22 जुलाई 2026
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ई-रिक्शा बैटरी दुरुपयोग पर सरकार सख्त: BMS ऐप्स हटाए, साइबर सुरक्षा का राष्ट्रव्यापी ढाँचा तैयार

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ई-रिक्शा बैटरी दुरुपयोग पर सरकार सख्त: BMS ऐप्स हटाए, साइबर सुरक्षा का राष्ट्रव्यापी ढाँचा तैयार

सारांश

ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से बंद करने वाले BMS ऐप्स के दुरुपयोग पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है — ऐप्स हटाए गए और CERT-In, NCCC व NCIIPC पर आधारित राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा ढाँचा पेश किया गया। यह कदम बढ़ते EV क्षेत्र में IoT सुरक्षा की गंभीर ज़रूरत को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सरकार ने ई-रिक्शा BMS मोबाइल ऐप्स के अनधिकृत रिमोट कंट्रोल दुरुपयोग की रिपोर्टों पर संज्ञान लेते हुए इन्हें ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया।
राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में राष्ट्रव्यापी एकीकृत साइबर सुरक्षा ढाँचे की जानकारी दी।
CERT-In को IT अधिनियम 2000 की धारा 70बी के तहत साइबर घटनाओं की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
NCIIPC की स्थापना IT अधिनियम 2000 की धारा 70ए के तहत महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए की गई है।
MeitY की ISEA परियोजना सूचना सुरक्षा में मानव संसाधन सशक्तिकरण और जन-जागरूकता के लिए चल रही है।

केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए बैटरियों के अनधिकृत रिमोट कंट्रोल के दुरुपयोग की रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए संबंधित ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। 22 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई। इसके साथ ही सरकार ने डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी एकीकृत साइबर सुरक्षा ढाँचे की घोषणा भी की है।

मुख्य घटनाक्रम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि सरकार ने डिजिटल इकोसिस्टम में साइबर सुरक्षा और डिजिटल लचीलेपन को मज़बूत करने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय ढाँचा तैयार किया है। यह ऐसे समय में आया है जब ई-रिक्शा चालकों की बैटरियाँ कथित तौर पर तृतीय-पक्ष ऐप्स के माध्यम से दूर से बंद की जा रही थीं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही थी।

गौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बयान के अनुसार, यह एकीकृत ढाँचा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक को केंद्र में रखकर बनाया गया है, जो विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच साइबर सुरक्षा समन्वय सुनिश्चित करेगा।

साइबर सुरक्षा ढाँचे के प्रमुख स्तंभ

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70बी के तहत नामित भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) को साइबर घटनाओं से निपटने की राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। CERT-In द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC) साइबरस्पेस की निरंतर निगरानी कर खतरों का पता लगाता है और संबंधित संगठनों, राज्य सरकारों तथा हितधारक एजेंसियों के साथ सूचना साझा करता है।

इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70ए के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) की स्थापना देश की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए की गई है।

उपभोक्ता संरक्षण और जागरूकता

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 — जिसे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा प्रशासित किया जाता है — को वैश्वीकरण, प्रौद्योगिकी और ई-कॉमर्स के युग में उपभोक्ता संरक्षण ढाँचे को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था। मंत्रालय के अनुसार, साइबर स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता सामग्री कई सरकारी पोर्टलों के माध्यम से प्रसारित की जा रही है।

MeitY द्वारा कार्यान्वित 'सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (ISEA)' परियोजना सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन सशक्तिकरण और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।

आम जनता पर असर

ई-रिक्शा चालक, जो अपनी दैनिक आजीविका के लिए इन वाहनों पर निर्भर हैं, BMS ऐप्स के दुरुपयोग से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अनधिकृत रिमोट एक्सेस के ज़रिए बैटरियाँ बंद किए जाने की घटनाएँ कथित तौर पर सामने आई थीं, जिससे चालकों को बीच रास्ते में वाहन रोकना पड़ रहा था। सरकार की इस कार्रवाई से ऐसे हज़ारों चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह

सरकार का यह कदम भारत के बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में साइबर सुरक्षा की बढ़ती ज़रूरत को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे कनेक्टेड वाहनों की संख्या बढ़ेगी, BMS और IoT उपकरणों की सुरक्षा नीति की प्राथमिकता बनती जाएगी। आने वाले समय में सरकार से EV साइबर सुरक्षा मानकों पर विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को उजागर करती है — भारत के तेज़ी से बढ़ते EV क्षेत्र में IoT उपकरणों के लिए कोई पूर्व-प्रमाणन मानक अब तक क्यों नहीं है? CERT-In और NCCC जैसी संस्थाएँ प्रतिक्रियात्मक (reactive) भूमिका में हैं, जबकि ज़रूरत निवारक (preventive) नियामक ढाँचे की है। लाखों ई-रिक्शा चालक जो अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इस नीतिगत खालीपन की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। जब तक EV साइबर सुरक्षा मानक अनिवार्य और सत्यापन-योग्य नहीं बनाए जाते, ऐसे दुरुपयोग की घटनाएँ नए रूपों में सामने आती रहेंगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-रिक्शा BMS ऐप्स का दुरुपयोग किस तरह हो रहा था?
कथित तौर पर कुछ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मोबाइल ऐप्स का उपयोग ई-रिक्शा की बैटरियों को अनधिकृत रूप से दूर से नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा था। इससे चालकों की बैटरियाँ बिना उनकी सहमति के बंद की जा सकती थीं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही थी।
सरकार ने BMS ऐप्स के दुरुपयोग पर क्या कार्रवाई की?
सरकार ने संबंधित BMS मोबाइल ऐप्लिकेशन को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। यह जानकारी 22 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में दी गई और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में इसकी पुष्टि की।
भारत का नया राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढाँचा क्या है?
यह एक राष्ट्रव्यापी एकीकृत और समन्वित ढाँचा है जिसे MeitY ने तैयार किया है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के तहत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक, CERT-In, NCCC और NCIIPC शामिल हैं, जो मिलकर साइबर खतरों की पहचान, समन्वय और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं।
CERT-In और NCCC की भूमिका क्या है?
CERT-In को IT अधिनियम 2000 की धारा 70बी के तहत साइबर घटनाओं से निपटने की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी बनाया गया है। CERT-In द्वारा संचालित NCCC साइबरस्पेस की निगरानी कर खतरों का पता लगाता है और राज्य सरकारों व संबंधित संगठनों के साथ सूचना साझा करता है।
ISEA परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (ISEA)' परियोजना MeitY द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। इसका उद्देश्य सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधनों को सशक्त बनाना और आम नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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