ईरान युद्ध के ऊर्जा संकट में भारत सरकार को 8.5-9/10 अंक: ओएनजीसी की पूर्व निदेशक सुषमा रावत
सारांश
मुख्य बातें
ओएनजीसी की पूर्व निदेशक (अन्वेषण) सुषमा रावत ने 29 जून 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया में खाड़ी संकट और ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमले के बाद उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट को भारत सरकार ने अत्यंत प्रभावी ढंग से संभाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी और आम उपभोक्ताओं को कीमतों की तीव्र मार से बचाया।
संकट प्रबंधन को मिले 8.5 से 9 अंक
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर अपनी राय रखते हुए सुषमा रावत ने कहा, "ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए खाड़ी संकट को भारत सरकार ने बहुत अच्छे तरीके से संभाला। अगर मुझे सरकार की प्रतिक्रिया को अंक देने हों, तो मैं 10 में से 8.5 से 9 अंक दूंगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि करीब 3 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं और देशव्यापी तेल-गैस नेटवर्क के बावजूद कहीं भी ईंधन की कमी नहीं हुई।
वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर
सुषमा रावत के अनुसार, इस संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँचीं और कई दिनों तक 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। यह ऐसे समय में आया जब वैश्विक आपूर्ति शृंखला पहले से ही दबाव में थी।
भारत में मूल्य वृद्धि केवल 2-3 प्रतिशत
रावत ने बताया कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में 24 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुछ देशों में यह वृद्धि 40 प्रतिशत तक पहुँच गई। इसके विपरीत, भारत में शुरुआती दौर में ईंधन की कीमतों में केवल लगभग 2 से 3 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई, ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग
सुषमा रावत ने कहा कि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में अब 51 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का हो चुका है। इसके साथ ही, भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है — जो ऊर्जा विविधीकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
आगे की राह
रावत ने कहा, "हम नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार मज़बूत हो रहे हैं और हर दिन इस दिशा में नई प्रगति हो रही है।" गौरतलब है कि यह संकट भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति की परीक्षा था, और विशेषज्ञों के अनुसार देश इसमें काफी हद तक सफल रहा। आने वाले समय में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाना भारत की प्राथमिकता बनी रहेगी।