त्योहारी सीजन 2026 में भर्ती 15-20% बढ़ेगी, 2.5 लाख अस्थायी नौकरियाँ सृजित होने का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारत में त्योहारी सीजन 2026 के दौरान भर्ती गतिविधियों में 15 से 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है, जिससे 2 से 2.5 लाख अस्थायी, संविदा और गिग-आधारित रोज़गार के अवसर सृजित हो सकते हैं। यह जानकारी भर्ती समाधान और वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी एनएलबी सर्विसेज की 20 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट में सामने आई है।
किन क्षेत्रों में होगी सबसे अधिक भर्ती
रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, खुदरा व्यापार, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और उपभोक्ता सेवाओं में सबसे अधिक भर्ती होने की संभावना है। पारंपरिक रूप से डिलीवरी, गोदाम प्रबंधन, फील्ड संचालन और आतिथ्य क्षेत्र भर्ती के प्रमुख स्रोत बने रहेंगे।
इसके साथ ही तकनीक-आधारित उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के विस्तार के चलते कई नई भूमिकाओं की माँग भी तेज़ी से उभर रही है — जैसे डार्क स्टोर इन्वेंट्री नियंत्रक, रिटर्न और रिफंड विशेषज्ञ, ग्राहक समाधान अधिकारी, मार्केटप्लेस संचालन विशेषज्ञ, धोखाधड़ी एवं लेनदेन सहायता कर्मी, कैटलॉग प्रबंधन अधिकारी और ऑर्डर प्रबंधन विशेषज्ञ।
भर्ती रणनीति में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति यह उजागर हुई है कि कंपनियाँ अब अंतिम समय की भीड़-भाड़ वाली भर्ती से दूर हट रही हैं। कई कंपनियाँ त्योहारी सीजन शुरू होने से 12 से 14 सप्ताह पहले ही भर्ती प्रक्रिया आरंभ कर देती हैं, ताकि परिचालन संबंधी चुनौतियों से बचा जा सके।
एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया-प्रशांत (APAC) प्रमुख वरुण सचदेवा ने कहा, 'नियोक्ता पहले से अधिक तेज़ी से भर्ती कर रहे हैं, पारंपरिक प्रतिभा केंद्रों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में प्रतिभा तलाश रहे हैं और प्रौद्योगिकी-आधारित, लचीले तथा तुरंत काम के लिए तैयार कर्मचारियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।'
सचदेवा के अनुसार, त्योहारी भर्ती अब केवल मौसमी ज़रूरत नहीं रही — यह कंपनियों के लिए नई प्रतिभाओं की पहचान करने और भविष्य के स्थायी कर्मचारियों का आधार तैयार करने का रणनीतिक अवसर बन चुकी है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका
एक और उल्लेखनीय रुझान यह है कि त्योहारी भर्ती अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट के अनुसार, कुल त्योहारी भर्ती माँग का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने की संभावना है, जहाँ भर्ती 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोज़गार के अवसर अधिक तेज़ी से बढ़ने का अनुमान है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, संगठित खुदरा व्यापार और क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क का विस्तार इन शहरों में भर्ती गतिविधियों को बल दे रहा है।
तकनीक और डिजिटलीकरण का असर
रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार गहरी होती जा रही है। जो नौकरियाँ पहले केवल परिचालन-आधारित मानी जाती थीं, वे अब डेटा, स्वचालन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय के निर्णयों पर अधिक निर्भर हो गई हैं। यह बदलाव संकेत देता है कि त्योहारी भर्ती का प्रभाव केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा — यह दीर्घकालिक रोज़गार अवसरों में भी रूपांतरित हो सकता है।