भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 अक्टूबर से लागू, डिप्लोमेटिक नोट्स का आदान-प्रदान पूरा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए 21 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से डिप्लोमेटिक नोट्स का आदान-प्रदान किया, जिससे 20 अक्टूबर 2026 से इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। न्यूजीलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को यह पुष्टि की कि दोनों देशों ने अपनी-अपनी घरेलू कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी कर ली हैं।
औपचारिक प्रक्रिया का विवरण
न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त मुआनपुई साइवी और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत-न्यूजीलैंड FTA के लिए डिप्लोमेटिक नोट्स का आदान-प्रदान किया। इस अदला-बदली ने पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने अपनी घरेलू विधायी और कानूनी अपेक्षाएँ पूर्ण कर ली हैं। भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा की।
मंत्री और नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पहले ही एक्स पर पोस्ट करके बताया था कि यह FTA विजयादशमी (दशहरा) यानी 20 अक्टूबर 2026 को लागू होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों की साझा जीत करार दिया। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड की संसद ने इस समझौते को 93 बनाम 26 मतों से मंजूरी दी — दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन इसे मिला।
व्यापार लक्ष्य और द्विपक्षीय संभावनाएँ
मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे न्यूजीलैंड और भारत द्वारा किए गए सर्वश्रेष्ठ व्यापार समझौतों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को पर्याप्त बढ़ावा मिल सकता है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की प्रतिबद्धता जताई है। मैक्ले ने कहा, 'मुझे लगता है कि अब यह लक्ष्य हासिल करना पूरी तरह संभव है।'
आम जनता और व्यापार जगत पर असर
यह FTA भारतीय और न्यूजीलैंड के निर्यातकों, किसानों और सेवा प्रदाताओं के लिए नए बाज़ार खोलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार संबंधों में विविधता लाने पर ज़ोर दे रहा है और न्यूजीलैंड एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी व्यापारिक उपस्थिति गहरी करना चाहता है।
आगे क्या होगा
20 अक्टूबर 2026 से FTA के लागू होते ही दोनों देशों में शुल्क कटौती और बाज़ार पहुँच से जुड़े प्रावधान क्रियाशील हो जाएँगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को 2030 के दोगुना-करने के लक्ष्य की ओर ठोस रफ्तार दे सकता है।