जीएसटीएटी में अपील की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तक बढ़ी, पोर्टल पर तकनीकी दबाव बना कारण
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 30 जून 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) में अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है। जीएसटीएटी पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक के कारण आई तकनीकी अड़चनें इस निर्णय की मुख्य वजह बनीं, जिससे हजारों करदाता समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ हो रहे थे।
क्यों बढ़ानी पड़ी समय-सीमा
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, केवल पिछले 15 दिनों में ही करीब 30,000 अपीलें दाखिल की गईं। कुछ दिनों में तो प्रतिदिन 5,500 तक अपीलें दर्ज हुईं, जिसके चलते पोर्टल पर तकनीकी दबाव असहनीय हो गया। बड़ी संख्या में करदाताओं और हितधारकों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वे अंतिम तारीख के बावजूद पोर्टल पर अपील दाखिल नहीं कर पा रहे।
किन अपीलों पर लागू होगा विस्तार
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह समय-सीमा विस्तार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 112(1) और धारा 112(3) के तहत दायर की जाने वाली अपीलों पर लागू होगा। इससे पहले, 17 सितंबर 2025 को जारी एक अधिसूचना के ज़रिए 30 जून 2026 को अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी, जिसे अब संशोधित किया गया है।
करदाताओं से सरकार की अपील
वित्त मंत्रालय ने करदाताओं से आग्रह किया है कि वे 31 जुलाई 2026 की अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपनी अपील दाखिल करें। मंत्रालय का मानना है कि आखिरी समय में अपील दाखिल करने की प्रवृत्ति ही पोर्टल पर तकनीकी संकट का मूल कारण बनती है। यह ऐसे समय में आया है जब जीएसटी प्रणाली के तहत विवाद निपटान तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की कोशिशें जारी हैं।
जीएसटी और प्रत्यक्ष कर संग्रह में उछाल
इस घोषणा के साथ-साथ कर संग्रह के मोर्चे पर भी सकारात्मक आँकड़े सामने आए हैं। मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 3.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़ रहा, जबकि शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹1.67 लाख करोड़ पर पहुँचा। इसी अवधि में जीएसटी रिफंड भी 2.6 प्रतिशत बढ़कर ₹27,281 करोड़ हो गया।
आयकर विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 14.64 प्रतिशत बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में ₹4.55 लाख करोड़ था। सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह भी इसी अवधि में 12.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹6.10 लाख करोड़ दर्ज किया गया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि जीएसटीएटी देश में अप्रत्यक्ष कर विवादों के निपटान के लिए स्थापित एक महत्वपूर्ण न्यायिक संस्था है। अपीलों की इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि करदाताओं में जीएसटी संबंधी विवाद अभी भी बड़े पैमाने पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को पोर्टल की तकनीकी क्षमता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।