केंद्र ने 'रिलीफ' योजना 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई, खाड़ी संकट में निर्यातकों को 95% बीमा कवर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के वाणिज्य विभाग ने 26 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर 'एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM)' के अंतर्गत संचालित 'रिलीफ' (Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना के घटक-II की समयसीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने की घोषणा की। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और समुद्री मार्गों पर उसके गहराते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया, ताकि भारतीय निर्यातकों को असाधारण रूप से बढ़ती माल ढुलाई लागत और युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम से राहत मिल सके।
रिलीफ योजना क्या है और घटक-II में क्या शामिल है
19 मार्च 2026 को शुरू की गई रिलीफ योजना का मूल उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र और व्यापक पश्चिम एशियाई समुद्री गलियारे में व्यवधानों के चलते संकट में फँसे भारतीय निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा देना है। इसके घटक-II के तहत निर्यातकों को भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) का बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिसमें 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज उपलब्ध है।
यह लाभ 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई व्यक्तिगत पॉलिसियों और समग्र कारोबार (होल टर्नओवर) पॉलिसियों पर लागू होता है। पात्र निर्यातकों को पात्रता अवधि के दौरान बीमा प्रीमियम में व्यवधान-पूर्व स्तर की तुलना में हुई बढ़ोतरी से संरक्षण मिलता है।
कवर की जाने वाली माल श्रेणियाँ
इस योजना के दायरे में पूर्ण कंटेनर लोड (FCL), आंशिक कंटेनर लोड (LCL) और रेफ्रिजरेटेड (तापमान-नियंत्रित) कंटेनर शामिल हैं। हालाँकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। गौरतलब है कि यह वर्गीकरण उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है जहाँ भारत का निर्यात संवेदनशील है, जैसे कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और उपभोक्ता वस्तुएँ।
आवेदन की प्रक्रिया
रिलीफ योजना का लाभ लेने के इच्छुक निर्यातकों को ECGC के ग्राहक पोर्टल के माध्यम से दावे और सहायक दस्तावेज़ जमा करने होंगे। यूजर आईडी बनाने, निर्यातक के रूप में पंजीकरण करने और दावे दर्ज करने की प्रक्रिया संबंधी विस्तृत मार्गदर्शन ECGC के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध विशेष वीडियो ट्यूटोरियल के ज़रिये प्राप्त किया जा सकता है।
पश्चिम एशिया संकट और समुद्री जोखिम की पृष्ठभूमि
मध्य पूर्व में तनाव के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमलों में जहाज़ों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा तटीय क्षेत्र पर कब्ज़े की कोशिश के साथ शुरू हुए हमलों के बाद युद्ध का खतरा लाल सागर क्षेत्र तक फैल गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का खाड़ी देशों को निर्यात उसके कुल निर्यात के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की राह
बयान में कहा गया कि रिलीफ योजना की अवधि बढ़ाना निर्यात क्षेत्र की जोखिम-प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने, व्यापार प्रवाह बनाए रखने और लगातार बनी भू-राजनीतिक तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो आने वाले महीनों में इस योजना का दायरा और विस्तार पाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।