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ग्रीनलाइन मोबिलिटी ने टाटा स्टील संग एलएनजी फ्लीट साझेदारी बढ़ाई, ओडिशा के मेरामांडाली प्लांट में तैनाती

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ग्रीनलाइन मोबिलिटी ने टाटा स्टील संग एलएनजी फ्लीट साझेदारी बढ़ाई, ओडिशा के मेरामांडाली प्लांट में तैनाती

सारांश

ग्रीनलाइन मोबिलिटी ने ओडिशा के मेरामांडाली में टाटा स्टील के साथ एलएनजी ट्रक तैनाती का विस्तार किया। 9 करोड़ किमी की दूरी और 24,000 टन CO₂ बचत के बाद, कंपनी अब 10,000 ट्रकों और 100 ईंधन स्टेशनों के नेटवर्क से सालाना 10 लाख टन उत्सर्जन घटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

ग्रीनलाइन मोबिलिटी ने 22 मई 2026 को ओडिशा के मेरामांडाली प्लांट में टाटा स्टील के साथ एलएनजी ट्रक साझेदारी का विस्तार किया।
कंपनी का बेड़ा अब 1,000 से अधिक एलएनजी और ईवी ट्रकों के साथ 9 करोड़ किमी से अधिक की दूरी तय कर चुका है।
अब तक 24,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है।
एलएनजी ट्रक डीजल की तुलना में 40% कम CO₂ उत्सर्जन करते हैं; एकल टैंक पर 1,200 किमी और दोहरे टैंक पर 2,400 किमी की रेंज।
विस्तार योजना में 10,000 एलएनजी/ईवी ट्रक , 100 ईंधन स्टेशन और प्रति वर्ष 10 लाख टन उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य।

ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने 22 मई 2026 को ओडिशा स्थित टाटा स्टील के मेरामांडाली प्लांट में एलएनजी-संचालित ट्रकों की नई खेप को हरी झंडी दिखाकर दोनों संगठनों के बीच दीर्घकालिक हरित लॉजिस्टिक्स साझेदारी को और मज़बूत किया। एस्सार ग्रुप की इस ग्रीन लॉजिस्टिक्स कंपनी का यह कदम भारत में लंबी दूरी की सड़क माल ढुलाई को कार्बन मुक्त करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

मुख्य घटनाक्रम

यह तैनाती भारत में कई परिचालन स्थलों पर जारी सहयोग का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन विकल्पों को बड़े पैमाने पर अपनाना और बड़े माल ढुलाई कार्यों से कार्बन उत्सर्जन घटाना है। ग्रीनलाइन वर्तमान में प्रमुख माल ढुलाई मार्गों पर 1,000 से अधिक एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) ट्रकों का संचालन करती है, जो इस्पात, सीमेंट, खनन, एफएमसीजी और रसायन जैसे क्षेत्रों को सेवाएँ देते हैं।

कंपनी का बढ़ता बेड़ा अब तक 9 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका है, जिससे 24,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है। यह आँकड़ा भारत के हरित परिवहन क्षेत्र में किसी एकल लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर की उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड के सीईओ मधुर तनेजा ने कहा, 'इस तैनाती के माध्यम से टाटा स्टील के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने में हमें खुशी हो रही है। ईंधन पर निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, भारत में लंबी दूरी की लॉजिस्टिक्स के लिए एलएनजी एक व्यावहारिक और व्यापक विकल्प के रूप में उभर रहा है।'

टाटा स्टील के सप्लाई चेन उपाध्यक्ष प्रभात कुमार ने कहा, 'यह सब अकेले संभव नहीं है। अगर टाटा स्टील अपने वाहनों और लॉजिस्टिक्स को हरित बनाने का फैसला करता है, तो यह ग्रीनलाइन जैसे हमारे साझेदारों के समर्थन और समन्वय के बिना संभव नहीं होगा।'

परिचालन क्षमता और पर्यावरणीय लाभ

परिचालन की दृष्टि से, ग्रीनलाइन के एलएनजी-चालित ट्रक एक बार ईंधन भरने पर 1,200 किमी तक और दोहरे टैंक के साथ 2,400 किमी तक की ड्राइविंग रेंज प्रदान करते हैं। पारंपरिक डीजल ट्रकों की तुलना में ये ट्रक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 40 प्रतिशत तक कम करते हैं, साथ ही सूक्ष्म कणों, SOx, NOx और अन्य कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाते हैं।

गौरतलब है कि यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब भारत सरकार परिवहन क्षेत्र में उत्सर्जन घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधन नीतियों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

विस्तार योजना और आगे की राह

स्वच्छ माल ढुलाई के अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण के तहत, ग्रीनलाइन 10,000 से अधिक एलएनजी और ईवी ट्रक तैनात करने की योजना बना रही है। इन्हें 100 एलएनजी ईंधन भरने वाले स्टेशनों, ईवी चार्जिंग हब और बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क से समर्थन मिलेगा। कंपनी का लक्ष्य इस विस्तार के ज़रिये प्रति वर्ष 10 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करना है। जैसे-जैसे अधिक उद्योग स्वच्छ परिवहन समाधानों को अपनाएँगे, भारत के ग्रीन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बदलाव की गति और तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा बुनियादी ढाँचे के विस्तार की है — 100 ईंधन स्टेशनों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क अभी भी एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का परिवहन क्षेत्र कुल कार्बन उत्सर्जन में बड़ा हिस्सेदार है और नीतिगत प्रोत्साहन अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं। 9 करोड़ किमी और 24,000 टन CO₂ बचत के आँकड़े प्रभावशाली हैं, पर 10,000 ट्रकों के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निवेश, नीति-निरंतरता और उद्योग की व्यापक भागीदारी — तीनों एक साथ चाहिए।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीनलाइन मोबिलिटी और टाटा स्टील की एलएनजी साझेदारी क्या है?
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड और टाटा स्टील के बीच एक दीर्घकालिक हरित लॉजिस्टिक्स सहयोग है, जिसके तहत ओडिशा के मेरामांडाली प्लांट सहित भारत के कई स्थलों पर एलएनजी-संचालित ट्रक तैनात किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य लंबी दूरी की माल ढुलाई से कार्बन उत्सर्जन घटाना है।
ग्रीनलाइन के एलएनजी ट्रक डीजल ट्रकों से कितने बेहतर हैं?
ग्रीनलाइन के एलएनजी ट्रक पारंपरिक डीजल ट्रकों की तुलना में CO₂ उत्सर्जन को 40 प्रतिशत तक कम करते हैं। साथ ही ये सूक्ष्म कण, SOx और NOx उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाते हैं और एकल टैंक पर 1,200 किमी तक की रेंज देते हैं।
ग्रीनलाइन की भविष्य की विस्तार योजना क्या है?
कंपनी 10,000 से अधिक एलएनजी और ईवी ट्रक तैनात करने की योजना बना रही है, जिन्हें 100 एलएनजी ईंधन स्टेशनों, ईवी चार्जिंग हब और बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का समर्थन मिलेगा। इस विस्तार से प्रति वर्ष 10 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य है।
ग्रीनलाइन अब तक कितना कार्बन उत्सर्जन कम कर चुकी है?
ग्रीनलाइन का बेड़ा अब तक 9 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका है, जिससे 24,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है। कंपनी वर्तमान में 1,000 से अधिक एलएनजी और ईवी ट्रकों का संचालन करती है।
एलएनजी ट्रक भारत की लॉजिस्टिक्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ईंधन पर निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के बीच एलएनजी लंबी दूरी की माल ढुलाई के लिए एक व्यावहारिक और कम-उत्सर्जन विकल्प के रूप में उभर रहा है। यह इस्पात, सीमेंट, खनन और एफएमसीजी जैसे भारी उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला को हरित बनाने में सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
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