दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर लॉन्च हुआ भारत का पहला स्काईकास्ट सिस्टम, कोहरे से उड़ानों को मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 29 मई 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर भारत के पहले 'स्काईकास्ट सिस्टम' का उद्घाटन किया — एक उन्नत विमानन मौसम निगरानी प्रणाली जो कोहरे, अशांति और कम दृश्यता के कारण होने वाली उड़ान बाधाओं को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस लॉन्च के साथ भारत विश्व स्तर पर यह प्रणाली स्थापित करने वाला 19वाँ देश बन गया है।
स्काईकास्ट सिस्टम क्या है और कैसे काम करता है
स्काईकास्ट एक बहु-प्रौद्योगिकी वायुमंडलीय निगरानी प्रणाली है जो कई अत्याधुनिक उपकरणों को एकीकृत करती है। इनमें रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 लिडार-आधारित सीलोमीटर शामिल हैं। यह प्रणाली पायलटों, एयरलाइनों और हवाई यातायात प्रबंधकों को कोहरे, एरोसोल, अशांति, नमी और दृश्यता का वास्तविक समय मापन उपलब्ध कराती है।
इस प्रणाली के केंद्र में एक उन्नत बाउंड्री लेयर रडार विंड प्रोफाइलर है, जो हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर तक हवा की गति, दिशा, अशांति, ऊर्ध्वाधर वेग और बाउंड्री लेयर की गतिशीलता को निरंतर मापता है।
विमानन सुरक्षा पर असर
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, स्काईकास्ट गंभीर मौसम स्थितियों में पायलटों और विमानन ऑपरेटरों को वास्तविक समय की जानकारी देकर विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा। यह प्रणाली चालक दल को लगभग तीन घंटे पहले अग्रिम चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे वे लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित समय का निर्णय ले सकते हैं।
इससे अनावश्यक मार्ग परिवर्तन, उड़ान रद्दीकरण और देरी में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है — विशेषकर सर्दियों के महीनों में जब दिल्ली का IGI हवाई अड्डा घने कोहरे के कारण बड़े पैमाने पर व्यवधान का सामना करता है।
मिशन मौसम और विस्तार योजना
डॉ. सिंह ने इस अवसंरचना को संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मिशन मौसम' पहल को श्रेय दिया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दूसरा स्काईकास्ट सिस्टम जेवर हवाई अड्डे पर स्थापित किया जाएगा, जिसके बाद अन्य हवाई अड्डों पर भी इसे चरणबद्ध तरीके से लगाया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने विमानन क्षेत्र का तेज़ी से विस्तार कर रहा है और नए हवाई अड्डों के निर्माण के साथ मौसम संबंधी बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना एक प्राथमिकता बन गई है।
विमानन से परे उपयोगिता
स्काईकास्ट के अनुप्रयोग केवल विमानन तक सीमित नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली से प्राप्त डेटा उन्नत पूर्वानुमान मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निर्णय समर्थन प्रणालियों, शहरी मौसम पूर्वानुमान, प्रदूषण प्रबंधन, परिवहन सलाह और आपदा तैयारी पहलों में भी सहायक होगा।
वैश्विक स्तर पर अब तक केवल 18 देशों में ऐसे सिस्टम स्थापित हैं; भारत के इस कदम से देश उन्नत मौसम प्रौद्योगिकी में अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल हो गया है।