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भारत में क्रिएटर जॉब्स में 919% का उछाल, 2020 से 2026 के बीच हर 100 मार्केटिंग पदों में 1 क्रिएटर रोल

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भारत में क्रिएटर जॉब्स में 919% का उछाल, 2020 से 2026 के बीच हर 100 मार्केटिंग पदों में 1 क्रिएटर रोल

सारांश

भारत में क्रिएटर बनना अब सिर्फ शौक नहीं, करियर है। Indeed की रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2026 के बीच क्रिएटर जॉब पोस्टिंग में 919% का उछाल आया है और माँग अभी भी आपूर्ति से आगे है — यानी टैलेंट गैप एक बड़ा अवसर भी है।

मुख्य बातें

2020 से 2026 की शुरुआत के बीच भारत में क्रिएटर जॉब पोस्टिंग में 919 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
2020 में हर 1,000 मार्केटिंग नौकरियों में 1 क्रिएटर रोल थी; अब यह अनुपात 100 में 1 हो गया है।
मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच 40% क्रिएटर पद इन्फ्लुएंसर, 20% मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव और 17% मार्केटिंग इंटर्न के रूप में वर्गीकृत।
लगभग 60% क्रिएटर भर्तियाँ अब वीडियो प्रोडक्शन, कम्युनिटी मैनेजमेंट और कंटेंट ऑपरेशंस जैसी गैर-इन्फ्लुएंसर भूमिकाओं में।
क्रिएटर भूमिकाओं की माँग आपूर्ति से अधिक होने से टैलेंट गैप एक बड़ी चुनौती बन रहा है।

भारत की क्रिएटर अर्थव्यवस्था तेज़ रफ़्तार से विस्तार पा रही है — 2020 से 2026 की शुरुआत के बीच क्रिएटर से जुड़ी जॉब पोस्टिंग में 919 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जॉब सर्च प्लेटफ़ॉर्म Indeed की 25 मई 2026 को जारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है, जो दर्शाता है कि कंटेंट क्रिएशन अब एक अनौपचारिक गिग से निकलकर कॉर्पोरेट संरचनाओं का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

मुख्य आँकड़े

2020 में प्रत्येक 1,000 मार्केटिंग नौकरियों में से मात्र 1 क्रिएटर रोल होती थी; अब यह अनुपात बदलकर प्रत्येक 100 मार्केटिंग पदों में 1 हो गया है। मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच के आँकड़ों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत क्रिएटर पद इन्फ्लुएंसर भूमिकाओं के रूप में वर्गीकृत किए गए, 20 प्रतिशत मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव और 17 प्रतिशत मार्केटिंग इंटर्न के रूप में।

बदलता भर्ती मॉडल

रिपोर्ट के अनुसार, क्रिएटर से संबंधित लगभग 60 प्रतिशत भर्तियाँ अब पारंपरिक इन्फ्लुएंसर पदों के दायरे से बाहर हो रही हैं। इनमें वीडियो प्रोडक्शन, कम्युनिटी मैनेजमेंट और कंटेंट ऑपरेशंस जैसे पद शामिल हैं, जो कंटेंट के क्रियान्वयन और दर्शक जुड़ाव को सीधे संभालते हैं।

यह बदलाव इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कंपनियाँ एकमुश्त इन्फ्लुएंसर सहयोग की जगह दीर्घकालिक और स्थायी भर्ती मॉडल अपना रही हैं। गौरतलब है कि संगठन अब व्यक्तिगत क्रिएटर्स पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत कंटेंट क्षमताएँ विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

टैलेंट गैप की चुनौती

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इकोसिस्टम में नए इन्फ्लुएंसर टैलेंट का प्रवाह जारी है, लेकिन क्रिएटर भूमिकाओं के लिए संगठनों की माँग आपूर्ति से कहीं अधिक है। इससे एक महत्त्वपूर्ण टैलेंट गैप उभर रहा है, जो इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब हज़ारों युवा भारतीयों ने वर्षों तक वीडियो एडिटिंग और स्टोरीटेलिंग जैसे कौशल विकसित किए हैं। क्रिएटर पदों का औपचारिक निर्धारण इन युवाओं के लिए इकोसिस्टम के भीतर एक नई संरचनागत पहचान ला रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

Indeed India के टैलेंट स्ट्रैटेजी एडवाइजर रोहन सिल्वेस्टर ने कहा, 'जैसे-जैसे क्रिएटर औपचारिक संगठनों में प्रवेश कर रहे हैं, अपेक्षाएँ मापने योग्य परिणामों की ओर बढ़ रही हैं — चाहे वह ऑडियंस एंगेजमेंट हो, कन्वर्जन हो या ब्रांड कंसिस्टेंसी हो।'

आगे क्या

क्रिएटर अर्थव्यवस्था का यह औपचारिकीकरण भारत के डिजिटल विज्ञापन बाज़ार की बढ़ती परिपक्वता का संकेत है। आने वाले वर्षों में कंटेंट ऑपरेशंस और डेटा-संचालित क्रिएटर भूमिकाओं की माँग और तेज़ होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता भी बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये नौकरियाँ टिकाऊ हैं या डिजिटल विज्ञापन बजट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर। भारत में क्रिएटर अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण सकारात्मक है, पर टैलेंट गैप यह भी उजागर करता है कि शिक्षा और कौशल विकास तंत्र इस बदलाव की रफ़्तार से पीछे चल रहा है। कंपनियाँ मापने योग्य ROI चाहती हैं, लेकिन क्रिएटिव कार्य को KPI में बाँधने की सीमाएँ भी हैं — यह तनाव आने वाले वर्षों में इस उद्योग की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में क्रिएटर जॉब पोस्टिंग में 919% की बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
Indeed की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2026 की शुरुआत के बीच भारत में क्रिएटर से जुड़ी जॉब पोस्टिंग में 919 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ है कि कंटेंट क्रिएशन अब अनौपचारिक गिग वर्क से निकलकर कॉर्पोरेट संरचनाओं में एक मान्यता-प्राप्त करियर पथ बन गया है।
क्रिएटर अर्थव्यवस्था में कौन-सी नौकरियाँ सबसे अधिक हैं?
मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 40% क्रिएटर पद इन्फ्लुएंसर भूमिकाओं के थे, जबकि 20% मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव और 17% मार्केटिंग इंटर्न के। इसके अलावा, 60% भर्तियाँ वीडियो प्रोडक्शन, कम्युनिटी मैनेजमेंट और कंटेंट ऑपरेशंस जैसी गैर-इन्फ्लुएंसर भूमिकाओं में हो रही हैं।
क्रिएटर जॉब्स में टैलेंट गैप क्या है और यह क्यों बन रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, क्रिएटर भूमिकाओं के लिए संगठनों की माँग उपलब्ध टैलेंट की आपूर्ति से कहीं अधिक है। नए इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम में आ तो रहे हैं, लेकिन औपचारिक संगठनों की ज़रूरत के अनुसार प्रशिक्षित और कुशल क्रिएटर पेशेवरों की कमी बनी हुई है।
कंपनियाँ क्रिएटर्स को क्यों स्थायी रूप से नियुक्त कर रही हैं?
कंपनियाँ एकमुश्त इन्फ्लुएंसर सहयोग के बजाय दीर्घकालिक और स्थायी भर्ती मॉडल अपना रही हैं ताकि एकीकृत कंटेंट क्षमताएँ विकसित की जा सकें। Indeed India के रोहन सिल्वेस्टर के अनुसार, औपचारिक संगठनों में क्रिएटर्स से ऑडियंस एंगेजमेंट, कन्वर्जन और ब्रांड कंसिस्टेंसी जैसे मापने योग्य परिणामों की अपेक्षा रखी जाती है।
यह रिपोर्ट युवा भारतीयों के लिए क्या संदेश देती है?
रिपोर्ट बताती है कि वीडियो एडिटिंग और स्टोरीटेलिंग जैसे कौशल रखने वाले युवाओं के लिए क्रिएटर पदों का औपचारिकीकरण इकोसिस्टम में एक नई संरचनागत पहचान और करियर के ठोस अवसर ला रहा है। माँग आपूर्ति से अधिक होने के कारण इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की संभावनाएँ अच्छी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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