30 जून 2026
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खाड़ी संकट में भारत ने उपभोक्ताओं को बचाया: पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक कुमार

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खाड़ी संकट में भारत ने उपभोक्ताओं को बचाया: पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक कुमार

सारांश

खाड़ी संकट के सबसे कठिन दौर में भारत ने 24 घंटे के भीतर नीतिगत उपाय लागू किए, होर्मुज स्ट्रेट पर चौबीसों घंटे कूटनीति चलाई और उपभोक्ताओं को ईंधन महँगाई से बचाया — पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक कुमार ने इसे सरकार की सराहनीय तैयारी बताया।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने 30 जून 2026 को कहा कि भारत ने खाड़ी संकट में उपभोक्ताओं को सफलतापूर्वक बचाया।
संकट के 24 घंटे के भीतर 'वर्क-फ्रॉम-होम' उपाय और ईंधन स्टेशनों पर मात्रा पाबंदियाँ लागू की गईं।
29 फरवरी से उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क शुरू हुआ; अधिकारी चौबीसों घंटे सक्रिय रहे।
भारतीय तेल टैंकरों को संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग दिलाया गया।
पिछले एक दशक में सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त बुनियादी ढाँचा निवेश को संकट प्रबंधन में निर्णायक बताया गया।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को कहा कि भारत ने सक्रिय नीतिगत हस्तक्षेपों, रणनीतिक बुनियादी ढाँचे के विस्तार और अथक राजनयिक प्रयासों के बल पर खाड़ी संकट के दौरान आम उपभोक्ताओं को ईंधन मूल्य वृद्धि के सबसे बुरे प्रभावों से सफलतापूर्वक बचाया। उनके अनुसार, इन कदमों ने निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की और खुदरा ईंधन कीमतों में तीव्र उछाल को रोका।

मुख्य घटनाक्रम

कुमार ने कहा कि भारत ने मध्य पूर्व संकट का सामना कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर तरीके से किया। उन्होंने बताया कि संकट के 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने 'वर्क-फ्रॉम-होम' उपाय लागू कर दिए और ईंधन स्टेशनों पर पेट्रोल व डीजल की बिक्री पर मात्रा संबंधी पाबंदियाँ लगा दीं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि खाड़ी क्षेत्र में आए इस बड़े संकट का पूरा असर आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। इसके लिए सरकार तारीफ की हकदार है।"

ऊर्जा सुरक्षा में बुनियादी ढाँचे की भूमिका

कुमार ने रेखांकित किया कि तेल और गैस क्षेत्र एक अत्यधिक परस्पर जुड़े वैश्विक बाज़ार में संचालित होता है, जहाँ कोई भी देश पूर्णतः आत्मनिर्भर नहीं है। उनके शब्दों में, "आज तेल और गैस का कारोबार असल में एक ग्लोबल खेल है। कोई भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है; दुनिया भर में निर्यातक और आयातक हैं और बड़े पैमाने पर लेन-देन होता है। यह एक बहुत जटिल खेल है जिसे कोई भी देश अकेले नहीं खेल सकता।"

उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में भारत सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने मिलकर जो पूँजी निवेश किया है, वह उल्लेखनीय रहा है। यही निवेश संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ बना।

कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका

कुमार के अनुसार, 29 फरवरी से ही उच्च-स्तरीय बातचीत और निरंतर संपर्क आरंभ हो गया था। अधिकारी पर्दे के पीछे चौबीसों घंटे सक्रिय रहे ताकि संघर्ष के सबसे कठिन दौर में भी भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग मिल सके। यह कूटनीतिक सक्रियता ही थी जिसने आपूर्ति श्रृंखला को टूटने से बचाया।

सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया

कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार ने नीतिगत हस्तक्षेपों के ज़रिये आपूर्ति व्यवधान के प्रभाव को नियंत्रण में रखा, जिससे खुदरा ईंधन कीमतों में अचानक उछाल को टाला जा सका। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता चरम पर थी और कई देशों को ईंधन संकट का सामना करना पड़ा था।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह तैयारी भविष्य के ऊर्जा संकटों के लिए एक मॉडल बन सकती है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात होता है, इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत की ऊर्जा रणनीति का केंद्रीय तत्व बनी रहेगी। विश्लेषकों के अनुसार, बुनियादी ढाँचे में निरंतर निवेश और सक्रिय कूटनीति ही भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी याद दिलाता है कि भारत की ऊर्जा निर्भरता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मार्गों पर टिका है। 'वर्क-फ्रॉम-होम' और मात्रा पाबंदियाँ अल्पकालिक उपाय थे — दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों में निवेश की असली परीक्षा अभी बाकी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 'उपभोक्ताओं को बचाया' का दावा खुदरा कीमतों पर आधारित है, जबकि सब्सिडी बोझ और राजकोषीय असर का पूरा चित्र अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाड़ी संकट में भारत ने उपभोक्ताओं को कैसे बचाया?
पूर्व पेट्रोलियम सचिव विवेक कुमार के अनुसार, भारत ने संकट के 24 घंटे के भीतर 'वर्क-फ्रॉम-होम' उपाय और ईंधन स्टेशनों पर मात्रा पाबंदियाँ लागू कीं। साथ ही नीतिगत हस्तक्षेपों से खुदरा ईंधन कीमतों में तीव्र वृद्धि को रोका गया।
होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की कूटनीति क्या रही?
29 फरवरी से ही उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत शुरू हो गई थी और अधिकारी चौबीसों घंटे सक्रिय रहे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि संघर्ष के सबसे कठिन दौर में भी भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग मिले।
विवेक कुमार कौन हैं और उनका यह बयान क्यों अहम है?
विवेक कुमार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव हैं, जिन्होंने भारत की ऊर्जा नीति को करीब से आकार दिया है। उनका यह बयान सरकार की संकट-प्रबंधन क्षमता का एक अंदरूनी मूल्यांकन है, जो नीतिगत पारदर्शिता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बुनियादी ढाँचे की क्या भूमिका है?
कुमार के अनुसार, पिछले एक दशक में सरकार और निजी क्षेत्र ने मिलकर जो पूँजी निवेश किया है, वह संकट के दौरान आपूर्ति बनाए रखने में निर्णायक साबित हुआ। ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी बुनियादी ढाँचे पर निर्भर करती है।
क्या भारत ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है?
नहीं। विवेक कुमार ने स्पष्ट कहा कि तेल और गैस क्षेत्र एक वैश्विक बाज़ार है और कोई भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। भारत की रणनीति आत्मनिर्भरता की बजाय विविध आपूर्ति स्रोतों, मज़बूत बुनियादी ढाँचे और सक्रिय कूटनीति पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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