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DII ने मई में रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ का निवेश कर FII की 11 महीने की बिकवाली को किया बेअसर

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DII ने मई में रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ का निवेश कर FII की 11 महीने की बिकवाली को किया बेअसर

सारांश

मई 2026 में DII ने रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ लगाकर FII की 11 महीने की बिकवाली को बेअसर कर दिया। यह भारतीय बाज़ार की बदलती ताकत का संकेत है — विदेशी पूँजी की निकासी अब घरेलू निवेशकों की बढ़ती शक्ति से टकरा रही है।

मुख्य बातें

DII ने मई 2026 में रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ का निवेश किया — अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश।
FII ने मई में ₹55,963 करोड़ के शेयर बेचे; 11 महीने से बिकवाली जारी।
अंतिम सप्ताह में FII ने ₹23,734 करोड़ बेचे, जबकि DII ने ₹25,503 करोड़ खरीदे।
FII की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, रुपए में कमज़ोरी और कच्चे तेल की ऊँची कीमतें ।
आगे बाज़ार की दिशा RBI मौद्रिक नीति , मानसून और अमेरिका-ईरान वार्ता पर निर्भर।

भारतीय शेयर बाज़ार में मई 2026 के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ का निवेश कर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार 11 महीने से जारी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। मुंबई के वित्तीय बाज़ारों में यह DII की ओर से अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश दर्ज किया गया है।

मई में बाज़ार का समीकरण

मई महीने में FII ने कुल ₹55,963 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि DII ने ₹82,668 करोड़ की खरीदारी कर बेंचमार्क सूचकांकों को बड़ी गिरावट से बचाए रखा। यह खींचतान महीने के अंतिम सप्ताह में भी स्पष्ट रूप से दिखी।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (टेक्निकल) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, "FII ने अपनी बिकवाली जारी रखी और चार कारोबारी सत्रों में शुद्ध रूप से ₹23,734 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं DII ने बाज़ार के सबसे बड़े सहारे की भूमिका निभाते हुए ₹25,503 करोड़ की खरीदारी की। खास बात यह रही कि DII ने पूरे सप्ताह हर दिन लगातार खरीदारी की।"

FII की बिकवाली के पीछे के कारण

विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बड़े पैमाने पर निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही रुपए में कमज़ोरी और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों जैसे व्यापक आर्थिक दबावों ने भी विदेशी निवेशकों की चिंता में इज़ाफा किया।

हालाँकि, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं को कम किया, जिससे वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में कुछ सकारात्मक माहौल देखने को मिला और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ गिरावट से निवेशकों का भरोसा आंशिक रूप से लौटा।

DII की भूमिका और बाज़ार पर असर

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि घरेलू निवेशकों की मज़बूत भागीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बड़े हिस्से को अपने भीतर समाहित कर लिया और बेंचमार्क सूचकांकों में बड़ी गिरावट आने से रोका। यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा निवेशकों की म्यूचुअल फंड के माध्यम से बाज़ार में भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि FII की 11 महीने की लंबी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाज़ार ने अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखी, जो DII की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।

आगे क्या होगा

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीने में संस्थागत निवेश का रुख कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा — अमेरिका-ईरान तनाव की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के फैसले, और मानसून की प्रगति। इन संकेतकों पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

668 करोड़ का यह रिकॉर्ड निवेश एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है — भारतीय बाज़ार अब विदेशी पूँजी प्रवाह पर उतना निर्भर नहीं जितना एक दशक पहले था। लेकिन यह आत्मसंतोष का नहीं, सतर्कता का समय है: DII की यह खरीदारी काफी हद तक म्यूचुअल फंड SIP प्रवाह पर टिकी है, जो खुदरा निवेशकों के भरोसे पर निर्भर है। अगर वैश्विक मंदी की आशंका गहराई या घरेलू आय पर दबाव बढ़ा, तो यही SIP प्रवाह उलट भी सकता है। FII की 11 महीने की बिकवाली के बावजूद बाज़ार का टिके रहना उत्साहजनक है, पर इसे स्थायी सुरक्षा कवच मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मई 2026 में DII ने कितना निवेश किया और यह क्यों अहम है?
DII ने मई 2026 में रिकॉर्ड ₹82,668 करोड़ का निवेश किया, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। यह इसलिए अहम है क्योंकि इसने FII की ₹55,963 करोड़ की बिकवाली के बावजूद बाज़ार को स्थिर रखा।
FII भारतीय बाज़ार में लगातार बिकवाली क्यों कर रहे हैं?
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, रुपए में कमज़ोरी और कच्चे तेल की ऊँची कीमतें FII की बिकवाली के प्रमुख कारण हैं। इन कारकों ने वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ाया है।
आगे भारतीय बाज़ार की दिशा क्या होगी?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीने में बाज़ार की दिशा RBI की मौद्रिक नीति, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगी। इन संकेतकों पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी।
DII और FII में क्या अंतर है?
DII यानी घरेलू संस्थागत निवेशक — म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ और पेंशन फंड जैसी भारतीय संस्थाएँ — जो देश के भीतर से पूँजी लगाती हैं। FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशक वे विदेशी संस्थाएँ हैं जो भारतीय बाज़ार में निवेश करती हैं और वैश्विक परिस्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
क्या DII की खरीदारी FII की बिकवाली को हमेशा संतुलित कर सकती है?
जरूरी नहीं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, मई में DII ने FII की बिकवाली के बड़े हिस्से को अपने भीतर समाहित किया। लेकिन DII की खरीदारी काफी हद तक SIP और म्यूचुअल फंड प्रवाह पर निर्भर है, जो बाज़ार की परिस्थितियों के साथ बदल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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