EAC-PM बैठक में PM मोदी ने की आर्थिक मजबूती पर चर्चा, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक चुनौतियों की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जून 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की बैठक की अध्यक्षता की। अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में देश की आर्थिक विकास गति को बनाए रखने, व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और पश्चिम एशिया संकट के बीच उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक का केंद्रीय एजेंडा
बैठक में उस समय आर्थिक विकास को और गति देने के उपायों पर मंथन किया गया, जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कमज़ोर वैश्विक माँग जैसी बाधाओं से जूझ रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, परिषद के सदस्यों और प्रधानमंत्री ने कठिन बाह्य परिस्थितियों के बावजूद भारत की विकास दर को टिकाऊ बनाए रखने के लिए ज़रूरी नीतिगत कदमों पर अपने विचार साझा किए।
शासन सुधार और कारोबारी सुगमता
विचार-विमर्श का एक अहम हिस्सा नागरिकों के जीवन को सरल बनाने और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) को बेहतर करने से जुड़े सुधारों पर केंद्रित रहा। शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, अनुपालन संबंधी बोझ घटाना और निवेश तथा उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना — ये तीन प्राथमिकताएँ चर्चा के केंद्र में रहीं।
पश्चिम एशिया संकट का आर्थिक असर
बैठक का एक महत्त्वपूर्ण खंड पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा को समर्पित रहा। परिषद ने ऊर्जा बाज़ारों, व्यापार मार्गों और व्यापक आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चिंताओं का आकलन किया। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिये पूरा करता है, इसलिए क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने से कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह पर सीधा असर पड़ सकता है।
भारत की आर्थिक स्थिति: आँकड़े क्या कहते हैं
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए हुए है। अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए यह 7.7% दर्ज की गई। यह प्रदर्शन मुख्यतः कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों की मज़बूत वृद्धि पर टिका है।
EAC-PM की भूमिका और आगे की राह
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में प्著名 अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ शामिल हैं, जो आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों पर सरकार को स्वतंत्र एवं विशेषज्ञ सुझाव देते हैं। परिषद दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं और उभरते आर्थिक रुझानों पर सरकार को सचेत करने का काम करती है। यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार बाह्य दबावों के बीच भी अपनी नीतिगत तैयारी को पैना बनाए रखने में जुटी है।