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कच्चे तेल में 1% की गिरावट: ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए 1,88,000 बैरल/दिन उत्पादन बढ़ाया

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कच्चे तेल में 1% की गिरावट: ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए 1,88,000 बैरल/दिन उत्पादन बढ़ाया

सारांश

ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए उत्पादन में 1,88,000 बैरल/दिन की बढ़ोतरी को मंज़ूरी दी और होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट सामान्य हुई — इससे ब्रेंट क्रूड $71.55 और WTI $69 से नीचे आ गया। 2023 की कटौती की पूर्ण वापसी सितंबर तक संभावित है।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड 0.76% गिरकर $71.55 प्रति बैरल और WTI करीब 1% गिरकर $69 प्रति बैरल से नीचे आया।
ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए 1,88,000 बैरल प्रति दिन उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई।
हालिया बढ़ोतरी के बाद कुल उत्पादन कोटा वृद्धि 9,40,000 बैरल प्रति दिन — वैश्विक माँग का लगभग 1 प्रतिशत ।
होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट सामान्य हुई; सऊदी अरब और UAE ने निर्यात संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुँचाया।
सितंबर में एक और उत्पादन बढ़ोतरी संभावित, जो 2023 की कटौती की पूर्ण वापसी होगी।

ब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतों में सोमवार, 6 जुलाई को करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जब ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति जताई और होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट सामान्य होने के संकेत मिले। वैश्विक आपूर्ति में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।

कीमतों में कितनी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.76 प्रतिशत यानी 55 सेंट टूटकर $71.55 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 1 प्रतिशत यानी 68 सेंट की गिरावट के साथ $69 प्रति बैरल से नीचे ट्रेड कर रहा था। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही माँग को लेकर अनिश्चितता में है।

ओपेक प्लस का उत्पादन निर्णय

सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में ओपेक प्लस के सात प्रमुख उत्पादक देशों ने अगस्त के लिए कुल उत्पादन लक्ष्य में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी पर सहमति जताई है। यह बढ़ोतरी 2023 में लागू की गई स्वैच्छिक उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जो कच्चे तेल की कीमतों को सहारा देने के लिए लागू की गई थी।

यदि यह योजना लागू होती है, तो हालिया बढ़ोतरी को जोड़कर ओपेक प्लस के कुल उत्पादन कोटे में वृद्धि 9,40,000 बैरल प्रति दिन तक पहुँच जाएगी — जो वैश्विक तेल माँग का लगभग 1 प्रतिशत है। गौरतलब है कि यह उत्पादन बहाली का अंतिम से पिछला चरण माना जा रहा है, और सितंबर में एक और अंतिम बढ़ोतरी संभावित बताई जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट और भू-राजनीतिक बदलाव

होर्मुज स्ट्रेट — जो वैश्विक तेल व्यापार का एक अहम समुद्री मार्ग है — से तेल शिपमेंट के सामान्य होने की खबरों ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम हुआ है, जिससे प्रमुख उत्पादक देशों के लिए निर्यात और उत्पादन फिर से शुरू करना संभव हो गया है।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने तेल निर्यात को संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुँचा दिया है, जिससे वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

एशियाई बाज़ारों पर असर

अतिरिक्त आपूर्ति की वापसी से प्रमुख एशियाई बाज़ारों में अधिशेष की स्थिति बनने लगी है। इससे संघर्ष के दौरान तेल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी पर लगाम लगी है। साथ ही, बाज़ार हिस्सेदारी के लिए ओपेक उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना भी पैदा हो गई है।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों के अनुसार, सितंबर में एक और उत्पादन बढ़ोतरी के साथ ओपेक प्लस द्वारा 2023 की कटौती पूरी तरह वापस ली जा सकती है। यदि वैश्विक माँग में उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें और दबाव में आ सकती हैं — जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए राहत की बात होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अमेरिकी शेल उत्पादन और कमज़ोर एशियाई माँग ने उस लाभ को सीमित कर दिया। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना और अमेरिका-ईरान समझौता एक साथ आने से आपूर्ति का दबाव दोहरा हो गया है। भारत के लिए यह राहत की खबर है — कच्चे तेल का बड़ा आयातक होने के नाते हर डॉलर की गिरावट चालू खाते के घाटे पर सीधा असर डालती है — लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ओपेक सदस्य बढ़े हुए कोटे का पूरी तरह पालन करेंगे, जो ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद रहा है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कच्चे तेल की कीमतें 6 जुलाई को क्यों गिरीं?
ओपेक प्लस द्वारा अगस्त के लिए उत्पादन लक्ष्य में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी और होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट के सामान्य होने से वैश्विक आपूर्ति बढ़ने की आशंका पैदा हुई, जिससे ब्रेंट और WTI दोनों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आई।
ओपेक प्लस ने अगस्त के लिए कितना उत्पादन बढ़ाया है?
ओपेक प्लस के सात प्रमुख उत्पादकों ने अगस्त के लिए कुल 1,88,000 बैरल प्रति दिन उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे हालिया बढ़ोतरी को जोड़कर कुल उत्पादन कोटा वृद्धि 9,40,000 बैरल प्रति दिन हो जाएगी, जो वैश्विक तेल माँग का लगभग 1 प्रतिशत है।
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का तेल कीमतों पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट के सामान्य होने से वैश्विक आपूर्ति में सुधार के संकेत मिले, जिससे भू-राजनीतिक तनाव के दौरान बनी आपूर्ति-कमी की चिंताएँ कम हुईं। अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद सऊदी अरब और UAE ने निर्यात संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुँचा दिया है।
ओपेक प्लस की 2023 की उत्पादन कटौती कब पूरी तरह वापस होगी?
मौजूदा बढ़ोतरी को अंतिम से पिछला चरण माना जा रहा है। सितंबर में एक और अंतिम उत्पादन बढ़ोतरी की संभावना है, जिसके बाद 2023 में लागू की गई स्वैच्छिक कटौती पूरी तरह वापस हो जाएगी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से चालू खाते के घाटे में कमी और ईंधन आयात बिल में राहत मिल सकती है। हालाँकि, घरेलू पेट्रोल-डीज़ल कीमतों पर इसका सीधा असर सरकारी मूल्य-निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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