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ई-रिक्शा रिमोट शटडाउन: बीएटी-बीएमएस समेत तीन चीनी ऐप पर केंद्र सरकार का बैन

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ई-रिक्शा रिमोट शटडाउन: बीएटी-बीएमएस समेत तीन चीनी ऐप पर केंद्र सरकार का बैन

सारांश

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खुलासा किया कि चीनी ऐप बीएटी-बीएमएस के ज़रिए 10-20 मीटर की दूरी से ई-रिक्शा को बंद किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने तीन ऐप पर बैन लगाया — लेकिन असली सवाल यह है कि लाखों ई-रिक्शा अभी भी बिना पासवर्ड सुरक्षा के चल रहे हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीएटी-बीएमएस , लॉसिगी और एपोच आई-आयन ऐप को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया।
बीएटी-बीएमएस को चीन की शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने बनाया था; यह 10-20 मीटर की ब्लूटूथ रेंज में ई-रिक्शा बंद करने में सक्षम था।
खतरा केवल उन ई-रिक्शा को है जिनमें ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी है और पासवर्ड सुरक्षा का अभाव है।
लेड-एसिड बैटरी वाले और मज़बूत एन्क्रिप्शन युक्त नए सिस्टम इस खतरे से अप्रभावित हैं।
एक ई-रिक्शा चालक के अनुसार, बैटरी अनलॉक करने के लिए मैकेनिक ने ₹300 लिए।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को बीएटी-बीएमएस, लॉसिगी और एपोच आई-आयन ऐप को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो के बाद हुई जिनमें दिखाया गया था कि इन ऐप के ज़रिए ई-रिक्शा को दूर बैठकर ही बंद किया जा सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस खामी को सार्वजनिक परिवहन के लिए गंभीर खतरा बताया है।

ऐप कैसे काम करता था

बीएटी-बीएमएस को चीन की कंपनी शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी के प्रबंधन के लिए तैयार किया था। यह ऐप बैटरी के वोल्टेज, करंट, तापमान, चार्जिंग साइकिल और समग्र स्वास्थ्य को रियल-टाइम में मॉनिटर करने की सुविधा देता था। इसके साथ ही, यह बैटरी के डिस्चार्ज फीचर्स को चालू या बंद करने की क्षमता भी रखता था — जिसका दुरुपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा 10 से 20 मीटर की ब्लूटूथ रेंज में किया जा सकता था।

भारत में कई ई-रिक्शा निर्माता ब्लूटूथ-सक्षम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) वाली लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग करते हैं। इनमें से अनेक सिस्टम बिना पासवर्ड सुरक्षा के या फैक्टरी-डिफॉल्ट सेटिंग्स के साथ ही काम करते हैं, जिससे ये सार्वजनिक रूप से सुलभ ब्लूटूथ नेटवर्क पर उजागर हो जाते हैं।

ड्राइवरों का अनुभव

एक ई-रिक्शा चालक ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी गाड़ी अचानक बंद हो गई। उन्होंने कहा, 'शुरू में हमें लगा कि गाड़ी में कोई खराबी है और हम उसे मैकेनिक के पास ले गए। जांच के बाद पता चला कि कोई मैकेनिकल समस्या नहीं थी — किसी ने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके बैटरी बंद कर दी थी।' मैकेनिक ने मोबाइल ऐप के ज़रिए बैटरी को पुनः सक्रिय करने के लिए लगभग ₹300 लिए।

चालक ने बताया कि यात्रियों को ले जाते समय यह समस्या दोबारा भी हुई। उन्होंने कहा, 'जब मैं सड़क पर था, किसी ने फिर से बंद कर दिया। हमें नहीं पता कि ऐसा कौन कर रहा है। अगर बैटरी लॉक हो जाती है, तो उसे सिर्फ उसी ऐप से अनलॉक किया जा सकता है — हम ड्राइवर हैं, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नहीं।'

कौन-सी गाड़ियाँ हैं खतरे में

यह साइबर खतरा केवल उन्हीं वाहनों को प्रभावित करता है जिनमें दो शर्तें एक साथ पूरी होती हैं — ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग और पासवर्ड सुरक्षा या प्रमाणीकरण का अभाव। भारत में अभी भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा लेड-एसिड बैटरी पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ-सक्षम बीएमएस नहीं होता — इसलिए वे इस खतरे से सुरक्षित हैं।

इसी प्रकार, जो नए लिथियम-आयन सिस्टम मज़बूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन या प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, उन्हें सामान्य बैटरी प्रबंधन ऐप के ज़रिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। यात्री कारों और अधिकांश ब्रांडेड इलेक्ट्रिक वाहनों में साइबर-सुरक्षा की कई परतें और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली होती है, जो इस प्रकार के अनधिकृत प्रवेश को बेहद कठिन बना देती है।

सरकार की कार्रवाई

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीएटी-बीएमएस, लॉसिगी और एपोच आई-आयन — तीनों ऐप को दोनों प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। यह कदम सुरक्षा चिंताओं और दुरुपयोग की संभावनाओं के मद्देनज़र उठाया गया है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई उस समय हुई जब सोशल मीडिया पर रिमोट शटडाउन के वीडियो व्यापक रूप से वायरल हो चुके थे।

आगे की राह

विशेषज्ञों का कहना है कि ई-रिक्शा निर्माताओं को तत्काल अपने बीएमएस सिस्टम में मज़बूत पासवर्ड और एन्क्रिप्शन लागू करना चाहिए। यह मामला भारत के इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में साइबर-सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करता है — एक ऐसा क्षेत्र जो तेज़ी से विस्तार पा रहा है लेकिन नियामक ढाँचा अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ तीन ऐप हटाना एक अस्थायी पट्टी से ज़्यादा कुछ नहीं। असली सवाल यह है कि इलेक्ट्रिक वाहन नीति में साइबर-सुरक्षा अनिवार्यता कब आएगी — और तब तक कितने ड्राइवर ₹300 की 'मरम्मत' का शिकार बनते रहेंगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएटी-बीएमएस ऐप क्या है और इसे क्यों बैन किया गया?
बीएटी-बीएमएस चीन की शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी का बनाया ब्लूटूथ-आधारित बैटरी मैनेजमेंट ऐप है। इसे इसलिए बैन किया गया क्योंकि इसके ज़रिए 10-20 मीटर की दूरी से बिना पासवर्ड-सुरक्षित ई-रिक्शा को दूर से बंद किया जा सकता था, जो सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था।
कौन-से ई-रिक्शा इस खतरे से प्रभावित हैं?
केवल वे ई-रिक्शा प्रभावित हैं जिनमें ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम-आयन बैटरी है और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में पासवर्ड या प्रमाणीकरण की कमी है। लेड-एसिड बैटरी वाले और मज़बूत एन्क्रिप्शन युक्त नए सिस्टम इस खतरे से सुरक्षित हैं।
सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीएटी-बीएमएस, लॉसिगी और एपोच आई-आयन — तीनों ऐप को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। यह आदेश सुरक्षा चिंताओं और दुरुपयोग की संभावनाओं के आधार पर जारी किया गया।
क्या यात्री कारें और ब्रांडेड इलेक्ट्रिक वाहन भी इससे प्रभावित हो सकते हैं?
नहीं। यात्री कारों और अधिकांश ब्रांडेड इलेक्ट्रिक वाहनों में साइबर-सुरक्षा की कई परतें और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली होती है, जो इस प्रकार के अनधिकृत ब्लूटूथ एक्सेस को बेहद कठिन बना देती है।
ई-रिक्शा चालक इस समस्या से कैसे बच सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, ई-रिक्शा निर्माताओं को बीएमएस सिस्टम में मज़बूत पासवर्ड और एन्क्रिप्शन तत्काल लागू करना चाहिए। चालकों को अपने वाहन के बैटरी सिस्टम की सुरक्षा सेटिंग्स की जाँच अधिकृत मैकेनिक से करानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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