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भारत-EU FTA से व्यापार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे: फिनलैंड ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी

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भारत-EU FTA से व्यापार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे: फिनलैंड ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी

सारांश

भारत-EU FTA पर हस्ताक्षर के बाद यूरोपीय कंपनियाँ भारतीय उद्योगों के साथ साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं। फिनलैंड के ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी के अनुसार, यह समझौता व्यापार, निवेश और वैश्विक आपूर्ति शृंखला सहयोग के नए द्वार खोलेगा — और चक्रीय अर्थव्यवस्था में फिनलैंड का अनुभव भारत के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

मुख्य बातें

फिनलैंड दूतावास के ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी ने 21 अगस्त को कहा कि भारत-EU FTA दोनों पक्षों के व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा।
यूरोपीय कंपनियाँ भारतीय उद्योगों के साथ व्यापार विस्तार, निवेश और साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं तथा समझौते के क्रियान्वयन का इंतजार कर रही हैं।
हेरलेवी के अनुसार, FTA वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत-यूरोप सहयोग को और मजबूत करेगा।
भारत, फिनलैंड सहित यूरोपीय देशों के चक्रीय अर्थव्यवस्था के अनुभव से लाभ उठा सकता है — संसाधन पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन के क्षेत्र में।
हेरलेवी ने जोर दिया कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत उत्पाद डिज़ाइन चरण से होनी चाहिए ताकि कम सामग्री में अधिक टिकाऊपन सुनिश्चित हो।

फिनलैंड दूतावास के व्यापार सलाहकार एंटी हेरलेवी ने 21 अगस्त को नई दिल्ली में कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होने के बाद यूरोपीय कंपनियाँ भारतीय उद्योगों के साथ गहरे सहयोग को लेकर उत्साहित हैं और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रतीक्षा कर रही हैं। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों पक्षों के व्यवसायों के लिए व्यापार विस्तार, निवेश और साझेदारी के नए अवसर खोलेगा।

समझौते को लेकर उत्साह

हेरलेवी ने कहा, 'यह वर्ष बेहद महत्वपूर्ण है। मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और यूरोपीय कंपनियाँ भारत तथा भारतीय उद्योगों के साथ अधिक गहराई से काम करने की इच्छुक हैं। इस समझौते को लेकर काफी उत्साह है और हमें उम्मीद है कि इसकी सभी व्यावहारिक प्रक्रियाएँ जल्द पूरी हो जाएंगी।' उन्होंने रेखांकित किया कि व्यवसाय जगत इस समझौते के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत-यूरोप सहयोग

हेरलेवी के अनुसार, भारत-EU FTA वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की क्षमता रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने की कोशिश कर रहा है और यूरोपीय देश अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने पर जोर दे रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और EU के बीच यह वार्ता लंबे समय से चल रही थी, और इसके पूरा होने को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

चक्रीय अर्थव्यवस्था में फिनलैंड का अनुभव

हेरलेवी ने यह भी कहा कि भारत, फिनलैंड सहित यूरोपीय देशों के चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के दीर्घकालिक अनुभव से महत्वपूर्ण लाभ उठा सकता है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देशों ने संसाधनों के पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को अपनाने में वर्षों का अनुभव अर्जित किया है। दोनों देशों की कंपनियाँ संसाधनों की खपत घटाने, उत्पाद डिज़ाइन को बेहतर बनाने और पुनर्चक्रण प्रणालियों को सशक्त करने के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकती हैं।

कम सामग्री, अधिक पुनर्चक्रण का मंत्र

चक्रीय अर्थव्यवस्था के महत्व को समझाते हुए हेरलेवी ने कहा कि इसका मूल उद्देश्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग और अपशिष्ट को न्यूनतम करना है। उनके अनुसार, यदि सामग्री के उपयोग को कम किया जाए तो पूरी आपूर्ति शृंखला में लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों घटाए जा सकते हैं। इससे ऊर्जा और पानी की खपत भी कम होगी तथा नई कच्ची सामग्री पर निर्भरता घटेगी, जिनके उत्पादन में आमतौर पर अधिक ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन होता है।

हेरलेवी ने सरल शब्दों में कहा, 'हमें कम सामग्री का उपयोग करना चाहिए और अधिक से अधिक पुनर्चक्रण करना चाहिए। यह वास्तव में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम हो सकता है।'

उत्पाद डिज़ाइन से शुरू होती है यात्रा

हेरलेवी ने ज़ोर देकर कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत उत्पाद के डिज़ाइन चरण से ही होनी चाहिए। कंपनियों को ऐसे उत्पाद विकसित करने चाहिए जिनमें कम सामग्री का उपयोग हो, जिनका जीवनकाल अधिक हो और जिनके उपयोग के बाद सामग्री को आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सके। उन्होंने कहा, 'बेहतर योजना और उत्पाद डिज़ाइन ही ऐसे टिकाऊ उत्पादों का आधार बन सकती है जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के अनुरूप हों।' भारत-EU FTA के लागू होने के बाद इस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाएँ और व्यापक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता में होगी — यह वार्ता वर्षों तक अटकी रही और अब भी व्यावहारिक प्रक्रियाएँ पूरी होनी बाकी हैं। चक्रीय अर्थव्यवस्था पर फिनलैंड का जोर सकारात्मक है, लेकिन भारत में इस मॉडल को अपनाने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन और औद्योगिक ढाँचे में बड़े बदलाव की ज़रूरत होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि FTA के लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं बँटते — छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए यूरोपीय मानकों के अनुपालन की लागत एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्या है और इससे क्या बदलेगा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हस्ताक्षरित यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के व्यवसायों के लिए व्यापार विस्तार, निवेश और साझेदारी के नए अवसर खोलेगा। फिनलैंड ट्रेड काउंसलर के अनुसार, यह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत-यूरोप सहयोग को भी मजबूत करेगा।
यूरोपीय कंपनियाँ भारत के साथ किन क्षेत्रों में सहयोग करना चाहती हैं?
यूरोपीय कंपनियाँ भारतीय उद्योगों के साथ व्यापार विस्तार, निवेश, व्यावसायिक साझेदारी और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में काम करने को इच्छुक हैं। इसके अलावा संसाधन पुनर्चक्रण, उत्पाद डिज़ाइन और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों में भी सहयोग की संभावनाएँ बताई गई हैं।
चक्रीय अर्थव्यवस्था क्या है और भारत को इससे कैसे फायदा होगा?
चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का मूल उद्देश्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग और अपशिष्ट को न्यूनतम करना है। फिनलैंड ट्रेड काउंसलर के अनुसार, भारत फिनलैंड जैसे यूरोपीय देशों के अनुभव से सीखकर ऊर्जा व पानी की खपत घटा सकता है, कार्बन उत्सर्जन कम कर सकता है और उत्पादन लागत में भी कमी ला सकता है।
भारत-EU FTA के क्रियान्वयन की स्थिति क्या है?
समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन इसकी व्यावहारिक प्रक्रियाएँ अभी पूरी होनी बाकी हैं। फिनलैंड ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ये प्रक्रियाएँ जल्द पूरी होंगी और व्यवसाय जगत इसके लागू होने का इंतजार कर रहा है।
उत्पाद डिज़ाइन और चक्रीय अर्थव्यवस्था का क्या संबंध है?
फिनलैंड ट्रेड काउंसलर के अनुसार, चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत उत्पाद के डिज़ाइन चरण से ही होनी चाहिए। कंपनियों को ऐसे उत्पाद विकसित करने चाहिए जिनमें कम सामग्री का उपयोग हो, जिनका जीवनकाल अधिक हो और जिनकी सामग्री को उपयोग के बाद आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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