DPIIT और MSME मंत्रालय का GI टैग उत्पादों के व्यवसायीकरण के लिए MOU, कारीगरों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME मंत्रालय) ने 11 अगस्त 2026 को भारत के भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त उत्पादों के व्यवसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और वैश्विक बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह साझेदारी देश के स्वदेशी कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका को सीधे प्रभावित करेगी।
MOU का उद्देश्य और संरचना
यह समझौता ज्ञापन DPIIT की बौद्धिक संपदा संरक्षण की भूमिका और MSME मंत्रालय के उद्यम विकास दायित्व को एक साझे ढाँचे में जोड़ता है। भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत GI पंजीकरण और कानूनी संरक्षण का नोडल दायित्व DPIIT के पास है, जबकि MSME मंत्रालय पारंपरिक उद्योगों और कारीगर समुदायों के विकास का केंद्रीय मंत्रालय है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों विभाग मिलकर एक सहयोगात्मक प्रारूप स्थापित करेंगे जिसमें GI उत्पादों की बाज़ार पहुँच, गुणवत्ता और पहचान को व्यापक रूप से मज़बूत किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ODOP से जुड़ाव
संयुक्त पहल के तहत दोनों संगठन अपने कार्यक्रमों में एक जिला एक उत्पाद (ODOP) को एकीकृत करने की दिशा में काम करेंगे। इसके साथ ही, एक समर्पित 'भारत GI' बैनर के अंतर्गत ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर GI समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को शामिल करने में सहयोग दिया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के GI पंजीकृत उत्पादों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, परंतु इनमें से अधिकांश उत्पाद अभी भी संगठित वैश्विक वितरण नेटवर्क से बाहर हैं। ONDC और GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर GI उत्पादों की उपस्थिति इस अंतर को पाटने का प्रयास है।
व्यापार प्रदर्शनियों में GI पवेलियन
दोनों मंत्रालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में समर्पित GI पवेलियन को सह-प्रायोजित करेंगे। इससे GI उत्पादों को घरेलू और वैश्विक खरीदारों के सामने सीधे प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि यह पहल ODOP पारिस्थितिकी तंत्र को भी व्यापक समर्थन देगी, जो पहले से ही ज़िला स्तरीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम कर रहा है।
कारीगरों और उत्पादकों पर असर
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस सहयोग से कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और बेहतर बाज़ार पहुँच को सुगम बनाया जाएगा। भारत के GI पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूती मिलने की आशा व्यक्त की गई है, जिससे उन समुदायों को सीधा लाभ होगा जो पीढ़ियों से पारंपरिक शिल्प और उत्पादन से जुड़े हैं।
आगे चलकर यह देखना होगा कि MOU के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य किस गति से ज़मीन पर उतरते हैं और कितने GI उत्पाद वास्तव में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पहचान बना पाते हैं।