13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी इनपुट लागत ऊंची रहेगी, खुदरा महंगाई पर दबाव बरकरार: क्रिसिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी इनपुट लागत ऊंची रहेगी, खुदरा महंगाई पर दबाव बरकरार: क्रिसिल

सारांश

हॉर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से राहत की उम्मीद थी, लेकिन क्रिसिल की रिपोर्ट कह रही है — संकट अभी खत्म नहीं हुआ। अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतें 49.3% उछलीं, WPI इनपुट-आउटपुट अनुपात 44 महीनों बाद 1.0 के पार गया, और खुदरा महंगाई भी जल्द ऊपर जाने की आशंका है।

मुख्य बातें

क्रिसिल के अनुसार हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी इनपुट लागत इस वर्ष ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।
WPI आधारित इनपुट-आउटपुट अनुपात अप्रैल 2026 में 1.0 के पार — लगातार 44 महीनों बाद पहली बार।
अप्रैल में कच्चे तेल से जुड़ी कीमतें 49.3% , एल्युमीनियम 20.6% , तांबा 17.3% और गैस 19.1% बढ़ीं।
वित्त वर्ष 2026 में थोक महंगाई दर 0.7% रही, लेकिन आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई (CPI) के ऊपर जाने का अनुमान।
घरेलू मांग मज़बूत होने से मैन्युफैक्चरर्स को कुछ लागत ग्राहकों पर डालने की गुंजाइश, लेकिन उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ने की आशंका।

क्रिसिल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बावजूद इस वर्ष इनपुट लागत ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स पर वित्तीय दबाव जारी रहेगा। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई भी ऊपर की ओर जा सकती है।

इनपुट-आउटपुट अनुपात का खतरनाक संकेत

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित क्रिसिल का इनपुट-आउटपुट अनुपात अप्रैल में 1.0 के पार पहुंच गया — यह स्तर लगातार 44 महीनों से नीचे था। इससे पहले यह अनुपात मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद 1.0 से ऊपर गया था और पाँच महीनों तक उसी स्तर पर टिका रहा था। यह आँकड़ा संकेत देता है कि उत्पादन लागत, बिक्री मूल्यों की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है।

किन सामग्रियों की कीमतें सबसे अधिक बढ़ीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में WPI श्रेणियों के आधार पर तांबे की कीमतों में 17.3%, एल्युमीनियम में 20.6%, कच्चे तेल से संबंधित कीमतों में 49.3% और गैस से जुड़ी कीमतों में 19.1% की वृद्धि दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2026 में भी यह दबाव बना रहा — तांबे की कीमतें औसतन 8.7% बढ़ीं, जो उनके दशकीय औसत 7.8% से अधिक है। एल्युमीनियम में 6.5% की वृद्धि हुई, जो दशकीय औसत 5.4% से ऊपर है।

पश्चिम एशिया संकट का व्यापक असर

क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 'पश्चिम एशिया संघर्ष ने दुनिया को अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट दिया है।' हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से केवल तेल ही नहीं, बल्कि अन्य इनपुट श्रेणियों पर भी असर पड़ा, जबकि निर्माता पहले से ही तांबा और एल्युमीनियम जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियों की बढ़ती लागत से जूझ रहे थे।

ऊर्जा की ऊंची कीमतों — विशेष रूप से कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और खनिज तेलों — के साथ-साथ इस्पात, बुनियादी रसायनों, उर्वरकों, प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर, मानव निर्मित फाइबर और अलौह धातुओं की मैन्युफैक्चरिंग लागत में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

थोक और खुदरा महंगाई पर प्रभाव

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि महंगाई का दबाव सबसे पहले WPI में दिखेगा, लेकिन बढ़ती इनपुट लागत का असर जल्द ही उपभोक्ता कीमतों (CPI) पर भी परिलक्षित होने की आशंका है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2026 में थोक महंगाई दर मात्र 0.7% थी, जबकि गैर-खाद्य पदार्थों में यह 1.1% रही — यानी आधार प्रभाव अब उलटा पड़ सकता है।

आम जनता और उद्योग पर असर

राहत की बात यह है कि घरेलू बाज़ार में मांग अभी मज़बूत बनी हुई है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स को कुछ हद तक बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालने की गुंजाइश मिलती है। हालांकि, यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो उपभोक्ताओं को रोज़मर्रा की वस्तुओं — विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, पैकेज्ड उत्पाद और निर्माण सामग्री — में मूल्य वृद्धि झेलनी पड़ सकती है। आने वाले महीनों में RBI की मौद्रिक नीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि महज़ एक महीने का उछाल। चिंताजनक यह है कि WPI से CPI तक की यात्रा में आमतौर पर दो से तीन तिमाहियों का अंतर होता है — यानी खुदरा महंगाई की असली मार अभी आनी बाकी है, ठीक उस वक्त जब RBI दरें घटाने की दिशा में सोच रहा था।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बाद भी इनपुट लागत क्यों ऊंची रहेगी?
क्रिसिल के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से आपूर्ति श्रृंखला में जो व्यवधान आया, उसका असर तुरंत खत्म नहीं होता। तांबा, एल्युमीनियम, कच्चा तेल और गैस जैसी सामग्रियों की कीमतें पहले से ही दशकीय औसत से ऊपर थीं, और अप्रैल में इनमें और तेज़ उछाल आया।
क्रिसिल का इनपुट-आउटपुट अनुपात 1.0 से ऊपर जाने का क्या मतलब है?
जब यह अनुपात 1.0 से ऊपर होता है, तो इसका अर्थ है कि उत्पादन की लागत, उत्पाद की बिक्री कीमत से अधिक हो रही है — यानी मैन्युफैक्चरर्स का मार्जिन दबाव में आ जाता है। यह स्थिति लगातार 44 महीनों बाद अप्रैल 2026 में दोबारा बनी, इससे पहले मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के समय ऐसा हुआ था।
खुदरा महंगाई (CPI) पर इसका असर कब दिखेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई का दबाव पहले WPI में दिखता है और फिर उपभोक्ता कीमतों पर असर पड़ता है। आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई के ऊपर जाने का अनुमान है, हालांकि घरेलू मांग मज़बूत होने से मैन्युफैक्चरर्स को कुछ राहत मिल सकती है।
वित्त वर्ष 2026 में थोक महंगाई और प्रमुख धातुओं की कीमतें कितनी रहीं?
वित्त वर्ष 2026 में थोक महंगाई दर 0.7% और गैर-खाद्य पदार्थों में 1.1% रही। इसी दौरान तांबे की कीमतें औसतन 8.7% और एल्युमीनियम 6.5% बढ़ीं — दोनों अपने दशकीय औसत से अधिक।
आम उपभोक्ता और उद्योग पर इस महंगाई का क्या असर पड़ेगा?
मैन्युफैक्चरर्स बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, निर्माण सामग्री और पैकेज्ड उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं। उद्योग जगत के लिए मार्जिन दबाव बढ़ेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो तांबा, एल्युमीनियम और ऊर्जा पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले