खाड़ी संकट में भारत ने उपभोक्ताओं को बचाया: पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक कुमार
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को कहा कि भारत ने सक्रिय नीतिगत हस्तक्षेपों, रणनीतिक बुनियादी ढाँचे के विस्तार और अथक राजनयिक प्रयासों के बल पर खाड़ी संकट के दौरान आम उपभोक्ताओं को ईंधन मूल्य वृद्धि के सबसे बुरे प्रभावों से सफलतापूर्वक बचाया। उनके अनुसार, इन कदमों ने निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की और खुदरा ईंधन कीमतों में तीव्र उछाल को रोका।
मुख्य घटनाक्रम
कुमार ने कहा कि भारत ने मध्य पूर्व संकट का सामना कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर तरीके से किया। उन्होंने बताया कि संकट के 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने 'वर्क-फ्रॉम-होम' उपाय लागू कर दिए और ईंधन स्टेशनों पर पेट्रोल व डीजल की बिक्री पर मात्रा संबंधी पाबंदियाँ लगा दीं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि खाड़ी क्षेत्र में आए इस बड़े संकट का पूरा असर आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। इसके लिए सरकार तारीफ की हकदार है।"
ऊर्जा सुरक्षा में बुनियादी ढाँचे की भूमिका
कुमार ने रेखांकित किया कि तेल और गैस क्षेत्र एक अत्यधिक परस्पर जुड़े वैश्विक बाज़ार में संचालित होता है, जहाँ कोई भी देश पूर्णतः आत्मनिर्भर नहीं है। उनके शब्दों में, "आज तेल और गैस का कारोबार असल में एक ग्लोबल खेल है। कोई भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है; दुनिया भर में निर्यातक और आयातक हैं और बड़े पैमाने पर लेन-देन होता है। यह एक बहुत जटिल खेल है जिसे कोई भी देश अकेले नहीं खेल सकता।"
उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में भारत सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने मिलकर जो पूँजी निवेश किया है, वह उल्लेखनीय रहा है। यही निवेश संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ बना।
कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका
कुमार के अनुसार, 29 फरवरी से ही उच्च-स्तरीय बातचीत और निरंतर संपर्क आरंभ हो गया था। अधिकारी पर्दे के पीछे चौबीसों घंटे सक्रिय रहे ताकि संघर्ष के सबसे कठिन दौर में भी भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग मिल सके। यह कूटनीतिक सक्रियता ही थी जिसने आपूर्ति श्रृंखला को टूटने से बचाया।
सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया
कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार ने नीतिगत हस्तक्षेपों के ज़रिये आपूर्ति व्यवधान के प्रभाव को नियंत्रण में रखा, जिससे खुदरा ईंधन कीमतों में अचानक उछाल को टाला जा सका। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता चरम पर थी और कई देशों को ईंधन संकट का सामना करना पड़ा था।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह तैयारी भविष्य के ऊर्जा संकटों के लिए एक मॉडल बन सकती है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात होता है, इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत की ऊर्जा रणनीति का केंद्रीय तत्व बनी रहेगी। विश्लेषकों के अनुसार, बुनियादी ढाँचे में निरंतर निवेश और सक्रिय कूटनीति ही भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी है।