2 अक्टूबर 2026
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निर्यातकों को राहत: सरकार ने RELIEF स्कीम और RoDTEP की समय-सीमा बढ़ाई, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बड़ा कदम

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निर्यातकों को राहत: सरकार ने RELIEF स्कीम और RoDTEP की समय-सीमा बढ़ाई, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बड़ा कदम

सारांश

पश्चिम एशिया में समुद्री मार्ग बाधित हैं और बीमा लागत आसमान पर है — ऐसे में सरकार ने RELIEF स्कीम और RoDTEP दोनों की समय-सीमा बढ़ाकर निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। 95% ECGC कवर और अपरिवर्तित टैक्स रिफंड दरें भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने का प्रयास हैं।

मुख्य बातें

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को RELIEF स्कीम के दूसरे हिस्से की समय-सीमा बढ़ाने की घोषणा की।
RELIEF स्कीम निर्यातकों को प्रभावित क्षेत्रों में शिपमेंट के लिए ECGC के तहत 95% रिस्क कवर देती है।
योग्य कार्गो में FCL, LCL और रीफर कंटेनर शामिल; ऊर्जा शिपमेंट बाहर।
RoDTEP स्कीम को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया गया; मौजूदा दरें और वैल्यू कैप अपरिवर्तित।
स्कीम का लाभ डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, SEZ यूनिट्स, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स और एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स को मिलेगा।
उद्देश्य: पश्चिम एशिया के मैरीटाइम संकट के बीच ट्रेड फ्लो बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर लॉजिस्टिक्स अनिश्चितताओं के चलते RELIEF स्कीम और आरओडीटीईपी (RoDTEP) योजना की समय-सीमा विस्तारित की गई है। यह निर्णय उन भारतीय निर्यातकों को सीधी राहत देता है जो बढ़ी हुई माल-ढुलाई लागत, युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम और अवरुद्ध मैरीटाइम कॉरिडोर की मार झेल रहे हैं।

RELIEF स्कीम: क्या है और क्या बदला

RELIEF — यानी Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation — स्कीम को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत 19 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया था। इसका मकसद मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में रुकावट के कारण प्रभावित निर्यातकों को बीमा कवर और लागत समर्थन देना था। अब वाणिज्य विभाग ने इसके दूसरे हिस्से की समय-सीमा बढ़ा दी है।

इस योजना के तहत निर्यातकों को प्रभावित क्षेत्रों में अगले शिपमेंट के लिए ईसीजीसी (ECGC) कवर लेने पर 95 प्रतिशत रिस्क कवर मिलता है। यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई स्टैंड-अलोन पॉलिसी या होल टर्नओवर पॉलिसी के लिए उपलब्ध है। योग्य कार्गो में फुल कंटेनर लोड (FCL), लेस-दैन-कंटेनर लोड (LCL) और रीफर कंटेनर शामिल हैं, जबकि ऊर्जा शिपमेंट इस दायरे से बाहर हैं।

गौरतलब है कि योजना के तहत प्रीमियम को रुकावट से पहले के स्तर से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा — यह प्रावधान निर्यातकों को लागत-अनिश्चितता से बचाने की दृष्टि से अहम है।

RoDTEP विस्तार: 31 दिसंबर तक जारी रहेगी छूट

सरकार ने आरओडीटीईपी (RoDTEP — Remission of Duties and Taxes on Exported Products) स्कीम को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। यह योजना निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों और लेवी का रिफंड देती है, जिन पर पहले छूट नहीं मिली थी। इसमें पूर्ववर्ती चरणों के अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर को लागू अपेंडिक्स 4R और अपेंडिक्स 4RE में उल्लिखित मौजूदा आरओडीटीईपी दरें और मूल्य सीमाएँ (वैल्यू कैप) इस विस्तारित अवधि में बिना किसी बदलाव के लागू रहेंगी। यह स्कीम डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स, स्पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स के निर्यात पर लागू होगी।

आम निर्यातकों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास शिपिंग मार्गों पर जोखिम बना हुआ है, जिससे यूरोप और अफ्रीका की ओर जाने वाले भारतीय कार्गो की लागत और समयसीमा प्रभावित हो रही है। छोटे और मझोले निर्यातक, जो पहले से ही कमज़ोर मार्जिन पर काम करते हैं, बीमा प्रीमियम में वृद्धि की सबसे ज़्यादा मार झेल रहे हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय निर्यातकों के लिए समान अवसर (level playing field) सुनिश्चित करना है।

आगे की राह

RoDTEP की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तय है, लेकिन पश्चिम एशिया में स्थिति लंबी खिंचने पर आगे और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम के सामान्य होने तक इस तरह के समर्थन की निरंतरता ज़रूरी है। अगले कुछ महीनों में निर्यात के आँकड़े यह तय करेंगे कि इन उपायों का व्यावहारिक प्रभाव किस हद तक सार्थक रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल समस्या — पश्चिम एशिया में अस्थिर समुद्री मार्गों — का समाधान नहीं है। सवाल यह है कि अगर भू-राजनीतिक संकट लंबा खिंचा, तो क्या ये अस्थायी विस्तार स्थायी नीतिगत ढाँचे में बदलेंगे? भारत का निर्यात लक्ष्य 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर का है, जो लॉजिस्टिक्स लागत और बीमा असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दों के बिना हल हुए हासिल नहीं होगा। तात्कालिक राहत की जगह दीर्घकालिक रणनीति की ज़रूरत पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RELIEF स्कीम क्या है और इसे क्यों बढ़ाया गया?
RELIEF — यानी Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation — स्कीम 19 मार्च 2026 को शुरू की गई थी, ताकि पश्चिम एशिया के मैरीटाइम कॉरिडोर में रुकावट से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सके। भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स अनिश्चितता जारी रहने के कारण इसके दूसरे हिस्से की समय-सीमा बढ़ाई गई है।
RoDTEP स्कीम कब तक बढ़ाई गई है और इसका फायदा किसे मिलेगा?
RoDTEP स्कीम को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। इसका लाभ डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स, स्पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स को मिलेगा।
RELIEF स्कीम के तहत ECGC कवर कितना मिलता है?
RELIEF स्कीम के दूसरे हिस्से के तहत निर्यातकों को ECGC (Export Credit Guarantee Corporation) के ज़रिए प्रभावित क्षेत्रों में अगले शिपमेंट पर 95 प्रतिशत रिस्क कवर मिलता है। यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई स्टैंड-अलोन या होल टर्नओवर पॉलिसी के लिए उपलब्ध है।
RELIEF स्कीम में कौन-से कार्गो शामिल हैं और कौन-से नहीं?
RELIEF स्कीम में फुल कंटेनर लोड (FCL), लेस-दैन-कंटेनर लोड (LCL) और रीफर कंटेनर योग्य कार्गो के रूप में शामिल हैं। हालाँकि, ऊर्जा शिपमेंट इस योजना के दायरे से बाहर हैं।
RoDTEP स्कीम क्या रिफंड देती है?
RoDTEP स्कीम निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों और लेवी का रिफंड देती है जिन पर पहले कोई छूट नहीं दी गई थी। इसमें पूर्ववर्ती चरणों के अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं, ताकि निर्यातकों को कर-मुक्त निर्यात का लाभ मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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