भारत की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को DCGI की मंजूरी, 4 से 60 साल के सभी लोगों को लगेगी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने 20 जुलाई 2026 को देश की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को बाज़ार में उतारने की मंजूरी दी। टेकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया द्वारा विकसित यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के सभी व्यक्तियों को दी जा सकती है — चाहे उन्हें पहले डेंगू हुआ हो या नहीं। यह भारत में डेंगू रोकथाम के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है, क्योंकि देश दुनिया में सर्वाधिक डेंगू मामलों वाले देशों में शुमार है।
क्यूडेंगा की खासियत क्या है
पुरानी डेंगू वैक्सीनों के विपरीत, 'क्यूडेंगा' लगवाने से पहले किसी पूर्व-जाँच की आवश्यकता नहीं होती। इसका अर्थ है कि लोग बिना यह जाने कि उन्हें पहले डेंगू हुआ था या नहीं, सीधे टीकाकरण करा सकते हैं। यह वैक्सीन 0.5 मिलीलीटर के दो सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे) इंजेक्शन के रूप में दी जाती है, जिनके बीच तीन महीने का अंतराल होता है।
टेकेडा के अनुसार, सात वर्षों के दीर्घकालिक फॉलो-अप डेटा से पुष्टि हुई है कि यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप से होने वाले संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति से सुरक्षा प्रदान करती है।
नैदानिक परीक्षणों का आधार
इस मंजूरी को टेकेडा के व्यापक ग्लोबल क्लिनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम का समर्थन प्राप्त है, जिसमें डेंगू-प्रभावित और गैर-प्रभावित देशों के 28,000 से अधिक प्रतिभागियों पर 19 फेज-1, 2 और 3 क्लिनिकल ट्रायल किए गए। भारतीय नियामक ने भारत में संचालित फेज-3 DEN-302 क्लिनिकल ट्रायल के डेटा को भी आधार बनाया, जिसमें 4 से 60 वर्ष की आयु के प्रतिभागियों में वैक्सीन की सुरक्षा और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया गया था।
वैश्विक स्वीकृति और भारत की भूमिका
टेकेडा में इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स के प्रमुख महेंद्र नायक ने कहा, "2022 में लॉन्च होने के बाद से 'क्यूडेंगा' को 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और विश्व भर में इसकी 3.2 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं। यह मंजूरी भारत में डेंगू रोकथाम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।"
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप एक साथ कई राज्यों में सक्रिय हैं, जिससे संक्रमण की गंभीरता और पुनः संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर
टेकेडा के साउथ-ईस्ट एशिया और इंडिया क्लस्टर के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख गो चू बेंग ने कहा कि यह वैक्सीन वायरस के पूर्व संपर्क की परवाह किए बिना चारों सीरोटाइप से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है। उनके अनुसार, "इसकी मंजूरी वेक्टर कंट्रोल, निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ मिलकर डेंगू के विरुद्ध भारत के व्यापक दृष्टिकोण को और सशक्त बनाएगी।"
यह मंजूरी भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ती है। अब यह देखना होगा कि सरकार इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करती है या नहीं, और इसकी कीमत और उपलब्धता आम नागरिकों की पहुँच में होगी या नहीं।