भारत: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों की प्राथमिक पसंद, प्राइवेट मार्केट सौदों में 207 अरब डॉलर की वृद्धि

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भारत: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों की प्राथमिक पसंद, प्राइवेट मार्केट सौदों में 207 अरब डॉलर की वृद्धि

सारांश

भारत का प्राइवेट मार्केट एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। वैश्विक निवेशकों के लिए बेहतर अवसरों के साथ, भारत के प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल सौदों का कुल मूल्य 207 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

Key Takeaways

  • भारत एशिया-प्रशांत में निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
  • प्राइवेट मार्केट सौदों का कुल मूल्य 207 अरब डॉलर तक पहुंचा।
  • 76 प्रतिशत निवेशक भारत को अपने शीर्ष तीन विकल्पों में शामिल करते हैं।
  • टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे अधिक निवेश हो रहा है।
  • भारत की आर्थिक वृद्धि और घरेलू खपत में तेजी निवेश के लिए बड़े अवसर प्रस्तुत कर रही है।

नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्राइवेट मार्केट में निवेशकों की 'प्राथमिक पसंद' बनता जा रहा है। जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई बाजारों में निवेश गतिविधियां धीमी हो रही हैं, ऐसे में भारत वैश्विक निवेशकों को वृहद और स्थिरता के साथ बेहतर अवसर प्रस्तुत कर रहा है।

मैक्किंजे एंड कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में शामिल 50 से अधिक लिमिटेड पार्टनर्स में से लगभग 31 प्रतिशत ने भारत को अपने निवेश का पहला विकल्प बताया, जबकि 76 प्रतिशत निवेशकों ने इसे अपने शीर्ष तीन विकल्पों में शामिल किया।

रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति एशिया में निवेश के रुझान में बदलाव को दर्शाती है। निवेशक अब चीन के अलावा अन्य देशों में दीर्घकालिक विकास के अवसर खोज रहे हैं और यही कारण है कि उनका झुकाव भारत की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आधे से अधिक निवेशक भारत-केंद्रित फंड में अपने निवेश को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

वर्तमान में भारत में निवेश के लिए लिमिटेड पार्टनर्स की कुल पूंजी का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा प्राइवेट मार्केट में जाता है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले पांच वर्षों में बायआउट और ग्रोथ स्ट्रेटेजी में सबसे ज्यादा रुचि देखने को मिलेगी, क्योंकि इससे उन्हें अधिक नियंत्रण प्राप्त होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल डील्स का कुल मूल्य 207 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में डेढ़ गुना से अधिक है। इसी अवधि में निवेश से बाहर निकलने यानी एग्जिट का मूल्य भी दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो टेक्नोलॉजी, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर और कंज्यूमर सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश हुआ। इन चार सेक्टरों ने इस अवधि में कुल प्राइवेट निवेश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आकर्षित किया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश में भारत की हिस्सेदारी 2020-24 के दौरान लगभग 21 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 2015-19 के दौरान यह लगभग 12 प्रतिशत थी।

प्राइवेट इक्विटी फर्म पैंथियन के पार्टनर कुणाल सूद ने कहा कि निवेशक अब प्राइवेट मार्केट में पहले से अधिक विश्वास के साथ निवेश कर रहे हैं और वे कंपनियों के साथ गहरी और रणनीतिक साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के लिए भारत के बढ़ते आकर्षण का मुख्य कारण देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, उद्यमशील प्रतिभा और तेजी से बढ़ती घरेलू खपत है, जो आने वाले वर्षों में भी निवेश के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती है।

Point of View

बल्कि वैश्विक निवेशकों के दृष्टिकोण में बदलाव को भी दर्शाती है।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत में प्राइवेट मार्केट में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, उद्यमशील प्रतिभा और घरेलू खपत में तेजी के कारण प्राइवेट मार्केट में निवेश बढ़ रहा है।
मैक्किंजे एंड कंपनी की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है, जहां 76 प्रतिशत निवेशक इसे शीर्ष तीन विकल्पों में रखते हैं।
भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल डील्स का कुल मूल्य कितना है?
2021 से 2025 के बीच भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल डील्स का कुल मूल्य 207 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
कौन से सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश हो रहा है?
टेक्नोलॉजी, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर और कंज्यूमर सेक्टर में सबसे अधिक निवेश हो रहा है।
भारत में निवेशकों के लिए मुख्य आकर्षण क्या है?
भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और तेजी से बढ़ती घरेलू खपत निवेशकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं।
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