29 जून 2026
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पश्चिम एशिया युद्ध में ऊर्जा संकट: अमिताभ कांत बोले — भारत सरकार की रणनीति पूरी दुनिया के लिए मिसाल

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पश्चिम एशिया युद्ध में ऊर्जा संकट: अमिताभ कांत बोले — भारत सरकार की रणनीति पूरी दुनिया के लिए मिसाल

सारांश

पश्चिम एशिया संकट में जब दुनिया के अधिकतर देशों के उपभोक्ता ईंधन महंगाई से कराहे, भारत ने उत्पाद शुल्क में कटौती, 27 नए आपूर्तिकर्ता देशों को जोड़ने और एलपीजी नियंत्रण आदेश से स्थिति संभाल ली — पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने इसे वैश्विक मानक बताया।

मुख्य बातें

पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने 29 जून 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान भारत सरकार की ऊर्जा रणनीति असाधारण रही।
सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर और डीजल पर उत्पाद शुल्क शून्य कर घरेलू कीमतें नियंत्रित रखीं।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ₹642 में सिलेंडर मिलता रहा; वास्तविक लागत ₹1,600 , यानी प्रति सिलेंडर ₹900 सब्सिडी ।
कच्चे तेल आयात के लिए 27 नए देश जोड़े गए; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 12 जहाज सुरक्षित लौटे।
भारत अपनी जरूरत का 86% कच्चा तेल और 60% एलपीजी आयात करता है, फिर भी संकट का सफल प्रबंधन हुआ।
कांत ने ईंधन कीमतों में कटौती पर कहा — 'अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी', भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं।

पूर्व जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने 29 जून 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में भारत सरकार का प्रदर्शन असाधारण रहा। उनके अनुसार, सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते देश के किसी भी उपभोक्ता पर ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं पड़ा और एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध बनी रही।

भारत की ऊर्जा कूटनीति: मुख्य उपाय

कांत ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा, 'यह संकट हमारी वजह से नहीं आया था, बल्कि यह पूरी दुनिया का संकट था। दुनिया के लगभग हर देश में उपभोक्ता प्रभावित हुए, लेकिन भारत में किसी भी उपभोक्ता पर इसका असर नहीं पड़ा।' उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया।

सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) शून्य तक लाकर वैश्विक मूल्य वृद्धि के बावजूद घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रण में रखा। साथ ही, कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए 27 नए देशों को जोड़ा गया, जिससे आयात स्रोतों में उल्लेखनीय विविधता आई।

उज्ज्वला योजना और एलपीजी नियंत्रण आदेश

कांत ने बताया कि सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹642 में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराना जारी रखा, जबकि उसकी वास्तविक उत्पादन लागत लगभग ₹1,600 थी। इस प्रकार सरकार प्रति सिलेंडर करीब ₹900 की सब्सिडी दे रही थी।

इससे भी महत्वपूर्ण कदम एलपीजी नियंत्रण आदेश था, जिसके कारण वे रिफाइनरियाँ भी एलपीजी उत्पादन में लग गईं जो पहले इसका उत्पादन नहीं करती थीं। कांत ने कहा, 'हमने अपनी रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया और पाइपलाइन नेटवर्क का भी विस्तार सुनिश्चित किया।'

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: कूटनीतिक सफलता

कांत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत के 12 जहाजों के कच्चा तेल लेकर सुरक्षित वापस लौटने को भारत की सफल कूटनीति का बड़ा उदाहरण बताया। यह ऐसे समय में हुआ जब इस जलमार्ग पर भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर था।

गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 86 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इतनी बड़ी आयात निर्भरता के बावजूद संकट का सफल प्रबंधन उल्लेखनीय माना जा रहा है।

आगे क्या: ईंधन कीमतों में कटौती पर संकेत

जब उनसे पूछा गया कि क्या अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाने का समय आ गया है, तो कांत ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा, 'स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। भू-राजनीतिक तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।'

उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होंगी और इसका लाभ न केवल भारत को, बल्कि ग्लोबल साउथ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय आने पर सरकार उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक निर्णय लेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह विश्लेषण का केवल एक पक्ष है। उत्पाद शुल्क में कटौती और सब्सिडी के बोझ ने सरकारी राजस्व पर जो दबाव डाला, उसका जिक्र नहीं हुआ — और यह सवाल भी अनुत्तरित है कि क्या ये राहतें दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का हिस्सा थीं या आपातकालीन प्रतिक्रिया मात्र। 27 नए आपूर्तिकर्ता देशों का जुड़ना विविधीकरण की दिशा में सकारात्मक कदम है, परंतु 86% आयात निर्भरता खुद यह बताती है कि असली चुनौती अभी बाकी है। पेट्रोल-डीजल कीमतों पर 'अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी' वाला बयान उपभोक्ताओं को ठोस राहत का आश्वासन नहीं देता।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान भारत सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए?
सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर और डीजल पर उत्पाद शुल्क शून्य कर घरेलू कीमतें नियंत्रित रखीं, कच्चे तेल आयात के लिए 27 नए देशों को जोड़ा और एलपीजी नियंत्रण आदेश के जरिए रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाया। उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ₹642 में सिलेंडर मिलता रहा, जबकि वास्तविक लागत लगभग ₹1,600 थी।
अमिताभ कांत ने भारत की ऊर्जा नीति की सराहना क्यों की?
पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत के अनुसार, वैश्विक संकट के बावजूद भारत में कोई भी उपभोक्ता ईंधन महंगाई से प्रभावित नहीं हुआ, कालाबाजारी नहीं हुई और एलपीजी आपूर्ति निर्बाध रही। उन्होंने इसे पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बताया।
एलपीजी नियंत्रण आदेश क्या था और इसका क्या असर हुआ?
एलपीजी नियंत्रण आदेश एक सरकारी निर्देश था जिसके तहत वे रिफाइनरियाँ भी एलपीजी उत्पादन करने लगीं जो पहले इसका उत्पादन नहीं करती थीं। इससे देश में एलपीजी की घरेलू आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के जहाजों की वापसी क्यों महत्वपूर्ण थी?
पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — जो वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख जलमार्ग है — पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर था। इसके बावजूद भारत के 12 जहाज कच्चा तेल लेकर सुरक्षित वापस लौटे, जिसे अमिताभ कांत ने भारत की सफल कूटनीति का बड़ा उदाहरण बताया।
क्या अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी?
अमिताभ कांत ने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें घटने पर सरकार उपभोक्ताओं के हित में उचित निर्णय लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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