29 जून 2026
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ईरान युद्ध के ऊर्जा संकट में भारत सरकार को 8.5-9/10 अंक: ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत

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ईरान युद्ध के ऊर्जा संकट में भारत सरकार को 8.5-9/10 अंक: ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत

सारांश

ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचीं, दुनिया के कई देशों में ईंधन 40% तक महँगा हुआ — लेकिन भारत में बढ़ोतरी केवल 2-3% रही। ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत ने सरकार के संकट प्रबंधन को 10 में से 8.5-9 अंक दिए।

मुख्य बातें

ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत ने 29 जून 2026 को कहा कि भारत सरकार ने ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा संकट को 10 में से 8.5-9 अंक के स्तर पर संभाला।
संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचीं।
जहाँ कई देशों में ईंधन 24 से 40 प्रतिशत तक महँगा हुआ, वहीं भारत में वृद्धि केवल 2 से 3 प्रतिशत रही।
भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में अब 51 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का है।
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल किया।
देश में करीब 3 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं; संकट के बावजूद कहीं भी ईंधन की कमी नहीं हुई।

ओएनजीसी की पूर्व निदेशक (अन्वेषण) सुषमा रावत ने 29 जून 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया में खाड़ी संकट और ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमले के बाद उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट को भारत सरकार ने अत्यंत प्रभावी ढंग से संभाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी और आम उपभोक्ताओं को कीमतों की तीव्र मार से बचाया।

संकट प्रबंधन को मिले 8.5 से 9 अंक

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर अपनी राय रखते हुए सुषमा रावत ने कहा, "ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए खाड़ी संकट को भारत सरकार ने बहुत अच्छे तरीके से संभाला। अगर मुझे सरकार की प्रतिक्रिया को अंक देने हों, तो मैं 10 में से 8.5 से 9 अंक दूंगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि करीब 3 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं और देशव्यापी तेल-गैस नेटवर्क के बावजूद कहीं भी ईंधन की कमी नहीं हुई।

वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर

सुषमा रावत के अनुसार, इस संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँचीं और कई दिनों तक 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। यह ऐसे समय में आया जब वैश्विक आपूर्ति शृंखला पहले से ही दबाव में थी।

भारत में मूल्य वृद्धि केवल 2-3 प्रतिशत

रावत ने बताया कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में 24 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुछ देशों में यह वृद्धि 40 प्रतिशत तक पहुँच गई। इसके विपरीत, भारत में शुरुआती दौर में ईंधन की कीमतों में केवल लगभग 2 से 3 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई, ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग

सुषमा रावत ने कहा कि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में अब 51 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का हो चुका है। इसके साथ ही, भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है — जो ऊर्जा विविधीकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

आगे की राह

रावत ने कहा, "हम नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार मज़बूत हो रहे हैं और हर दिन इस दिशा में नई प्रगति हो रही है।" गौरतलब है कि यह संकट भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति की परीक्षा था, और विशेषज्ञों के अनुसार देश इसमें काफी हद तक सफल रहा। आने वाले समय में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाना भारत की प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि 2-3 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि अल्पकालिक राहत थी — दीर्घकालिक प्रभाव अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। भारत की 51 प्रतिशत नवीकरणीय क्षमता प्रभावशाली है, परंतु 'क्षमता' और 'वास्तविक उत्पादन' में अंतर होता है; पीक डिमांड के समय जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है। एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य की समयपूर्व प्राप्ति सराहनीय है, किंतु इसका लाभ मुख्यतः कृषि-समृद्ध राज्यों तक सीमित रहा है। असली कसौटी यह होगी कि अगले भू-राजनीतिक झटके में भारत बिना किसी मूल्य वृद्धि के टिक सके — जो तभी संभव है जब घरेलू उत्पादन और भंडारण क्षमता में ठोस निवेश हो।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा संकट में भारत सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा?
ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत के अनुसार, भारत सरकार ने इस संकट को बेहद प्रभावी ढंग से संभाला और उन्होंने सरकार को 10 में से 8.5 से 9 अंक दिए। देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं हुई और उपभोक्ताओं को कीमतों की तीव्र मार से बचाया गया।
खाड़ी संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं?
सुषमा रावत के अनुसार, संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गईं और कई दिनों तक 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। वैश्विक स्तर पर कई देशों में ईंधन कीमतों में 24 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत में ईंधन की कीमतें इस संकट में कितनी बढ़ीं?
जबकि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ीं, भारत में शुरुआती दौर में केवल लगभग 2 से 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। यह निर्णय आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डालने की नीति के तहत लिया गया।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अभी कहाँ है?
सुषमा रावत ने बताया कि भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में अब 51 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का हो चुका है। इसके साथ ही देश ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है।
क्या भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है?
सुषमा रावत के अनुसार, भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
राष्ट्र प्रेस
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