भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8 प्रतिशत, घरेलू मांग बनी मुख्य कारण: एनएसई
सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8%25 पर स्थिर है।
- घरेलू मांग ने इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 38,423 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।
- वित्त वर्ष 26 में 99 मेनबोर्ड आईपीओ की लिस्टिंग हुई है।
मुंबई, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है, जो घरेलू मांग के कारण लगभग 7.8 प्रतिशत पर स्थिर है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में जारी की गई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में गिरावट आई है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
बढ़ती ऊर्जा कीमतें महंगाई, चालू खाता घाटा और भारत की मुद्रा की स्थिति के लिए चिंताजनक हैं।
एक्सचेंज के अनुसार, फरवरी में निफ्टी 50 में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि व्यापक बाजार में कुछ स्थिरता देखने को मिली। मार्च में बिक्री में तेजी आई, और निफ्टी में 1-13 मार्च के बीच साल-दर-साल 11.4 प्रतिशत की गिरावट आई।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने स्थिरता बनाए रखी। फरवरी में उन्होंने 38,423 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, जो लगातार 31वें महीने जारी रहा। इस निवेश को 29,845 करोड़ रुपये के एसआईपी इनफ्लो का समर्थन मिला। विदेशी निवेशकों ने फरवरी में थोड़ी खरीदारी की, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों में गिरावट के साथ उन्होंने फिर से बिकवाली शुरू कर दी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। एनएसई ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के कंपनियों के नतीजों का हवाला दिया।
एनएसई के अनुसार, इस दौरान कंपनियों की आय वृद्धि मजबूत बनी रही। निफ्टी 50 और व्यापक बाजार ने त्योहारी मांग, ऋण मांग और बेहतर वसूली के चलते दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की। सभी क्षेत्रों में मुनाफे में वृद्धि भी मजबूत हुई।
साथ ही, रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में आईपीओ गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं।
वित्त वर्ष 26 में अब तक 99 मेनबोर्ड आईपीओ की लिस्टिंग हुई है, जिससे कंपनियों ने 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले वर्ष 79 कंपनियों ने मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे।
हालांकि, एसएमई सेगमेंट में आईपीओ गतिविधियों में कमी देखी गई है। वित्त वर्ष 26 में कुल 105 एसएमई आईपीओ की लिस्टिंग हुई, जिसमें कंपनियों ने 5,121 करोड़ रुपये जुटाए। वित्त वर्ष 25 में 163 एसएमई आईपीओ आए थे और उन्होंने 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई।