत टूटकर 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह वैश्विक कच्चे तेल बाज़ार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की गिरावट है, जिसके पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ सैन्य तनाव कम होने की उम्मीद को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
साप्ताहिक गिरावट का आँकड़ा
इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे तेज़ साप्ताहिक गिरावटों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले बुधवार को दोनों बेंचमार्क 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे और अगस्त के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद हुए थे।
भू-राजनीतिक जोखिम में कमी
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों का तेल कीमतों पर दबाव अब घटता दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी देशों के सरकारी हलकों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले की संभावना अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी युद्ध की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक बढ़त के बाद बाज़ार में जोखिम प्रीमियम में कमी देखी जा रही है।
आपूर्ति स्थिति में सुधार
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुँचने लगी है, जिससे वैश्विक बाज़ार में आपूर्ति को लेकर चिंताएँ कम हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद वैश्विक तेल बाज़ार एक बार फिर अधिशेष (सरप्लस) की स्थिति में पहुँच रहा है। अनुमान है कि सितंबर में वैश्विक बाज़ार में प्रतिदिन करीब 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त आपूर्ति रही।
विशेषज्ञों की चेतावनी
हालाँकि ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को स्थायी मान लेना जल्दबाज़ी होगी। उनके अनुसार, भू-राजनीतिक हालात तेज़ी से बदल सकते हैं और नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी से प्रभावी होगी, इसलिए तत्काल नीति परिवर्तन की उम्मीद रखना उचित नहीं होगा।
गौरतलब है कि प्रमुख उपभोक्ता देशों में वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं। अमेरिका में भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल, पेट्रोल और डिस्टिलेट के भंडार घटे हैं, जबकि माँग एक वर्ष के उच्च स्तर पर पहुँची है। ऐसे में आगे की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।