114 राफेल सौदा वित्त वर्ष 2027 तक होगा अंतिम: वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने 3 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत वित्त वर्ष 2026 27 के अंत तक 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की बहुप्रतीक्षित खरीद को अंतिम रूप दे सकता है, बशर्ते योजनाएँ समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती रहें। नई दिल्ली में वायुसेना दिवस से पूर्व आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया यह बयान भारत के इतिहास के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक के लिए एक महत्वपूर्ण अद्यतन है।
सौदे का विवरण और लागत
इस सौदे की अनुमानित लागत ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि प्रस्तावित खरीद को लेकर कीमत पर बातचीत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा अभी जारी है। यह सौदा फ्रांस के साथ सरकार से सरकार (G2G) समझौते के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
भारत ने फरवरी 2026 में इन 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया मूल योजना शुरू होने के करीब दो दशक बाद अब निर्णायक चरण में पहुँची है।
भारत के पास कुल राफेल बेड़ा
यह सौदा पूरा होने के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल विमान हो जाएंगे। इनमें भारतीय वायुसेना के पास पहले से मौजूद 36 राफेल, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल एम और नए 114 विमान शामिल होंगे। राफेल एम विमानों को विमानवाहक पोतों पर तैनात किया जाना है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना की लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस संदर्भ में कहा कि वायुसेना को आने वाले कुछ वर्षों में हर साल कम से कम 36 से 40 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होगी।
AMCA में देरी और सुखोई 57 का प्रस्ताव
वायुसेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम में देरी होती है, तो भारतीय वायुसेना किसी अन्य लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म की खरीद पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा, "रूस ने हमें सुखोई 57 विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।" यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत विकल्पों को खुला रखना चाहता है।
आत्मनिर्भरता और तकनीकी आधुनिकीकरण
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सितंबर में कहा था कि यह राफेल सौदा भारत में लड़ाकू विमान निर्माण की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित करने में सहायक होगा, जिससे रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण को भी बल मिलेगा। स्वदेशी LCA तेजस मार्क 1A कार्यक्रम राफेल सौदे के समानांतर जारी रहेगा — इसे 'स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल' के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें वैश्विक समकक्षों से बेहतर स्वदेशी रडार और हथियार शामिल किए जाएंगे।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायुसेना के आधुनिकीकरण पर ज़ोर देते हुए कहा, "हमें AI सक्षम बल बनाना होगा।" उन्होंने देश में ही लड़ाकू विमान के इंजन का उत्पादन करने की दिशा में आगे बढ़ने की ज़रूरत पर भी बल दिया।
यह सौदा यदि तय समयसीमा में पूरा होता है, तो यह भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में गुणात्मक बदलाव लाएगा और हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मज़बूत करेगा।