फार्मा मार्केटिंग पर UCPMP 2024: डॉक्टरों को गिफ्ट-नकद देने पर पूर्ण प्रतिबंध, सरकार ने लागू किए सख्त नियम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP), 2024 के तहत दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों पर कड़े नैतिक प्रतिबंध लागू किए हैं, जिनमें डॉक्टरों या उनके परिवार को गिफ्ट, नकद लाभ या हॉस्पिटैलिटी सुविधाएँ देने पर पूर्ण रोक शामिल है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 25 जुलाई 2025 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। यह कोड 12 अप्रैल 2024 को अधिसूचित किया गया था और इसने UCPMP, 2015 की जगह ली।
मुख्य घटनाक्रम
फार्मास्युटिकल्स विभाग ने UCPMP, 2024 को अधिसूचित करने के बाद सितंबर 2025 में इसमें संशोधन भी किए। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक दवा कंपनी को एथिक्स कमेटी फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (ECPMP) का गठन करना अनिवार्य होगा। साथ ही एक एथिक्स ऑफिसर की नियुक्ति भी करनी होगी जो नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा।
शिकायतों के समाधान के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जबकि अपीलों का निपटारा सीधे फार्मास्युटिकल्स विभाग करेगा। कंपनियों को प्रतिवर्ष अपने निर्धारित मार्केटिंग खर्च का विवरण संबंधित सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
डॉक्टरों को लाभ देने पर प्रतिबंध
नए नियमों का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कोई भी दवा कंपनी किसी चिकित्सक, स्वास्थ्य पेशेवर या उनके परिवार के सदस्यों को गिफ्ट, नकद राशि, या किसी भी प्रकार की हॉस्पिटैलिटी नहीं दे सकती। इस पर पूर्ण प्रतिबंध है।
दवा कंपनियाँ अपने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स और अन्य कर्मचारियों की समस्त गतिविधियों के लिए सीधे जिम्मेदार होंगी। कंपनियों को यह स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे UCPMP के सभी प्रावधानों का पालन कर रही हैं।
CME और CPD खर्च का अनिवार्य खुलासा
कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) और कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट (CPD) के तहत आयोजित कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और वर्कशॉप पर किए गए खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। यह कदम उन मामलों की पृष्ठभूमि में महत्त्वपूर्ण है जहाँ विदेशी सम्मेलनों के नाम पर डॉक्टरों को प्रायोजित यात्राएँ दी जाती रही हैं।
गौरतलब है कि स्वतंत्र, रैंडम या जोखिम-आधारित ऑडिट का प्रावधान भी इस कोड में जोड़ा गया है, जिससे नियमों के उल्लंघन की संभावना कम होगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और उद्देश्य
मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में स्पष्ट किया कि इस कोड का मूल उद्देश्य दवा कंपनियों और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच होने वाली प्रचार गतिविधियों को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों, स्वास्थ्य पेशेवरों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सभी प्रचार गतिविधियों के लिए अब स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वैश्विक स्तर पर तेज़ी से विस्तार कर रहा है और दवाओं के अनैतिक प्रचार को लेकर नियामकीय दबाव बढ़ रहा है। आगे चलकर इस कोड के प्रभावी क्रियान्वयन पर उद्योग और चिकित्सा बिरादरी दोनों की निगाहें टिकी रहेंगी।