उच्च शिक्षा नामांकन 4.50 करोड़ के पार, एक दशक में 31.5% उछाल; छात्राओं की भागीदारी पुरुषों से आगे
सारांश
मुख्य बातें
भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 में उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित छात्रों की संख्या 3.42 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 4.50 करोड़ हो गई — यानी एक दशक में 31.5 प्रतिशत की वृद्धि। यह आँकड़ा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में भारत की महत्त्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित करता है।
सकल नामांकन अनुपात में सुधार
उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 के 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 29.5 प्रतिशत और 2023-24 में 30 प्रतिशत तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि NEP 2020 ने 2035 तक GER को 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा गति को देखते हुए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण तो है, लेकिन दिशा सकारात्मक बनी हुई है।
संस्थानों का तेज़ विस्तार
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) रिपोर्ट के अनुसार, देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 2014-15 के 760 से बढ़कर 2023-24 में 1,289 हो गई — 69.6 प्रतिशत की वृद्धि। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या 38,498 से 48,246 (25.3 प्रतिशत वृद्धि) और स्वतंत्र संस्थानों की संख्या 12,276 से 15,221 (24 प्रतिशत वृद्धि) हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
छात्राओं की भागीदारी में ऐतिहासिक उछाल
उच्च शिक्षा में महिला नामांकन के आँकड़े विशेष रूप से उत्साहजनक हैं। पिछले दस वर्षों में छात्राओं का नामांकन 42.2 प्रतिशत बढ़कर 1.57 करोड़ से 2.24 करोड़ हो गया — जो कुल नामांकन वृद्धि दर (31.5 प्रतिशत) से कहीं अधिक है। लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) 2014-15 के 0.92 से बढ़कर 2023-24 में 1.08 हो गया, जिसका अर्थ है कि उच्च शिक्षा में महिलाएँ अब कई श्रेणियों में पुरुषों से आगे निकल चुकी हैं।
वंचित वर्गों की बढ़ती पहुँच
सामाजिक समावेश के मोर्चे पर भी सुधार दिखा है। अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की नामांकन हिस्सेदारी 13.44 प्रतिशत से बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गई। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की भागीदारी 4.8 प्रतिशत से 6.4 प्रतिशत तक पहुँची। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का नामांकन हिस्सा 32.8 प्रतिशत से बढ़कर 40.1 प्रतिशत हो गया — सभी सामाजिक वर्गों में सबसे बड़ी वृद्धि।
STEM में बढ़ती रुचि
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में नामांकन 91.5 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ हो गया है, जो 11.5 प्रतिशत की वृद्धि है। आँकड़ों के अनुसार यह वृद्धि भारत की तकनीकी और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मज़बूती दे सकती है। आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि नामांकन की यह गति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोज़गार परिणामों में भी परिवर्तित हो सके।