निर्यातकों को राहत: सरकार ने RELIEF स्कीम और RoDTEP की समय-सीमा बढ़ाई, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर लॉजिस्टिक्स अनिश्चितताओं के चलते RELIEF स्कीम और आरओडीटीईपी (RoDTEP) योजना की समय-सीमा विस्तारित की गई है। यह निर्णय उन भारतीय निर्यातकों को सीधी राहत देता है जो बढ़ी हुई माल-ढुलाई लागत, युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम और अवरुद्ध मैरीटाइम कॉरिडोर की मार झेल रहे हैं।
RELIEF स्कीम: क्या है और क्या बदला
RELIEF — यानी Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation — स्कीम को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत 19 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया था। इसका मकसद मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में रुकावट के कारण प्रभावित निर्यातकों को बीमा कवर और लागत समर्थन देना था। अब वाणिज्य विभाग ने इसके दूसरे हिस्से की समय-सीमा बढ़ा दी है।
इस योजना के तहत निर्यातकों को प्रभावित क्षेत्रों में अगले शिपमेंट के लिए ईसीजीसी (ECGC) कवर लेने पर 95 प्रतिशत रिस्क कवर मिलता है। यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई स्टैंड-अलोन पॉलिसी या होल टर्नओवर पॉलिसी के लिए उपलब्ध है। योग्य कार्गो में फुल कंटेनर लोड (FCL), लेस-दैन-कंटेनर लोड (LCL) और रीफर कंटेनर शामिल हैं, जबकि ऊर्जा शिपमेंट इस दायरे से बाहर हैं।
गौरतलब है कि योजना के तहत प्रीमियम को रुकावट से पहले के स्तर से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा — यह प्रावधान निर्यातकों को लागत-अनिश्चितता से बचाने की दृष्टि से अहम है।
RoDTEP विस्तार: 31 दिसंबर तक जारी रहेगी छूट
सरकार ने आरओडीटीईपी (RoDTEP — Remission of Duties and Taxes on Exported Products) स्कीम को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। यह योजना निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों और लेवी का रिफंड देती है, जिन पर पहले छूट नहीं मिली थी। इसमें पूर्ववर्ती चरणों के अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर को लागू अपेंडिक्स 4R और अपेंडिक्स 4RE में उल्लिखित मौजूदा आरओडीटीईपी दरें और मूल्य सीमाएँ (वैल्यू कैप) इस विस्तारित अवधि में बिना किसी बदलाव के लागू रहेंगी। यह स्कीम डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स, स्पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स के निर्यात पर लागू होगी।
आम निर्यातकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास शिपिंग मार्गों पर जोखिम बना हुआ है, जिससे यूरोप और अफ्रीका की ओर जाने वाले भारतीय कार्गो की लागत और समयसीमा प्रभावित हो रही है। छोटे और मझोले निर्यातक, जो पहले से ही कमज़ोर मार्जिन पर काम करते हैं, बीमा प्रीमियम में वृद्धि की सबसे ज़्यादा मार झेल रहे हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय निर्यातकों के लिए समान अवसर (level playing field) सुनिश्चित करना है।
आगे की राह
RoDTEP की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तय है, लेकिन पश्चिम एशिया में स्थिति लंबी खिंचने पर आगे और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम के सामान्य होने तक इस तरह के समर्थन की निरंतरता ज़रूरी है। अगले कुछ महीनों में निर्यात के आँकड़े यह तय करेंगे कि इन उपायों का व्यावहारिक प्रभाव किस हद तक सार्थक रहा।