11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

DPIIT और MSME मंत्रालय का GI टैग उत्पादों के व्यवसायीकरण के लिए MOU, कारीगरों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
DPIIT और MSME मंत्रालय का GI टैग उत्पादों के व्यवसायीकरण के लिए MOU, कारीगरों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार

सारांश

DPIIT और MSME मंत्रालय ने 11 अगस्त को MOU साइन कर भारत के GI टैग उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाया। 'भारत GI' बैनर तले ONDC और GeM पर GI समूहों की एंट्री और ODOP के साथ एकीकरण से कारीगरों व बुनकरों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

DPIIT और MSME मंत्रालय ने 11 अगस्त 2026 को GI टैग उत्पादों के व्यवसायीकरण के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत 'भारत GI' बैनर के अंतर्गत ONDC और GeM पर GI समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को शामिल किया जाएगा।
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पारिस्थितिकी तंत्र को दोनों मंत्रालयों के कार्यक्रमों में एकीकृत किया जाएगा।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में समर्पित GI पवेलियन सह-प्रायोजित किए जाएंगे।
कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण और डिजिटल सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME मंत्रालय) ने 11 अगस्त 2026 को भारत के भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त उत्पादों के व्यवसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और वैश्विक बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह साझेदारी देश के स्वदेशी कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका को सीधे प्रभावित करेगी।

MOU का उद्देश्य और संरचना

यह समझौता ज्ञापन DPIIT की बौद्धिक संपदा संरक्षण की भूमिका और MSME मंत्रालय के उद्यम विकास दायित्व को एक साझे ढाँचे में जोड़ता है। भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत GI पंजीकरण और कानूनी संरक्षण का नोडल दायित्व DPIIT के पास है, जबकि MSME मंत्रालय पारंपरिक उद्योगों और कारीगर समुदायों के विकास का केंद्रीय मंत्रालय है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों विभाग मिलकर एक सहयोगात्मक प्रारूप स्थापित करेंगे जिसमें GI उत्पादों की बाज़ार पहुँच, गुणवत्ता और पहचान को व्यापक रूप से मज़बूत किया जाएगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और ODOP से जुड़ाव

संयुक्त पहल के तहत दोनों संगठन अपने कार्यक्रमों में एक जिला एक उत्पाद (ODOP) को एकीकृत करने की दिशा में काम करेंगे। इसके साथ ही, एक समर्पित 'भारत GI' बैनर के अंतर्गत ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर GI समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को शामिल करने में सहयोग दिया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत के GI पंजीकृत उत्पादों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, परंतु इनमें से अधिकांश उत्पाद अभी भी संगठित वैश्विक वितरण नेटवर्क से बाहर हैं। ONDC और GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर GI उत्पादों की उपस्थिति इस अंतर को पाटने का प्रयास है।

व्यापार प्रदर्शनियों में GI पवेलियन

दोनों मंत्रालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में समर्पित GI पवेलियन को सह-प्रायोजित करेंगे। इससे GI उत्पादों को घरेलू और वैश्विक खरीदारों के सामने सीधे प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि यह पहल ODOP पारिस्थितिकी तंत्र को भी व्यापक समर्थन देगी, जो पहले से ही ज़िला स्तरीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम कर रहा है।

कारीगरों और उत्पादकों पर असर

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस सहयोग से कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और बेहतर बाज़ार पहुँच को सुगम बनाया जाएगा। भारत के GI पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूती मिलने की आशा व्यक्त की गई है, जिससे उन समुदायों को सीधा लाभ होगा जो पीढ़ियों से पारंपरिक शिल्प और उत्पादन से जुड़े हैं।

आगे चलकर यह देखना होगा कि MOU के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य किस गति से ज़मीन पर उतरते हैं और कितने GI उत्पाद वास्तव में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पहचान बना पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

MSME के पास कारीगर नेटवर्क। लेकिन भारत में GI पंजीकरण और वास्तविक व्यावसायिक सफलता के बीच की खाई पुरानी और गहरी है; दर्जनों GI उत्पाद पंजीकृत होने के बाद भी बाज़ार में हाशिये पर हैं। असली परीक्षा यह है कि 'भारत GI' बैनर और ONDC-GeM एकीकरण सिर्फ सूचीबद्धता तक सीमित रहेगा या खरीदार-विक्रेता जुड़ाव और मूल्य प्राप्ति तक भी पहुँचेगा। बिना जवाबदेही ढाँचे और मापने योग्य आजीविका संकेतकों के, यह समझौता भी उन नीतिगत घोषणाओं की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाता है जो कारीगर समुदायों तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DPIIT और MSME मंत्रालय के बीच GI MOU क्या है?
यह 11 अगस्त 2026 को हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत DPIIT और MSME मंत्रालय मिलकर भारत के GI टैग प्राप्त उत्पादों के व्यवसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और वैश्विक बाज़ार तक पहुँच के लिए काम करेंगे। इसमें ONDC, GeM और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में GI उत्पादों की उपस्थिति सुनिश्चित करना शामिल है।
इस MOU से कारीगरों और बुनकरों को क्या फायदा होगा?
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस सहयोग से स्वदेशी कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों को क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और बेहतर बाज़ार पहुँच मिलेगी। 'भारत GI' बैनर तले ONDC और GeM पर सूचीबद्धता से उन्हें घरेलू और वैश्विक खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
ODOP और GI MOU के बीच क्या संबंध है?
दोनों मंत्रालय अपने कार्यक्रम डिज़ाइन में एक जिला एक उत्पाद (ODOP) को GI ढाँचे के साथ एकीकृत करेंगे। इससे ज़िला स्तरीय विशिष्ट उत्पादों को GI पहचान के साथ-साथ संगठित बाज़ार समर्थन भी मिलेगा।
'भारत GI' बैनर क्या है और यह कहाँ लागू होगा?
'भारत GI' एक समर्पित ब्रांड बैनर है जिसके अंतर्गत GI समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ONDC और GeM प्लेटफॉर्म पर शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य GI उत्पादों को एक पहचानने योग्य राष्ट्रीय पहचान देना और डिजिटल वाणिज्य में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
GI पंजीकरण के लिए नोडल विभाग कौन सा है?
भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत GI पंजीकरण और कानूनी संरक्षण का नोडल दायित्व DPIIT के पास है। MSME मंत्रालय पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास का नोडल मंत्रालय है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले