27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सरकार ने आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए 100 संस्थाओं को जोड़ा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सरकार ने आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए 100 संस्थाओं को जोड़ा

सारांश

नई दिल्ली: सरकार ने आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन को प्रोत्साहित करने के लिए 100 संस्थाओं को जोड़ने की जानकारी दी है। यह उपलब्धि मात्र तीन महीनों में प्राप्त की गई है, जो डिजिटल पहचान सत्यापन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

मुख्य बातें

आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को 100 संस्थाओं ने अपनाया है।
यह प्रणाली कागज रहित और सुरक्षित है।
यूजर अपने डेटा पर पूर्ण नियंत्रण रख सकते हैं।
सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आएगी।
यह डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता देती है।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने सोमवार को जानकारी दी है कि आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन को प्रोत्साहित करने के लिए अब तक लगभग 100 संस्थाओं को 'ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (ओवीएसई)' के रूप में जोड़ा गया है। यह सफलता इस प्रणाली के लॉन्च के मात्र तीन महीनों के भीतर हासिल की गई है।

यह मील का पत्थर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा प्राप्त किया गया है, जो कि सुरक्षित, कागज रहित और यूजर की सहमति पर आधारित पहचान सत्यापन को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार, इन 100 संस्थाओं में केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग, फिनटेक कंपनियाँ, होटल और इवेंट प्रबंधन फर्में, शिक्षा और परीक्षा से संबंधित संस्थान, और बैकग्राउंड तथा वर्कफोर्स वेरिफिकेशन से जुड़े संगठन शामिल हैं।

मंत्रालय ने बताया कि इन संस्थाओं के जुड़ने से सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आएगी, प्रोसेसिंग समय कम होगा, और फिजिकल दस्तावेजों पर निर्भरता में कमी आएगी।

आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए यूजर क्यूआर कोड या डिजिटल साइन किए गए दस्तावेजों के माध्यम से अपनी सीमित और आवश्यक जानकारी साझा कर सकते हैं। इससे यूजर अपने डेटा पर पूर्ण नियंत्रण रखता है और तय कर सकता है कि कौन-सी जानकारी किसके साथ साझा करनी है।

सरकार का कहना है कि यह सिस्टम डेटा सुरक्षा और गोपनीयता (प्राइवेसी) का ध्यान रखते हुए विकसित किया गया है, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था देश में मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह स्केलेबल और सुरक्षित सिस्टम प्रदान करती है।

सरकार का मानना है कि इससे 'ईज ऑफ लिविंग (जीवन की सुगमता)' में सुधार होगा, क्योंकि अब लोगों को तेजी से सेवाएं मिलेंगी, कागजी काम कम होगा और रोजमर्रा के कार्य आसान होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन का यह कदम डिजिटल पहचान सत्यापन के क्षेत्र में एक आवश्यक परिवर्तन है जो सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनायेगा। यह न केवल प्रयोगकर्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि यह देश के डिजिटल ढांचे को भी मजबूत करेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन क्या है?
यह एक प्रक्रिया है जिसमें यूजर अपने आधार डेटा को बिना ऑनलाइन कनेक्शन के सत्यापित कर सकते हैं।
इससे क्या फायदे होंगे?
यह प्रक्रिया सेवाओं की डिलीवरी में तेजी लाएगी और कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करेगी।
क्या यह प्रणाली सुरक्षित है?
हां, यह प्रणाली डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
कितनी संस्थाएँ इसमें शामिल हैं?
अब तक लगभग 100 संस्थाएँ इस प्रक्रिया में शामिल हो चुकी हैं।
इसकी प्रक्रिया कैसे काम करती है?
यूजर क्यूआर कोड या डिजिटल साइन किए गए दस्तावेजों के माध्यम से अपनी सीमित जानकारी साझा कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले