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टैक्स अनुपालन में टेक्नोलॉजी अपनाने वाले अग्रणी देशों में भारत शामिल, GSTN बना मिसाल: विशेषज्ञ

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टैक्स अनुपालन में टेक्नोलॉजी अपनाने वाले अग्रणी देशों में भारत शामिल, GSTN बना मिसाल: विशेषज्ञ

सारांश

नई दिल्ली में एसोचैम के 23वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि GSTN भारत की डिजिटल टैक्स क्रांति की नींव है। आगे AI, वैश्विक न्यूनतम कर और नया आयकर कानून मिलकर भारत की कर व्यवस्था को नया रूप देंगे।

मुख्य बातें

PwC के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि भारत टैक्स अनुपालन में टेक्नोलॉजी अपनाने वाले अग्रणी देशों में शामिल है।
GSTN को करदाताओं और प्रशासन के बीच डिजिटल सहयोग का सबसे सशक्त उदाहरण बताया गया।
राकेश नांगिया (एसोचैम) के अनुसार टाइगर ग्लोबल फैसला , नया आयकर कानून, वैश्विक न्यूनतम कर और AI भविष्य की कर व्यवस्था को आकार देंगे।
संदीप चौफला ने कहा कि सरकारें कर आधार सुरक्षित रखना चाहती हैं जबकि करदाता नीतिगत स्पष्टता और निश्चितता चाहते हैं।
यह सम्मेलन 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।

भारत टैक्स अनुपालन के लिए टेक्नोलॉजी को तेज़ी से अपनाने वाले देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है — यह बात PwC में इनडायरेक्ट टैक्स के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कही। उन्होंने एसोचैम के 23वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन के साइडलाइन में बातचीत में कहा कि देश का जीएसटी प्लेटफॉर्म GSTN इस दिशा में सबसे सशक्त उदाहरण है, जहाँ करदाता और प्रशासन एक साझा डिजिटल ढाँचे में मिलकर काम करते हैं।

GSTN और आयकर प्रणाली में बदलाव

अग्रवाल के अनुसार, GSTN ने न केवल करदाताओं के लिए फाइलिंग को सरल बनाया है, बल्कि कर प्रशासन की दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने कहा, 'आज के समय में टेक्नोलॉजी टैक्स प्रणाली का एक अहम हिस्सा बन गई है और सरकार की नीतियों में इस पर फोकस किया जाना चाहिए।' यही स्थिति आयकर प्रणाली के साथ भी है, जहाँ डिजिटल सत्यापन और ई-फाइलिंग तेज़ी से मुख्यधारा बन चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय कराधान में संरचनात्मक बदलाव

एसोचैम में इंटरनेशनल टैक्स पर टास्क फोर्स के चेयरमैन राकेश नांगिया ने कार्यक्रम में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान अब केवल तेज़ी से बदलने वाले दौर में नहीं, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार, टाइगर ग्लोबल फैसला, नया आयकर कानून, वैश्विक न्यूनतम कर व्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय की कर व्यवस्था को आकार देंगे।

करदाताओं की प्राथमिकताएँ और सरकार की चुनौतियाँ

नांगिया ने यह भी कहा कि हर करदाता टैक्स सिस्टम को सरल, कम विवादास्पद और त्वरित रिफंड वाला देखना चाहता है। साथ ही सभी की यह अपेक्षा है कि वैश्विक व्यापार पर अचानक या अत्यधिक आक्रामक तरीके से कर न लगाया जाए। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसी स्थितियाँ समय-समय पर उत्पन्न होती हैं और ये टैक्स सिस्टम की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

कर आधार और स्पष्टता की माँग

एसोचैम की डायरेक्ट टैक्स पर नेशनल काउंसिल के चेयरमैन संदीप चौफला ने कहा कि सरकारें अपने कर आधार को सुरक्षित रखना चाहती हैं, जबकि करदाता नीतिगत स्पष्टता और निश्चितता की अपेक्षा रखते हैं। यह तनाव वैश्विक कर सुधारों की केंद्रीय चुनौती बना हुआ है।

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब भारत सरकार नए आयकर कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है और वैश्विक न्यूनतम कर (Pillar Two) के क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श जारी है। विशेषज्ञों की राय यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत की कर नीति में प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय दोनों की भूमिका और बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विशेषज्ञों की प्रशंसा के साथ यह सवाल भी उठता है कि तकनीकी अवसंरचना और वास्तविक अनुपालन दर के बीच की खाई कितनी बड़ी है। वैश्विक न्यूनतम कर और AI के संदर्भ में भारत की तैयारी अभी नीति-चर्चा के स्तर पर है — क्रियान्वयन की समयसीमा अस्पष्ट है। करदाताओं को 'स्पष्टता और निश्चितता' देने की बात बार-बार दोहराई जाती है, पर टैक्स विवादों की बढ़ती संख्या और लंबित रिफंड के आँकड़े इस दावे को चुनौती देते हैं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत टैक्स अनुपालन में टेक्नोलॉजी के मामले में कहाँ खड़ा है?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत टैक्स अनुपालन के लिए टेक्नोलॉजी तेज़ी से अपनाने वाले देशों में अग्रणी है। GSTN इसका प्रमुख उदाहरण है जो करदाताओं और प्रशासन को एक साझे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।
GSTN क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
GSTN (Goods and Services Tax Network) भारत का जीएसटी डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो रिटर्न फाइलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलान और कर प्रशासन को एकीकृत करता है। यह करदाताओं और सरकार दोनों के लिए अनुपालन को सरल और पारदर्शी बनाता है।
वैश्विक न्यूनतम कर (Global Minimum Tax) भारत को कैसे प्रभावित करेगा?
एसोचैम सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक न्यूनतम कर व्यवस्था (Pillar Two) आने वाले समय में भारत की अंतरराष्ट्रीय कर नीति को पुनर्आकार देगी। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कर लगाने के तरीके और भारत के कर आधार की सुरक्षा दोनों प्रभावित होंगे।
23वाँ एसोचैम अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन कब और कहाँ हुआ?
यह सम्मेलन 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसमें PwC, एसोचैम टास्क फोर्स और नेशनल काउंसिल के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया।
AI का भारत की कर प्रणाली पर क्या असर होगा?
एसोचैम के राकेश नांगिया के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टाइगर ग्लोबल फैसले, नए आयकर कानून और वैश्विक न्यूनतम कर के साथ मिलकर भविष्य की कर व्यवस्था को परिभाषित करेगा। AI कर जाँच, अनुपालन निगरानी और रिफंड प्रक्रिया को स्वचालित करने में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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